रिटायरमेंट (Retirement) से प्राप्त पैसे को कहां करें निवेश

Where to invest your retirement money in hindi

Where to invest your retirement money in hindi:

हम सभी कभी न कभी वित्तीय योजना (Financial Planning) बनाते हैं। योजना कार खरीदने की, योजना घर खरीदने की, शादी की, बच्चों की पढ़ाई की, फिर बच्चों की शादी की और इन सब से फुरसत मिले तो अपने रिटायरमेंट (Retirement) की। बात जरा अजीब लगे लेकिन हम इस सांध्य बेला के लिए योजना बनाने को प्राथमिकता सूची में सबसे नीचे रखते हैं। जबकि गौर से देखिए तो इसकी योजना लोगों को सबसे पहले बनानी चाहिए क्योंकि रिटायर (Retaire) होने के बाद आय (Income) का स्रोत नहीं होता है पर खर्च बदस्तूर जारी रहता है। बाकी के दिनों में कम से कम आपके पास आय (Income)  का एक साधन तो होता ही है।

सभी वित्तीय सलाहकार (Financial Planner ) मानते हैं कि रिटायरमेंट की प्लानिंग (Retirement Planning) जितनी जल्दी शुरू की जाए उतना अच्छा है। सही बात है जितना जल्दी निवेश (Invesment) शुरू होगा अंतत: रिटर्न (return) भी उतना ही अधिक मिलेगा। कमाई के दिनों में यदि आपने रिटायरमेंट प्लानिंग की सोच ली तो आप विभिन्न एसेट क्लास जैसे, रियल एस्टेट (Real estate), स्टॉक (Stock Market), म्यूचुअल फंड (Mutual Funds), बीमा (Insurance), पेंशन प्लान (Pension plan), एफडी (Fixed deposit), जमा पत्र और सोना (Gold) आदि में पैसे लगाएंगे। ध्यान रहे इन दिनों में आपके पास जोखिम लेने की क्षमता होगी। और जैसा कि इनका ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा है, आपकी ढलती उम्र में यह आपको एक बड़ी राशि उपलब्ध करा देगा।


अब एक बड़ा प्रश्न है कि यदि आप रिटायर हो चुके हैं और फिर आप आगे के दिनों के लिए योजना बनाने से चूक गए हैं तो क्या? अनिल कौल बताते हैं कि रिटायरमेंट (Retirement ) के बाद भी योजनाएं बनाई जा सकती हैं।  उनके मुताबिक यदि आप अपनी जिंदगी  में अपने रिटायरमेंट (Retirement ) के दिनों के लिए योजना नहीं बना पाए हैं तो फिर यह आपके लिए आखिरी मौका है और इस मौके को बेहद समझ बूझकर इस्तेमाल करना चाहिए।

जरूरत जैसी, निवेश वैसा

रिटायरमेंट (Retirement) के बाद लोगों की जरूरतें अलग अलग हो सकती हैं। कौल मानते हैं कि संभव है किसी की जरूरत मंथली कैश फ्लो Monthly Cash flow (हर महीने सतत पैसा आता रहे) की हो सकती है तो किसी को एक अवधि पांच साल या 10  साल बाद एकमुश्त पैसे की हो सकती है। उनके अनुसार यदि किसी को हर महीने आय (Income) का स्रोत बरकरार रखना है तो वो (Senior Citizen Scheme) सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (वरिष्ठ नागरिक बचत योजना) तथा डाकघर और म्यूचुअल फंड के मंथली इनकम प्लान (मासिक आय योजना) का चयन कर सकता है। वहीं यदि किसी को एकमुश्त पैसा चाहिए तो वो बैंक (Bank) और डाकघर (Post office) की फिक्स डिपोजिट (सावधि जमा) तथा बांड आदि को भी अपना सकता है।

इनका रखें ध्यान

दरअसल जब कोई नौकरीपेशा व्यक्ति रिटायर (Retaire) होता है तो उसके पास विभिन्न स्रोतों से एकमुश्त नगदी आ जाती है। यह प्रॉविडेंट फंड (Provident fund) हो सकता है, पेंशन (Pension) हो सकता है, बची छुट्टियों का भत्ता हो सकता है या फिर वॉलंट्री रिटायरमेंट (Volentry retirement scheme) का । इनके अलावा भी मुमकिन है कि व्यक्ति सुरक्षा की दृष्टि से अपने सभी निवेश (स्टॉक, म्यूचुअल फंड, पीपीएफ, सोना और बीमा आदि) को भुनाकर भी एक उचित जगह लगाना चाहे। इन स्थितियों में कई सवाल मन में आएंगे जैसे कि उम्र के इस पड़ाव पर निवेश करने का उचित जगह कौन सा है? कहां से अच्छा रिटर्न मिलेगा? और क्या निवेश से पहले क्या ध्यान में रखा जाए?

