सैलानियों का स्वर्ग हैं बर्फ से लदे पहाड़


हर सर्दी में मनाली,  नारकंडा,  शिमला,  श्रीनगर,  कुफरी में हजारों किलोमीटर का सफ़र तय कर के लोगों की भीड़ इक्कठा हो जाती है हैं | रूईनुमा फाहों को आसमान से गिरते देखने के लिए लोग कई-कई दिनो का इंतजार करते हैं |  एक-दूसरे पर बर्फ के गोले दागने का, बर्फ पर फिसलने का, गिरने-गिराने का जाने ऐसे कितने सपने है जो यदि कुदरत मेहरबान हो जाए तो सच हो जाते हैं तथा पर्यटकों को लगता है जैसे उनका जीवन सफल हो गया है। यह ऐसा दिव्य नजारा होता है जिससे पर्यटक सम्मोहित हुए बिना नहीं रह सकता। पर्यटकों का दिल गार्डन-गार्डन हो उठता है, तो नोटों की चमक से दुकानदारों की आँखे दमकने लगती है।

पर्यटक-मन आनंद की चरम सीमा पर होता है | खासकर ऐसे पर्यटकों का जिन्होंने बर्फ सिर्फ किताबों, चित्रों या फिल्मों में ही देखी है। पहाड, खेत, वृक्ष, घर, पत्थर, घास पर बर्फ ऐसे जम जाती है जैसे मानो पिंजी हुई रूई के फाहे करीने से सजा दी हो तथा समतल जगह पर तो ऐसा लगता है जैसे किसी ने सफेद कालीन बिछा दिया हों। प्रकृति के मूक संगीत को सुनने व देखने जैसा होता है, बर्फ गिरते हुए  देखना |

जैसे ही बर्फ गिरने का मौसम बनता है तो आसमान में सफेद परिंदे जैसे उड़ने लगते हैं, जिनका स्पर्श व उनकी जादुई उपस्थिति मन को आनंदित कर देते हैं। बच्चो व बड़े बर्फ के गुडिया या गुड्डा बनाने का खेल खेलने लगते है । बर्फ का सामिप्य युवाओं व नवविवाहितों के लिए रोमांस व मस्ती पैदा करता है। नवविवाहित जब अपने जीवन-साथी के आगोश में आते हैं तो उनका बर्फ पर एक साथ मादक अंदाज में चलना, गिरते हुए एक दूसरे को संभालना, मानो जैसे मस्ती को उनके रोम-रोम में भर देता है। ऐसी जगह पर महत्वपूर्ण दोस्त की भूमिका कैमरा निभाता है। बर्फ अपना आंचल बिछाती है जिसमे पर्यटक अपना साजो-सामान इकट्ठा कर गर्म पोशाकें, रंगीन टोपियां ओढ सोलंग नाला, कुफरी, नरकंडा, औली, गुलमर्ग जैसे प्रसिद्ध स्कीइंग प्वांइट्स आनंद लेने पहुँच जाते है । मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर बर्फ का गिरना बहुत शुभ माना जाता है।

सर्दियों के मौसम में अब पहले जैसी ठिठुरन और न पहले जैसी बर्फ ही पड़ती है, ऐसा ग्लोबल तापमान बढ़ने की वजह से हुआ है | पर्यावरण समृद्ध करने कि लिए ज्यादा से ज्यादा पेड पौधे लगाकर हम प्रकृति की गोद में बर्फीले खेतों की

गुलमर्ग का गंडोला

श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर से महज 51 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुलमर्ग तेजी से भारत में स्कीइंग राजधानी के नाम से प्रसिद्ध हो रहा है । अब इसे रोमांटिक शहरों में भी शुमार किया जाने लगा है। एशिया में सबसे ऊंचा व लंबा केबल-कार प्रोजेक्ट के लिए गुलमर्ग का गंडोला ही प्रसिद्ध है। यह गंडोला प्रत्येक घंटे में छह सौ लोगों को 12293 फुट ऊंचे तथा अफरवात चोटी के ठीक बगल में स्थित कोंगडूरी पर्वत पर ले जाता है । इस ऊंचाई पर पहुँच कर नीचे देखने पर कटोरीनुमा घाटी और बर्फ से लकदक पहाडों का नजारा अद्भुत और रमणीय होता है। यहां स्कीइंग का सीजन दिसंबर के मध्य से लेकर मई की शुरुआत तक रहता है। अगर गुलमर्ग जाए तो वहां ठहरने का मजा ही कुछ और है। यहाँ हर बजट के कुल मिलाकर 40 से ज्यादा होटल हैं।


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