जोखिम को कम करने के लिए जहां कुछ फंड मैनेजर अनेक स्टॉक में डाइवर्सिफिकेशन की रणनीति अपनाते हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो शेयर बाजार से कमाई के लिए एक कसे हुए पोर्टफोलियो को तरजीह देते हैं। कसाव से हमारा मतलब है कुछ ही शेयरों में निवेश। हाल ही में एक्सिस एसेट मैनेजमेंट (म्यूचुअल फंड कंपनी) ने एक्सिस फोकस्ड 25 इक्विटी नामक फंड लांच किया है जिसका उद्देश्य केवल 25 शेयरों में निवेश से कमाई करना है। खैर यह फंड प्रदर्शन के फ्रंट पर कैसा रहेगा इसका पता तो आने वाले समय में चलेगा लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या निवेशक को इस प्रकार के पोर्टफोलियो में निवेश करना चाहिए? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि हम जानते हैं कि जोखिम कम करने के लिए वित्तीय प्लानर अधिक स्टॉक में निवेश को डाइवर्सिफाई करने की सलाह देते हैं। बहरहाल इस प्रकार के छोटे पोर्टफोलियो पर केंद्रित फंड को फोकस्ड फंड कहते हैं।

फोकस्ड फंड वैसे इक्विटी फंड हैं जिनका निवेश तुलनात्मतक रूप से कम स्टॉक में होता है। आमतौर पर किसी सामान्य इक्विटी फंड में 30 से लेकर 80 शेयरों में निवेश किया जाता है जबकि फोकस्ड फंड का निवेश 20 से 25 शेयरों में ही किया जाता है। एक आम इक्विटी फंड, शेयर के बाजार पूंजीकरण की परवाह किए बगैर जहां सभी प्रकार के स्टॉक में निवेश करता है वहीं फोकस्ड फंड अधिकांशत: लार्ज कैप शेयरों में ही निवेश करते हैं। इस प्रकार के फोकस्ड एप्रोच पर काम करने वाली पांच से छह स्कीमें बाजार में मौजूद हैं।

फंड की विशेषता

फोक्सड फंड का मुख्य उद्देश्य श्रेष्ठ स्टॉक का चयन कर उनमें निवेश करना है न कि कई सारे स्टॉक में पैसा विभाजित करना। इस फंड का प्रयास उन शेयरों की खोज कर  उनमें पैसे लगाना है जिनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा हो, उनका प्रबंधन अच्छा हो और जिनमें विकास की क्षमताएं हो। इस प्रकार का निवेश इस सोच के साथ की जाती है कि लार्ज कैप अस्थिरता के दौरान निवेश के लिए बेहतर माने जाते हैं और जब भी आर्थिक अनिश्चितताएं हो तो इन पर दांव लगाना ही बेहतर होता है। और हां, यदि दांव सही बैठा तो मुमकिन है कि यह फंड किसी भी अन्य डाइवर्सिफाइड फंड से बेहतर प्रदर्शन कर दे।

निवेश के तर्क और चिंताएं

एक फोकस्ड फंड के कुछ फायदे तो कुछ नुकसान भी हं। यह फंड यह सुनिश्चित जरूर करेगा कि फंड मैनेजर एक एक शेयर का चयन तार्किक तौर पर कर रहा है। इस प्रकार के फंड में फंड मैनेजर अपनी पूरी क्षमता को पोर्टफोलियो के अध्ययन के लिए लगा सकता है और किए जा चुके निवेश पर भी अच्छे से नजर रख सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि 25 स्टॉक का प्रबंधन करना, 60 से 70 स्टॉक पर नजर रखने से अधिक आसान है। दूसरी तरफ चूंकि फंड एक फोकस्ड पोर्टफोलियो का प्रबंधन करता है तो इसमें जोखिम भी स्वाभाविक रूप से अधिक ही रहता है। यही वजह है कि इस फंड की सलाह उन्हीं निवेशकों को दी जाती है जो अधिक अस्थिरता को पचा सकें। यदि फंड मैनेजर का दांव गलत बैठता है तो यह फंड के रिटर्न को तेजी से खत्म कर सकता है।

निवेश करें या करें

एक बात तो साफ है कि आपके पोर्टफोलियो में चाहे 10 शेयर हो या 100 यह प्रतिफल की गारंटी नहीं दे सकता है। एक छोटे पोर्टफोलियो वाले फंड में अच्छा खासा जोखिम जरूर होगा लेकिन यदि पोर्टफोलियो काफी बड़ा हो तो यह फंड मैनेजर को ऊंचा रिटर्न प्राप्त करने में दिक्कत पहुंचा सकता है।

अब चूंकि समूचे पैसे को कम शेयरों में लगाना जोखिम भरा हो सकता है इसलिए अधिकांश निवेश सलाहकार निवेशकों को डाइवर्सिफाइड फंड में निवेश करने की सलाह देते हैं। लेकिन कुछ सलाहकार ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं कि बहुत अधिक शेयरों में निवेश करने से अच्छा है कि चुनिंदा अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में ही निवेश हो। वाइजइनवेस्ट एडवाइजर्स के सीईओ हेमंत रुस्तगी कहते हैं कि आप फोकस्ड फंड में निवेश कर सकते हैं पर यह आपकी रणनीति होनी चाहिए न कि मुख्य निवेश। उनके मुताबिक यदि निवेशक अपने 40 फीसदी निवेश को लार्ज कैप फंड में लगाना चाहता है तो वो 30 फीसदी निवेश सामान्य डाइवर्सिफाइड फंड में कर ले और बाकी का 10 फीसदी फोकस्ड फंड में कर ले। रुस्तगी के मुताबिक हालांकि फोकस्ड फंड में जोखिम जरूर होता है पर यह डाइवर्सिफाइड फंड से बेहतर प्रदर्शन करने का भी दमखम रखता है।

 

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