|| दोहा || नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदंब। संत जनों के काज में, करती नहीं बिलंब॥ || चौपाई || जय जय जय विन्ध्याचल रानी। आदि शक्ति जगबिदित भवानी॥ सिंह वाहिनी जय जगमाता। जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता॥ कष्ट निवारिनि जय जग देवी। जय जय संत असुर सुरसेवी॥ महिमा अमित […]

Shri Veerbhadra Chalisa || दोहा || वन्‍दो वीरभद्र शरणों शीश नवाओ भ्रात । ऊठकर ब्रह्ममुहुर्त शुभ कर लो प्रभात ॥ ज्ञानहीन तनु जान के भजहौंह शिव कुमार। ज्ञान ध्‍यान देही मोही देहु भक्‍ति सुकुमार। || चौपाई || जय-जय शिव नन्‍दन जय जगवन्‍दन । जय-जय शिव पार्वती नन्‍दन ॥ जय पार्वती […]

जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा। जय काली और गौरा कृतसेवा।। तुम पापी उद्धारक दुख सिन्धु तारक। भक्तों के सुखकारक भीषण वपु धारक।। वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी। महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी।। [wp_ad_camp_2] तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे। चतुर्वतिका दीपक दर्शन दुःख खोवे।। तेल […]

ऊँ जय गंगे माता, श्री गंगे माता । जो नर तुमको ध्यावत, मनवंछित फल पाता।। ऊँ जय गंगे माता… चन्द्र सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ।। ऊँ जय गंगे माता… [wp_ad_camp_2] पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता । कृपा […]

ओम जय जगदीश हरे आरती Om jai jagdish hare aarti ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओउम…… जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओउम…… मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं […]

श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं नव कंजलोचन, कंज मुख, करकंज, पद कंजारुणं।   कंदर्प अगणित अमित छबि नवनीत नीरद सुंदरं। पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।   भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश निकंदनं। रघुनन्द आनंदकंद कौशलचंद दशरथ नंदनं ।। [wp_ad_camp_2] सिरा मुकुट कुंडल तिलक […]

भानु चौधरी अपने गॉँव के मुखिया थे। गॉँव में उनका बड़ा मान था। दारोगा जी उन्हें टाटा बिना जमीन पर न बैठने देते। मुखिया साहब को ऐसी धाक बँधी हुई थी कि उनकी मर्जी बिना गॉँव में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। कोई घटना, चाहे, वह सास-बहु का […]

Bade Ghar ki Beti (बड़े घर की बेटी) हिंदी के प्रख्यात कथाकार मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) की कहानी है। इस कहानी में प्रेमचंद जी ने संयुक्त परिवारों में होने वाली कलहों, समस्याओं और जरा जरा सी बातों के बतगंड बन जाने को बड़ी सुंदरता से दर्शाया है। बड़े घर की […]

वेदों-ग्राम में महादेव सोनार एक सुविख्यात आदमी था। वह अपने सायबान में प्रात: से संध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खटखट किया करता था। यह लगातार ध्वनि सुनने के लोग इतने अभ्यस्त हो गये थे कि जब किसी कारण से वह बंद हो जाती, तो जान पड़ता था, कोई […]

पूर्ण स्वराज्य का जुलूस निकल रहा था। कुछ युवक, कुछ बूढ़ें, कुछ बालक झंडियां और झंडे लिये बंदेमातरम् गाते हुए माल के सामने से निकले। दोनों तरफ दर्शकों की दीवारें खड़ी थीं, मानो यह कोई तमाशा है और उनका काम केवल खड़े-खड़े देखना है। शंभुनाथ ने दूकान की पटरी पर […]