• टिकट को कैंसिल करने पर हवाई कंपनियों को पैसा रिफंड समय पर करना होगा

  • यात्री को ब्याज के तौर पर अलग से भी पैसा देना होगा

  • एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों को रिफंड के बजाए टिकट के बदले क्रेडिट शैल दे रही थीं

नई दिल्ली 24 सितम्बर (एजेंसी)। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान बुक हुए हवाई टिकट को कैंसिल करने पर हवाई कंपनियों को पैसा रिफंड समय पर करना होगा। ऐसा नहीं होने पर उसे यात्री को ब्याज के तौर पर अलग से भी पैसा देना होगा। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि यात्रियों को पूरा पैसा वापस करने का आदेश पहले ही एयरलाइंस कंपनियों को दिया जा चुका है। एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों को रिफंड के बजाए टिकट के बदले क्रेडिट शैल दे रही थीं। इसी के विरोध में कुछ यात्रियों ने सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की बात कही थी। हालांकि सरकार की तरफ से पहले ही डीजीसीए ने बताया था कि ग्राहकों की मर्जी के बगैर क्रेडिट शैल देना नियमों के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में कहा गया था कि कुछ पैसेंजर्स एक तय समय के अंदर क्रेडिट शेल इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं। ऐसे में फ्लाइट कैंसिल होने के बाद उन्हें पूरा रिफंड दिया जाना चाहिए। जिन यात्रियों ने 25 मार्च से लेकर के 14 अप्रैल के बीच टिकट बुक करके 15 मार्च से 3 मई के बीच यात्रा करने का प्लान बनाया था, उनके लिए 100 फीसदी बिना कैंसिलेशन चार्ज काटे यात्रियों को पूरा पैसा रिफंड करना होगा। रिफंड में देरी पर मासिक 0.5 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा।

केंद्र सरकार ने 31 अगस्त को इंटरनेशनल कॉमर्शियल पैसेंजर फ्लाइट पर बैन को 30 सितंबर तक के लिए बढ़ाया है। हालांकि, सरकार ने वंदे भारत मिशन के तहत चलाई जा रही फ्लाइट्स को छूट दी है। भारत में 25 मार्च से ही शेड्यूल इंटरनेशनल फ्लाइट्स को पूरी तरह से बंद कर रखा है। वहीं 25 मई से डोमेस्टिक फ्लाइटों को शुरू किया गया था।

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