यदि बीच में ही जीवन बीमा पॉलिसी को बंद करना चाहते हैं, तो ऐसे में आयकर भरना अतिआवश्यक होता है । वैसे जीवन बीमा पॉलिसी के सरेंडर के समय भुगतान की रकम पर कर के लिये अलग से कुछ बताया नहीं गया है। आयकर में बचत के लिये वार्षिक प्रीमियम भरना जरूरी हैं तथा उसका कम से कम दस गुना रकम आपको बीमित होना जरूरी है ।

अगर क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो रखें इन बातों का ख्याल

यदि आयकर की धारा 80 C  में बीमा की प्रीमियम दिखाकर आयकर में छूट ली गयी है तो ऐसे में उस बीमा को कम से कम पाँच वर्ष तक अपने पास रखना होता है । अगर बीमा को पाँच वर्ष के पहले ही सरेंडर करना चाहते है तो आपको अपने आयकर पर प्राप्त उस छूट पर कर देना होगा। इसलिये बीमा के प्रीमियम की छूट आयकर की धारा 80 C के तहत ली गयी है तो इसका पाँच वर्ष का लॉकइन होता है।

यदि आपने एन्डोमेंट जीवन बीमा पॉलिसी ले ली है तो उसे बीच में सरेंडर करके टर्म इन्श्योरेंस लेकर अपनी गलती को सुधारा जा सकता हैं । टर्म इन्श्योरेंस अपनाकर अपने परिवार के लिए अधिक बीमित रकम सुरक्षित कर के शेष राशि जो बचती है, उस रकम को म्यूचुयल फंड में लगाकर अपने निवेश को दुगुना कर सकते हैं। एन्डोमेंड जीवन बीमा पॉलिसी में अधिक प्रीमियम में बीमित रकम बहुत ही कम होती है और साथ ही उस पर होने वाला लाभ भी बहुत कम होता है।

यदि ब्रोकर से आपको स्कीम समझ नहीं आती है तो आप किसी भी ऑनलाईन वैबसाईट पर जाकर इसकी जानकारी ले सकते है ।

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