शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास के प्रतीक हैं वानस्पतिक उद्यान


शोभाकारी उद्यानों में पाये जाने वाले हरे-भरे एवं रंग-बिरंगे पुष्प और पेड़-पौधे सभी को अपनी ओर आकृष्ट करते हैं। यही नहीं, ये उद्यान मानव जीवन से आदिकाल से ही बहुत निकट संबंध रखते हैं। मानव के जन्म से लेकर मृत्यु तक, लगभग सभी कार्य-कलापों एवं संस्कारों में शोभाकारी उद्यानों की उल्लेखनीय भूमिका रही है। सभी देवस्थानों एवं पूजा-प्रतिष्ठानों के अतिरिक्त, बड़े-बड़े नगरों में स्थित राजाप्रसादों से लेकर छोटे-छोटे ग्रामों के गरीब किसानों तक की झोपड़ी तक में शोभाकारी वनस्पतियों के दर्शन होते हैं। वास्तव में शोभाकारी वनस्पतियों और उद्यान मानव जीवन में सौन्यर्दबोध के प्रतीक हैं, लेकिन आज स्वार्थी मनुष्य अपनी भूख मिटाने हेतु इन अमूल्य वनस्पतियों का विनाश करने पर तुला हुआ है। इसी कारणवश अनेक पेड़-पौधों की कुछ प्रजातियां पूर्णतः लुप्त हो गयी हैं तथा कुछ लुप्त होने की कगार पर है। अतः इस अमूल्य धरोहर को बचाये रखना हमारा परम कर्तव्य बन जाता है। इस दिशा में सफलता प्राप्त करने के लिए उपयुक्त जगह है अच्छे वानस्पतिक उद्यानों का विकास करना, उनकी देखभाल करना आदि। वैसे हमारे देश में कई अच्छे वानस्पतिक उद्यान हैं जो विश्व में अपनी विशेषता बनाये हुए हैं। कलकत्ता का शिवपुर स्थित राॅयल वानस्पतिक उद्यान विश्व के विशेष उद्यानों में गिना जाता है, तो लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान और, वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून का वानस्पतिक उद्यान, ऊटी का राजकीय वानस्पतिक उद्यान, बंगलौर का लाल बाग, दार्जिलिंग का लोएड वानस्पतिक उद्यान तथा सहारनपुर का बागवानी अनुसंधान संस्थान, भी किसी से कम नहीं है। ये सभी उद्यान अपने-अपने विशेष पेड़-पौधों के संग्रह के लिए प्रसिद्ध हैं। इन सभी उद्यानों ने अपने आसपास के क्षेत्रों से संबंधित सभी नयी नयी फसलों की खेती को प्रोत्साहन दिया है। शोभाकारी पौधों ने जहां एक तरफ सौंदर्य बढ़ाया है, दूसरी तरफ उनकी खेती को भी व्यावसायिक दर्जा इन्हीं उद्यानों की मदद से मिला है। इन उद्यानों की सहायता से किसान नये-नये पौधों की खेती के वैज्ञानिक गुर सीखते हैं तथा अपनी आमदनी बढ़ाने में काफी हद तक सफल हुए हैं।

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हमारे देश के सभी वानस्पतिक उद्यान न केवल सौन्दर्य का आनन्द प्रदान करते हैं, बल्कि ये वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास के प्रतीक हैं। ये सभी उद्यान वैज्ञानिक तौर-तरीकों के आधार पर विकसित किये गये हैं तथा इनका उद्देश्य न केवल सौन्दर्य बढ़ाना है, बल्कि वैज्ञानिक, शैक्षिक एवं सामाजिक विकास को बढ़ाया देना है। आज के हालातों को देखकर अधिक से अधिक वानस्पतिक उद्यानों की स्थापना करना अति अनिवार्य हो गया है। इन उद्यानों की वजह से हमारे देश में अनेक नए नए पेड़ पौधे विदेश से लाए गए हैं तथा उनकी खेती शुरू की गयी है। इस प्रकार इस तरह के बहुत से नए पेड़-पौधों ने हमारे देश में एक क्रांति सी ला दी है। अर्थात हमारे सामाजिक एवं आर्थिक विकास में इन वानस्पतिक उद्यानों की भागीदारी को नकारा नहीं जा सकता। इसी प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में भी ये उद्यान कम नहीं है। हर वर्ष कितने ही विद्यार्थी वनस्पति शास्त्र में इन उद्यानों में शिक्षा ग्रहण करते हैं एवं वनस्पति शास्त्र की विभिन्न शाखाओं में स्नातकोत्तर एवं शोध द्वारा डाक्टरेट की उपाधि हासिल करते हैं।

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