शेयर बाजार (share market) में निवेश (Investment) को लेकर परिवार के लोग शायद ही सपोर्ट (Support) करें पर मकान, दुकान या प्लॉट खरीदने के नाम पर उनका भावनात्मक सहयोग बिन मांगे मिल जाता है। इस बात में कोई दोमत नहीं कि रियल एस्टेट (real estate) में निवेश (Investment) से बेहतरीन रिटर्न मिलता है पर उसमें किया गया निवेश उतना लिक्विड नहीं होता।

आसान शब्दों में कहें तो प्रॉपर्टी (Property) को बेचकर तत्काल कैश पाना मुश्किल है। इसलिए पोर्टफोलियो (portfolio) बनाते वक्त फायनेंसियल प्लानर (Financial Planner) रियल एस्टेट (real estate) को उतनी तवज्जो नहीं देते। लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। रियल एस्टेट (real estate) में निवेश (Investment) उतना ही लिक्विड है जितना कि बैंक (Bank) के बचत खाते (Saving Account) में रखा कैश। आइए चर्चा करें इन तरीकों की।

मान लीजिए आपके नाम कोई प्रॉपर्टी (Property) है जिसकी रजिस्ट्री हो चुकी है। इस प्रॉपर्टी पर आपने किसी तरह का लोन (Loan) नहीं लिया हुआ है। यदि आप इसे कैश में बदलना चाहते हैं तो एक ही तरीका है कि इसे बेच दें। यदि प्रॉपर्टी पचास लाख रुपए की है और आपको महज दस लाख रुपए की जरूरत है तो प्रॉपर्टी को बेचना बुद्धिमानी नहीं कही जाएगी। पर पैसे आएं कहां से?

आप प्रॉपर्टी गिरवी रख सकते हैं। पर गिरवी कहां रखें? इतना कैश किसके पास होगा और यदि किसी के पास होगा भी तो न जाने किस प्रकार की शर्तें रख दे। इसका सबसे बेहतर तरीका है कि आप बैंक के पास जाएं। यदि आपने प्रॉपर्टी पर किसी प्रकार का लोन (Loan) नहीं ले रखा है तो बैंक (Bank) आपकी प्रॉपर्टी का मूल्यांकन करेगा और आपकी लोन चुकाने की क्षमता का आकलन करने के बाद प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य का पचास प्रतिशत तक आपको बतौर कर्ज दे देगा।

यदि आपकी प्रॉपर्टी (Property) का बाजार मूल्य पचास लाख रुपए है तो आपको पच्चीस लाख रुपए तक का लोन (Loan) आसानी से मिल जाएगा। यदि आपको जरूरत केवल दस लाख रुपए की है तो बस उतना ही लीजिए। आमतौर से इस लोन की ब्याज दर तेरह फीसदी के आसपास होती है। हां, इस पर होम लोन (Home Loan) की तरह आपको आयकर संबंधी रियायत नहीं मिलेगी। पर लोन (Loan) मिलने की इस प्रक्रिया में पंद्रह दिन लग सकते हैं। यदि किसी आपातकाल के लिए पैसे चाहिए तो यह तरीका बेकार साबित होगा। घर में आग लगने पर कुआं खोदना बुद्धिमानी नहीं कही जाती है।

बेहतर तो यह है कि आप समय रहते प्रॉपर्टी (proprety) के पेपर लेकर बैंक के पास जाएं और उनसे ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी (Overdraft facility) की मांग करें। बैंक (Bank) आपकी प्रॉपर्टी (Property) का मूल्यांकन करेगा और उसके बाजार मूल्य के पचास से अस्सी फीसदी के बराबर की ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी (Overdraft facility) आपके एकाउंट में दे देगा।

प्रॉपर्टी के पेपर बैंक के पास जमा कराने होंगे। यदि पचास लाख की प्रॉपर्टी पर आपने ओवरड्राफ्ट की फैसिलिटी (Overdraft facility) ली और बैंक ने आपको तीस लाख रुपए का ओवरड्राफ्ट (Overdraft ) दिया तो आपके खाते में तीस लाख रुपए जमा राशि के तौर पर दिखेंगे। जब भी आप जितनी भी राशि निकालेंगे, उस पर तेरह फीसदी की दर से ब्याज लगेगा और यदि नहीं निकालेंगे तो कोई ब्याज नहीं लगेगा। इससे आपातकाल (Emergency) में आपको कैश की किल्लत नहीं पड़ेगी और प्रॉपर्टी के पेपर भी बैंक के पास सुरक्षित रहेंगे। यदि आपने लोन (Loan) लेकर प्रॉपर्टी खरीदी है तो भी इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस बारे में आपका बैंक आपको विस्तृत जानकारी दे सकता है।

 

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