फूल तितली झील झरने चाँद तारे रख दिए मेरी दो आँखों में उसने सब नज़ारे रख दिए। मानता हूँ ज़िन्दगी की गोद तो मेरी ही थी हाँ मगर इस गोद में सपने तुम्हारे रख दिए। उसकी ख़ातिर उसके दरवाज़े पे अपना दिल रखाए प्यार तो रक्खा ही रक्खाए सुख भी […]

झांके है कोई पलपल अहसास की नदी में, होने लगी है हलचल अहसास की नदी में।   पानी में जब वो झांके, चांदी-सी चमकी जैसे, उतरा हो जैसे बादल अहसास की नदी में।   महके हैं लफ्ज़ सारे, घोला है जैसे तुमने, खुशबू का कोई काजल अहसास की नदी में। […]

अहसास का फलक़ है, अल्फाज़ की ज़मीं है, लगता है मेरे दिल को, तू भी यहीं-कहीं है।   जब से किया है मैने, तेरे हवाले ख़ुद को, दुनिया में दिल ये मेरा, लगता कहीं-नहीं है।   गहरी नदी है, टूटी है नाव मेरी, लेकिन मुझको बचा तू लेगा, तुझपे मुझे […]

हम तुम्हारे ग़ुलाम हो न सके, ख़ास रह करके आम हो न सके।   हमने अपनाये नहीं हथकंडे, इसलिये अपने काम हो न सके।   जी-हज़ूरी किसी की हो न सकी, ये पदक अपने नाम हो न सके।   रोज़ सूरज-सा निकलना था हमें, इक सुहानी-सी शाम हो न सके। […]

प्यार कब आगे बढ़ा तक़रार से रहकर अलग, सीढ़ियां बनती नहीं दीवार से रहकर अलग।   रुक गये तो मौत के आग़ोश में आ जाओगे, सांस चलती ही नहीं रफ़्तार से रहकर अलग।   नफ़रतें ही नफ़रतें, बस उलझनें ही उलझनें, ज़िन्दगी में ये मिला है प्यार से रहकर अलग। […]

आंगन में तेरा अक्सर दीवार खड़ी करना कुछ अच्छा नहीं लगता तक़रार खड़ी करना।   सच ये है कि मुश्किल है दीवार खड़ी करना बस ख्वाब में आसां है मीनार खड़ी करना।   चल छोड़, भुला भी दे नफ़रत की कहानी को क्यों बात को बेमतलब हरबार खड़ी करना।   […]

उजाले की हुई पत्थर सरीखी पीर को तोड़ें उठो, उठकर अंधेरे की कड़ी प्राचीर को तोड़ें।   नहीं टूटी तो आंखों का समन्दर सूख जाएगा हृदय के पर्वतों से दर्द की तासीर को तोड़ें।   खुले माहौल की खुशबू पे हक़ हम सबका बनता है अगर हम दायरे के पांव […]

ऐसा भी कोई तौर तरीका निकालिये। अहसास को अल्फाज़ के सांचे में ढालिये।।   जलता रहे जो रोज़ ही नफ़रत की आग में, ऐसा दिलो दिमाग़ में रिश्ता न पालिये।।   दीवार रच रही है बांटने की साजिशें, उठिये कि घर संभालिये, आंगन संभालिये।।   सोया है गहरी नींद में […]

वक़्त की सियासत के, क्या अजब झमेले हैं। आइने तो ग़ायब हैं, चेहरे अकेले हैं।।   अब बतायें क्या तुमकोa दोस्तों की साजिश ने उस तरफ के ग़म सारे इस तरफ धकेले हैं।।   रास्ते टटोले तो, रास्ते मिले, लेकिन तीरगी के सब नश्तर, उंगलियों ने झेले हैं।।   हम […]

गुमनाम हर बशर की पहचान बनके जी जो हैं उदास उनकी मुस्कान बनके जी।   गूंगी हुई है सरगम, घायल हैं साज़ सब, हर हाल में तू इनका सम्मान बनके जी।   जो मन को मुग्ध कर दे, हलचल मचा दे जो, ऐसी तू शंख-मुरली की तान बनके जी।   […]

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