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आरती

चामुण्डा देवी की आरती

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी। निशिदिन तुमको ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवजी॥ जय अम्बेमाँग सिन्दूर विराजत, टीको, मृगमद को। उज्जवल से दोउ नयना, चन्द्रबदन नीको॥ जय अम्बेकनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे। रक्त पुष्प गलमाला, कंठ हार साजे॥ जय अम्बेहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी। सुर नर मुनिजन सेवत, तिनके
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वैष्णो माता की आरती

जय वैष्णव माता, मैया जय वैष्णव माता। द्वार तुम्हारे जो भी आता, बिन माँगे सब कुछ पा जाता।। ऊँ जय वैष्णो माता। तू चाहे तो जीवन दे दे, चाहे पल मे खुशियां दे दे। जन्म मरण हाथ तेरे है शक्ति माता ।। ऊँ जय वैष्णो माता। जब जब जिसने तुझको पुकारा तूने दिया है बढ़ […]
प्रेमचंद की कहानियां

दुख दशा – मुंशी प्रेमचंद की कहानी | Dukh dasha munshi premchand story

सौभाग्यवती स्त्री के लिए उसक पति संसार की सबसे प्यारी वस्तु होती है। वह उसी के लिए जीती और मारती है। उसका हँसना-बोलना उसी के प्रसन्न करने के लिए और उसका बनाव-श्रृंगार उसी को लुभाने के लिए होता है। उसका सोहाग जीवन है और सोहाग का उठ जाना उसके जीवन का अन्त है। कमलाचरण की […]
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श्री सत्यनारायणजी की आरती

ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा | सत्यनारायण स्वामी ,जन पातक हरणा रत्नजडित सिंहासन , अद्भुत छवि राजें | नारद करत निरतंर घंटा ध्वनी बाजें ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.... प्रकट भयें कलिकारण ,द्विज को दरस दियो | बूढों ब्राम्हण बनके ,कंचन महल कियों ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... दुर्बल भील कठार, जिन पर कृपा […]
आरती

देवी अन्नपूर्णा की आरती

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम... जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम।अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥ बारम्बार... प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम।सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥ बारम्बार... चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम।चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥ बारम्बार... देवि देव! दयनीय दशा में […]
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भगवान नरसिंह की आरती

!! ॐ जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरेस्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे जनका ताप हरेॐ जय नरसिंह हरे !! !! तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारीअद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारीॐ जय नरसिंह हरे !! !! सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारीदास जान […]
प्रेमचंद की कहानियां

राजहठ: प्रेमचंद की कहानी

दशहरे के दिन थे, अचलगढ़ में उत्सव की तैयारियॉँ हो रही थीं। दरबारे आम में राज्य के मंत्रियों के स्थान पर अप्सराऍं शोभायमान थीं। धर्मशालों और सरायों में घोड़े हिनहिना रहे थे। रियासत के नौकर, क्या छोटे, क्या बड़े, रसद पहुँचाने के बहाने से दरबाजे आम में जमे रहते थे। किसी तरह हटाये न हटते […]
प्रेमचंद की कहानियां

त्रिया चरित्र: प्रेमचंद की कहानी

सेठ लगनदास जी के जीवन की बगिया फलहीन थी। कोई ऐसा मानवीय, आध्यात्मिक या चिकित्सात्मक प्रयत्न न था जो उन्होंने न किया हो। यों शादी में एक पत्नीव्रत के कायल थे मगर जरुरत और आग्रह से विवश होकर एक-दो नहीं पॉँच शादियॉँ कीं, यहॉँ तक कि उम्र के चालीस साल गुजए गए और अँधेरे घर […]
प्रेमचंद की कहानियां

मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध हिंदी कहानी डिप्टी श्यामचरण

डिप्टी श्यामाचरण की धाक सारे नगर में छायी हई थी। नगर में कोई ऐसा हाकिम न था जिसकी लोग इतनी प्रतिष्ठा करते हों। इसका कारण कुछ तो यह था कि वे स्वभाव के मिलनसार और सहनशील थे और कुछ यह कि रिश्वत से उन्हें बडी घृणा थी। न्याय-विचार ऐसी सूक्ष्मता से करते थे कि दस-बाहर […]
प्रेमचंद की कहानियां

मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध हिंदी कहानी प्रेम का स्वप्न

मनुष्य का हृदय अभिलाषाओं का क्रीड़ास्थल और कामनाओं का आवास है। कोई समय वह थां जब कि माधवी माता के अंक में खेलती थी। उस समय हृदय अभिलाषा और चेष्टाहीन था। किन्तु जब मिट्टी के घरौंदे बनाने लगी उस समय मन में यह इच्छा उत्पन्न हुई कि मैं भी अपनी गुड़िया का विवाह करुँगी। सब […]