New Delhi, 01 अक्टूबर (एजेंसी)। 2 अक्तूबर  1869 को गुजरात के पोरबंदर में महात्मा गांधी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।इस वर्ष देशभर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 152वीं जयंती मनाई जा रही है। विश्व में गांधी जी को उनके अहिंसात्मक आंदोलन के लिए जाना जाता है। विश्व अहिंसा दिवस, गांधी जी के प्रति वैश्विक तौर पर सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। गांधी जी का कहना था, ‘अहिंसा एक दर्शन है, एक सिद्धांत है और एक अनुभव है, जिसके आधार पर समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।’

गांधी जी ने लंदन में पढ़ाई करके बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की थी। भारत वापस आने पर उन्हें देश की स्थिति ने काफी प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने देश को आजाद करवाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। भारत को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी दिलाने में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का योगदान अतुलनीय है। शांति और अहिंसा के दम पर उनके द्वारा चलाए गए सत्याग्रह और आंदोलनों ने ब्रिटिश सरकार की ईंट से ईंट बजा दी थी। भारत छोड़ो आंदोलन के जरिए उन्होंने अंग्रेजों को देश छोड़कर जाने को मजबूर कर दिया था। महात्मा गांधी पर हर भारतीय गर्व करता है।

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ऐसे मनाई जाती है गांधी जयंती –

गांधी जयंती के मौके पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्ति नई दिल्ली स्थित राजघाट जाकर गांधी प्रतिमा के सामने श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है। बापू की समाधि पर राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री की उपस्थिति में प्रार्थना आयोजित की जाती है। भारत के हर कोने के साथ-साथ दुनिया के कई हिस्सों में भी महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। इस अवसर पर जगह-जगह रैली, पोस्टर प्रतियोगिता, स्पीच, डिबेट, नाटक समेत कई तरह के आयोजन किए जाते हैं।

क्या आप जानते हैं कि –

  •  महात्मा गांधी ने लंदन से कानून की पढ़ाई करने के बाद बैरिस्टर की डिग्री हासिल की थी लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई पहली बहस में वे असफल रहे थे।
  • दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनियों में से एक एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स गांधी जी को सम्मान देने के लिए गोल चश्मा पहनते थे।
  • भारत में महात्मा गांधी के नाम पर 50 से ज्यादा सड़कें हैं। वहीं, विदेश में उनके नाम पर लगभग 60 सड़के हैं।
  • महात्मा गांधी को पांच बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया। हालांकि उन्हें एक बार भी नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है।
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