वेल्थकेयर सिक्योरिटीज के डायरेक्टर मुकेश गुप्ता बताते हैं कि रिटायरमेंट पर प्राप्त पैसे को जहां भी निवेश करें यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि कम से कम उसका मूलधन जरूर सुरक्षित हो। उनका मानना है कि उम्र की इस दहलीज पर व्यक्ति का निवेश नियंत्रित होना चाहिए।

मतलब यदि व्यक्ति का खर्च 12000 रुपये महीने का है और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना उसके 15 लाख रुपये के निवेश पर इस जरूरत को पूरा कर दे रहा है तो बेवजह जोखिम नहीं लेना चाहिए। यदि व्यक्ति की जरूरत मान लीजिए कि 18000 रुपये की हो तो फिर स्टॉक और म्यूचुअल फंड जैसे जोखिम वाले साधनों में निवेश किया जा सकता है। गुप्ता मानते हैं कि हर लिहाज से एक रिटायर हो चुके व्यक्ति को अपने पोर्टफोलियो का 70 से 80 फीसदी निवेश जोखिम रहित साधनों में ही करना चाहिए।

निवेश के विभिन्न साधन

एक अवकाश प्राप्त व्यक्ति निम्न साधनों को निवेश के लिए अपना सकता है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior citizen saving scheme): 

सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे इस साधन को विशेषकर अवकाश प्राप्त लोगों के लिए डिजाइन किया गया है। 60 साल से अधिक उम्र का अवकाश प्राप्त व्यक्ति या फिर 55 साल से अधिक उम्र का ऐसा व्यक्ति जिसने वोलंटरी रिटायरमेंट (Volentry retirement) ले ली हो, ही इस स्कीम में निवेश (Investment) के योग्य होता है। इस स्कीम में निवेश (Investment) करने की न्यूनतम राशि 1000 रुपये जबकि अधिकतम राशि 15  लाख रुपये है। एक निवेशक को इस स्कीम में निवेश करने पर 9.0 फीसदी की ब्याज दर से रिटर्न राशि प्राप्त होता रहता है। इस प्रकार यदि एक व्यक्ति और उसकी पत्नी दोनों कमाते हैं और उन दोनों की उम्र 60 साल से ऊपर है तो वो हर महीने 30 लाख रुपये के निवेश पर 22500 रुपये बतौर ब्याज  प्राप्त करेंगे।

वरिष्ठ नागरिक बचत खाते को डाकघर, भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) या फिर अन्य सरकारी बैंकों (Government Bank) की चुनिंदा शाखाओं में खुलवा सकते हैं। यह जरूरी है कि निवेश (Investment) का पैसा कम से कम पांच सालों तक जमा रहे। हालांकि इस स्कीम के निवेशक को परिपक्वता से पहले निकासी की सुविधा दी गई है लेकिन वो भी निवेश तिथि के एक साल बाद ही संभव है। यदि निवेश दो साल से पहले निकाला जाता है तो कुल जमा की 1.50 फीसदी राशि काट ली जाती है और यदि दो साल बाद पैसा निकाला जाता है तो कुल जमा राशि का एक फीसदी काट लिया जाता है। इस स्कीम में ब्याज (Interest) की अदायगी प्रत्येक तिमाही, मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में होती है। यदि आपकी कुल आय कर योग्य न हो तो बैंक में फॉर्म 15 जी और 15 एच जमा करा सकते हैं जिससे की टैक्स न कटे।


डाकघर मासिक आय योजना (Post office monthly income scheme)

इस योजना का संचालन डाकघरों से होता है। इस योजना में न्यूनतम निवेश राशि 1500 रुपये होती है जबकि अधिकतम निवेश राशि 450000  रुपये होती है। 6 साल की परिपक्वता अवधि वाले इस स्कीम पर 8.0 फीसदी की दर से निवेशक को रिटर्न (Return) प्राप्त होता है जिसकी अदायगी हर माह की जाती है। इस प्रकार यदि एक व्यक्ति और उसकी पत्नी दोनों कमाते हैं और उन दोनों की उम्र ६० साल से ऊपर है तो वो हर महीने ९ लाख रुपये के निवेश पर 6000 रुपये बतौर ब्याज प्राप्त करेंगे।

