दादाजी का निशाना सही जगह लगा

दादाजी का निशाना सही जगह लगा| Grandfather's target was the right place

इन दिनों टेलीविजन (TV) पर एक विज्ञापन (Advertisement) जोर शोर से प्रसारित किया जा रहा है। इस विज्ञापन में एक व्यक्ति डॉक्टर के पास रोग परीक्षण के लिए जाता है। जांच पड़ताल के बाद डॉक्टर बताते हैं कि उसे फेफड़े का रोग है। यह सुनते ही वह व्यक्ति बिस्तर से उठ भागता है और पूरे विश्वास के साथ डॉक्टर से कहता है कि उसे फेफड़े का रोग तो हो ही नहीं सकता।

उसका दावा है कि डॉक्टर (Docter) से परीक्षण (Test) में कहीं न कहीं कोई चूक हुई होगी। उसका कहना है कि उसे किडनी (kidney) की बीमारी तो हो सकती है किंतु फेफड़े का रोग नहीं। यह पूछे जाने पर कि उसके इस विश्वास की वजह क्या है, व्यक्ति कहता है कि उसने जिस कंपनी की क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी (critical illness policy) ले रखी है उसके तहत किडनी फेल (kidney failure) होने पर तो चिकित्सा के बिल (Medical Bill) की प्रतिपूर्ति की जाएगी, किंतु फेफड़े के रोग की कोई जगह नहीं है। भई, ऐसी मेडिक्लेम पॉलिसी (Mediclaim policy) किस काम की जिसमें उस बीमारी के इलाज का पैसा न मिलेे जिससे आप पीडि़त हों।


इसलिए जब कभी आप मेडिकल पॉलिसी (Medical policy) खरीदें, इस बात का ध्यान रखें कि वह चुनिंदा बीमारियों के लिए नहीं बल्कि उन सभी बीमारियों को कवर करती हो जिसके इलाज के लिए हॉस्पिटलाइज होना पड़े। मैंने इस विज्ञापन के बारे में आपको क्यों बताया? मेरा मकसद था आपको बड़े फलक का महत्व बताना। यदि आपका कैनवास बड़ा है तो चित्र अच्छा बनेगा। यदि आपका पोर्टफोलियो (Porfolio) बड़ा है तो उसका जोखिम घटक अपेक्षाकृत कम हो जाएगा।

एक दूसरा उदाहरण लेते हैं। यह भी एक ब्रोकिंग कंपनी (Broking Company) का विज्ञापन ही है। इस विज्ञापन में एक पोपले दादाजी अपने कांपते हाथों से किसी दूर बैठे व्यक्ति के सिर पर रखे सेब पर निशाना साध रहे हैं। वह व्यक्ति भय से पसीना पसीना हो रहा है। इसी बीच दादाजी के चश्मे का एक ग्लास टूटकर गिर जाता है। जो व्यक्ति सिर पर सेब लिए बैठा है, वह और अधिक चिंतित हो जाता है।

क्या पता, दादाजी की कमान से निकला तीर आंखों में जा लगे। इसी बीच उसके दिमाग में एक आइडिया आता है। वह तत्काल सेब को सिर से फेंक देता है और उसकी जगह बड़ा सा कद्दू रख लेता है। अब दादाजी से निशाने में चूक भी हुई तो तीर कद्दू पर ही लगेगा। आखिर निशाने का फलक इतना बढ़ जो गया। यह खेल है लार्ज कैप (Large cap), मिड कैप (Mid Cap) व स्मॉल कैप (small cap) का। लार्ज कैप कंपनियों में निवेश स्मॉल कैप व मिडकैप की तुलना में कहीं ज्यादा सेफ होता है।

दायरा बड़ा करने की बात सुनते सुनते आप सोचने लगे होंगे कि क्यों न २० लाख की जगह एक करोड़ रुपए का जीवन बीमा (Life Insurance) करा लिया जाए। पर कोई भी बीमा कंपनी जीवन बीमा (Life Insurance) का लक्ष्य तय करते वक्त आपका नेटवर्थ देखती है। हां, एक उपाय है। आप अपनी लायबिलिटी का बीमा (Insurance) करा लें। इससे आपके जीवन बीमा की रकम बढ़ जाएगी।

उदाहरण के लिए यदि आपने लोन (Loan) लेकर मकान खरीद रखा है तो अपने मकान का बीमा अर्थात् लोन का बीमा करा डालिए। लोन का बीमा (Loan Insurance) वस्तुत: एक प्रकार का जीवन बीमा ही है। किसी दुर्घटना (Accident) की दशा में न केवल आपके परिजनों को जीवन बीमा कंपनी बीमा की रकम देगी बल्कि साधारण बीमा कंपनी, जिससे आपने मकान का बीमा कराया था वह आपके मकान का बकाया लोन तो चुकाएगी ही, जितनी किस्तें आप दे चुके हैं, उसे आपको वापस भी कर देगी।

 

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Title: grandfathers target was the right place in Hindi  | In Category: अर्थ जगत arth jagat

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