• निफ्टी-50 सूचकांक की प्रति शेयर आय (ईपीएस) में भी खासी बढ़त देखी गई 
  • निफ्टी-50 की प्रति शेयर आय 10 दिनों में ही 8 फीसदी तक बढ़ गई
  • सूचकांक का ईपीएस उछलकर शुक्रवार को 371 रुपये पर जा पहुंचा

मुंबई। इस हफ्ते दलाल पथ पर जारी तेजी की ही तरह निफ्टी-50 सूचकांक की प्रति शेयर आय (ईपीएस) में भी खासी बढ़त देखी गई है। निफ्टी-50 की प्रति शेयर आय 10 दिनों में ही 8 फीसदी तक बढ़ गई है जिसमें भारती एयरटेल, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, लार्सन ऐंड टुब्रो और आईसीआईसीआई बैंक जैसी दिग्गज कंपनियों की सितंबर तिमाही का शुद्ध लाभ बढऩे की अहम भूमिका रही है।

इस तेजी का बड़ा कारण बाह्य कारकों के साथ ही असामान्य नफा-नुकसान भी रहा है लेकिन इनकी वजह से सूचकांक की मुख्य आय एवं ईपीएस में वृद्धि हुई है। इसका परिणाम यह हुआ है कि सूचकांक का ईपीएस उछलकर शुक्रवार को 371 रुपये पर जा पहुंचा।

गत 15 अक्टूबर को यह छह वर्षों के निम्नतम स्तर 343 रुपये पर था। इसके साथ ही जनवरी में रिकॉर्ड पर पहुंचने के बाद सूचकांक आय में जारी सतत गिरावट का सिलसिला भी थम गया है। सूचकांक के ईपीएस को कोविड महामारी से बुरी तरह प्रभावित मार्च एवं जून तिमाहियों में करीब 22 फीसदी का तगड़ा झटका लगा था।

सूचकांक की आय में आई इस अप्रत्याशित उछाल ने इस हफ्ते की तेजी के बावजूद आय की कीमत ;पीई के आधार पर इसे सापेक्षिक रूप से सस्ता बना दिया है। शुक्रवार को कारोबार बंद होते समय निफ्टी 33 गुना पीई पर कारोबार कर रहा था जो कि अक्टूबर के मध्य में इसके शीर्ष मूल्यांकन से करीब 200 आधार अंक नीचे है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में व्यापक बाजार में एक तेजी का दौर आने की संभावना पैदा हुई है।

निफ्टी के आय परिदृश्य में सबसे बड़ा बदलाव भारती एयरटेल की तरफ  से देखने को मिला जिसके दूसरी तिमाही के नतीजे 27 अक्टूबर को सामने आए थे। भले ही एयरटेल ने इस तिमाही में 763 करोड़ रुपये के शुद्ध घाटे की बात कही है लेकिन साल भर पहले की तुलना में उसकी आय करीब 22,000 करोड़ रुपये बढ़ी है। यह रकम एक सामान्य तिमाही में सूचकांक कंपनियों के संयुक्त शुद्ध लाभ का करीब पांचवे हिस्से के बराबर है। एयरटेल ने जुलाई-सितंबर 2019 में करीब 23,000 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दिखाया था।

इंडियन ऑयल का शुद्ध लाभ पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस तिमाही में करीब 12 गुना बढ़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी से हुए फायदे की इसमें अहम भूमिका रही है। वहीं कंपनी की शुद्ध बिक्री साल भर पहले की तुलना में 26 फीसदी तक गिर गई।

लार्सन ऐंड टुब्रो के तिमाही नतीजों ने भी सूचकांक की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इसका शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में करीब तिगुना बढ़कर 6ए700 करोड़ रुपये हो गया और इसने श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया को अपना इलेक्ट्रिकल एवं ऑटोमेशन कारोबार की बिक्री से करीब 8,500 करोड़ रुपये के कर.पश्चात लाभ की भी चर्चा की।

इसी तरह आईसीआईसीआई बैंक का शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में चार गुना बढ़ गया। फंसे कर्जों में आई बड़ी गिरावट और उसके लिए जरूरी वित्तीय प्रावधान की जरूरत नहीं रह जाने से बैंक के नतीजे काफी अच्छे रहे।

इन चार कंपनियों की प्रति शेयर आय में आए उछाल ने रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनैंस, बजाज ऑटो, एचडीएफसी और इंडसइंड बैंक जैसी दूसरी बड़ी कंपनियों की आय में आई गिरावट की पूरी तरह भरपाई कर दी।

कुल मिलाकर बिजऩेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 34 निफ्टी कंपनियों का सम्मिलित शुद्ध लाभ जुलाई-सितंबर 2019 की तुलना में 60 फीसदी तक अधिक रहा। हालांकि असाधारण नफा-नुकसान के समायोजन के बाद शुद्ध लाभ महज 5 फीसदी ही अधिक रहा।

विश्लेषकों के मुताबिक, अर्थव्यवस्था की हालत सुधरने से यह सिलसिला आगे भी बना रह सकता है। सिस्टेमेटिक इंस्टिट्यूशनल इक्विटी के शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा कहते है, अधिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां सुधरने से कंपनियों की आय बेहतर ही होने की संभावना है।

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