परिपक्वता अवधि के बाद निवेशक को पांच फीसदी का बोनस (Bonus) भी दिया जाता है। इस स्कीम में निवेश (Investment) के एक साल बाद निकासी की जा सकती है। यदि निकासी निवेश (Investment) से तीन साल पहले की जा रही है तो  ऐसे में जमा राशि का 2.0 फीसदी राशि काट लिया जाएगा वहीं तीन साल के बाद की निकासी पर 1.0 फीसदी की राशि काटी जाएगी। ब्याज पर जो आय प्राप्त होती है उस पर टीडीएस नहीं काटा जाता है।

म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) में भी एमआईपी (MIP) होते हैं जिनमें 11.0 फीसदी तक का ऊंचा रिटर्न मिल सकता है। हालांकि इस प्रकार के फंड में भी 70 से 80 फीसदी निवेश डेट में हो रहा होता है ताकि निवेशक का मूलधन सुरक्षित रहे। पर चूंकि यह प्रतिभूति बाजार से जुड़ा है इसलिए इसके रिटर्न की गारंटी नहीं होती है।

बांड (Bonds)

कई सरकारी और गैर सरकारी बांड (Bonds) बाजार में आए दिन निवेश के लिए आते रहते हैं। इनमें से कुछ टैक्स फ्री बांड (Tax Free Bonds) भी होते हैं। यदि व्यक्ति टैक्स स्लैब के उस श्रेणी में है जहां उसे कर चुकाना पड़ता है तो वो टैक्स फ्री बांड (Tax Free Bonds) में निवेश (Investment) कर सकता है और यदि वो ऐसे श्रेणी में है जहां कर नहीं चुकाना पड़ता तो निवेश के लिए टैक्स वाले बांड (Tax Free Bonds) को भी चुना जा सकता है। बांड में निवेश लंबी अवधि के लिए होता है लेकिन तरलता के लिए यह बांड एक्सचेंज पर लिस्ट भी होते हैं। यदि आप तकनीकी का थोड़ा उपयोग कर सकते हैं या इसके लिए मदद ले सकते हैं तो बांड (Bonds) में भी निवेश (Investment) किया जा सकता है। बांड का निवेश सुरक्षित भी रहता है और यहां निवेश की सीमा भी नहीं होती है। बांड में 8 से 10 फीसदी की ब्याज की कमाई हो जाती है। चूंकि अब ब्याज दर घटने वाले हैं ऐसे में बांड की प्राप्तियां (यील्ड) बढ़ेंगी। इस प्रकार यह निवेश के लिए अच्छा समय है।


फिक्स डिपोजिट (Fixed deposit):

उपरोक्त विकल्पों के बाद भी यदि पैसा बचता है और यदि आप अपने निवेश (Investment) को डाइवर्सिफाई (diversify) करना चाहते हैं तो डाकघर, बैंक, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) या कॉरपोरेट (सामान्य कंपनियां) की विभिन्न सावधि जमा योजनाओं में पैसा लगाया जा सकता है। सामान्य एफडी (Fixed deposit) की तुलना में आमतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को निवेश पर 0.5 फीसदी अधिक दर से अदायगी की जाती है।

इन सभी में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती है। आप अपनी जरूरत को देखते हुए जिस अवधि के लिए चाहे अपनी नगदी की पार्किंग कर सकते हैं। डाकघर (Postoffice) और बैंकों (Banks) में विभिन्न जमा अवधि के विकल्प मौजूद होते हैं जिनमें आपको ६.५ फीसदी से १०.० फीसदी की ब्याज प्राप्त हो जाता है। वहीं एनबीएफसी और कॉरपोरेट डिपोजिट में 10.0 से लेकर 12.5 फीसदी तक का ब्याज प्राप्त होता है। चूंकि ये दोनों विकल्प सरकारी नहीं हंै इसलिए उतने सुरक्षित भी नहीं माने जाते हैं। व्यक्ति यह ध्यान में जरूर रखे कि एफडी में तरलता की दिक्कतें होती है और इनमें परिपक्वता से पहले निकासी करना महंगा पड़ जाता है।

 


 

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