Annapurna chalisa : श्री अन्नपूर्णा चालीसा ॥ दोहा ॥विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय ।अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय । ॥ चौपाई ॥नित्य आनंद करिणी माता, वर अरु अभय भाव प्रख्याता ।जय ! सौंदर्य सिंधु जग जननी, अखिल पाप हर भव-भय-हरनी । श्वेत बदन पर श्वेत बसन पुनि, […]

शनिदेव (Shavi Dev) को न्याय का देवता कहा जाता है। सूर्यपुत्र शनिदेव सभी मनुष्यों के अच्छे और बुरे कर्मों के फलों को प्रदान करने वाले हैं। सभी देवों में शनि देव (Shani dev) को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। शनि देव की महिमा (Shani Dev Mahima) ऐसी है कि वे पल […]

भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार भगवान हनुमान जी ऐसे देवता है जो कलियुग में भी धरती पर विराजमान हैं। श्रीराम भक्त हनुमान जी को माता सीता ने अमरता का वरदान दिया था। कलियुग में हनुमान अकेले ऐसे देव हैं जिनकी पूजा अर्चना से वे बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं […]

Shiv chalisa in hindi : शिव चालीसा के निरंतर पाठ से कोई भी मनुष्य महादेव की कृपा प्राप्त कर अपने सारे कष्टों से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं। शिव पुराण में बताया गया है कि शिव और शक्ति का एक रूप ही परमात्मा है। ऐसे ही परमपिता महादेव और पार्वती […]

।।दोहा।। विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय । कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥ ।।चौपाई।। नमो विष्णु भगवान खरारी,कष्ट नशावन अखिल बिहारी । प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी,त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥1॥ सुन्दर रूप मनोहर सूरत,सरल स्वभाव मोहनी मूरत । तन पर पीताम्बर अति सोहत,बैजन्ती माला मन मोहत […]

।। श्री नवग्रह चालीसा ।। चौपाई श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय।। जय जय रवि शशि सोम बुध जय गुरु भृगु शनि राज। जयति राहु अरु केतु ग्रह करहुं अनुग्रह आज।। ।। श्री सूर्य स्तुति ।। प्रथमहि रवि कहं नावौं माथा, करहुं कृपा […]

।। दोहा ।। जय ब्रह्मा जय स्वयम्भू, चतुरानन सुखमूल। करहु कृपा निज दास पै, रहहु सदा अनुकूल।। तुम सृजक ब्रह्माण्ड के, अज विधि घाता नाम। विश्वविधाता कीजिये, जन पै कृपा ललाम।। ।। चौपाई ।। जय जय कमलासान जगमूला, रहहू सदा जनपै अनुकूला। रुप चतुर्भुज परम सुहावन, तुम्हें अहैं चतुर्दिक आनन। […]

।। दोहा ।। गुरू पद पंकज ध्यान धर, सुमिर सच्चिदानन्द। श्याम चौरासी भणत हूं, रच चौपाई छन्द ।। ।। चौपाई ।। महर करो जन के सुखरामी। सांवलशाह खाटू के वासी।। प्रथम शीश चरणन में नाऊँ। कृपा दृष्टि रावरी चाहूँ।। माफ सभी अपराध कराऊँ। आदि कथा सुछन्द रच गाऊँ।। भक्त सुजन […]

॥दोहा॥ हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥ जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम। प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम॥ ॥चालीसा॥ भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी। गायत्री नित कलिमल दहनी॥१॥ अक्षर चौबिस परम पुनीता। इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता॥२॥ शाश्वत सतोगुणी सतरुपा। […]

॥दोहा॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम॥ पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज। जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥ जय यदुनंदन जय जगवंदन।जय वसुदेव देवकी नन्दन॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥ जय नटनागर, नाग […]

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