• करीब 60 हजार बच्चे केवल तमिलनाडु के देखभाल घरों में 
  • देखभाल घरों में रहने वाले कुल 2,56,369 बच्चों में से तमिलनाडु में रहने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक 59,548 है
  • सबसे कम संख्या अरुणाचल प्रदेश में महज 90 है

नई दिल्ली| राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपने ताजा आंकड़ों में खुलासा किया है कि देश के देखभाल घरों (चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस) में ढाई लाख से ज्यादा बच्चे रह रहे हैं। इनमें से सबसे ज्यादा करीब 60 हजार बच्चे केवल तमिलनाडु के देखभाल घरों में हैं। देखभाल घरों में रहने वाले कुल 2,56,369 बच्चों में से तमिलनाडु में रहने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक 59,548 है जबकि सबसे कम संख्या अरुणाचल प्रदेश में महज 90 है।

दूसरे नंबर पर कर्नाटक में 38,659 और उसके बाद आंध्रप्रदेश और केरल हैं। राष्ट्रीय राजधानी में इनकी संख्या 3,753 है। सीसीआई में रहने वाले 1 हजार से कम संख्या वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (513), चंडीगढ़ (300), मिजोरम (932), सिक्किम (494) और त्रिपुरा (776) हैं।

इस सप्ताह के शुरू में बाल अधिकार संस्था ने तमिलनाडु समेत 8 राज्यों को एक पत्र जारी कर बच्चों की उनके परिवारों में वापसी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि पारिवारिक माहौल में बड़े होना हर बच्चे का अधिकार है।

जिला अधिकारियों को संबोधित करते हुए इस पत्र में लिखा गया, “आपके कार्यालय से अनुरोध है कि वे देखभाल घरों में रह रहे बच्चों के तत्काल प्रत्यावर्तन के लिए काम करें।” इन 8 राज्यों में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मिजोरम, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और मेघालय शामिल हैं, जिनके देखभाल घरों में कुल 1.84 लाख बच्चे हैं।

एनसीपीसीआर द्वारा जिला मजिस्ट्रेटों को यह सिफारिश भी की गई थी कि गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कोविड-19 का प्रसार रोकने के लिए समय-समय पर जारी किए गए दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए इन बच्चों का प्रत्यावर्तन और पुनस्र्थापन किया जाए।

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