Javed Akhtar ki nazam wo kamra baat karth tha wo kamra baat kartha tha मैं जब भी ज़िंदगी की चिलचिलाती धूप में तप कर मैं जब भी दूसरों के और अपने झूट से थक कर मैं सब से लड़ के ख़ुद से हार के जब भी उस एक कमरे में […]

शोर परिंदों ने यु ही न मचाया होगा कोई जंगल की तरफ़ शहर से आया होगा पेड़ के कांटने वालो को ये मालूम तो था जिस्म जल जायंगे जब सर पे न साया होगा मानिए जश्न-ऐ-बहार ने ये सोचा भी नहीं किसने कांटो को लहू पाना पिलाया होगा अपने जंगल […]

रात भर सर्द हवा चलती रही रात भर हमने अलाव तापा मैंने माज़ी से कई ख़ुश्क सी शाख़ें काटीं तुमने भी गुज़रे हुए लम्हों के पत्ते तोड़े मैंने जेबों से निकालीं सभी सूखी नज़्में तुमने भी हाथों से मुरझाए हुए ख़त खोले अपनी इन आँखों से मैंने कई मांजे तोड़े […]

Hina Khan did a dance on ‘A Mary Joura Jabbai’, know for some reasons why the video was viral : पिछले कुछ समय से टीवी एक्ट्रेस हिना खान लगातार सुर्ख़ियों में बनी हुई हैं। पहले आबू धाबी में अपने बॉयफ्रेंड के साथ सगाई को लेकर तो फिर राखी सावंत के […]

अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ मैं चाहता था चराग़ों को आफ़्ताब करूँ मुझे बुतों से इजाज़त अगर कभी मिल जाए तो शहर-भर के ख़ुदाओं को बे-नक़ाब करूँ उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूँ है मेरे चारों […]

सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद* है दिल पे रख के हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है कोठियों से मुल्क के मेआर* को मत आंकिए असली हिंदुस्तान तो फुटपाथ पे आबाद है जिस शहर में मुंतजिम* अंधे हो जल्वागाह के उस शहर में रोशनी की बात बेबुनियाद है ये […]

लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों है इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यों है मैं ना जुगनू हूँ दिया हूँ ना कोई तारा हूँ रौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं नींद से मेरा ताल्लुक ही नहीं बरसों से ख्वाब आ – […]

राम बन-बास से जब लौट के घर में आए याद जंगल बहुत आया जो नगर में आए रक़्स-ए-दीवानगी आँगन में जो देखा होगा छे दिसम्बर को श्री राम ने सोचा होगा इतने दीवाने कहाँ से मिरे घर में आए जगमगाते थे जहाँ राम के क़दमों के निशाँ प्यार की काहकशाँ […]

इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है एक चिनगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तों इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती […]

आँख की ये एक हसरत थी कि बस पूरी हुई आँसुओं में भीग जाने की हवस पूरी हुई आ रही है जिस्म की दीवार गिरने की सदा इक अजब ख़्वाहिश थी जो अब के बरस पूरी हुई इस ख़िज़ाँ-आसार लम्हे की हिकायत है यही इक गुल-ना-आफ़्रीदा की हवस पूरी हुई […]

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