• चमोली में ग्लेशियर की तबाही का मंजर अभी कोई भूल नहीं पाया है
  • तपोवन की सुरंग से मलवा हटाकर लोगों से संपर्क साधने का प्रयास जारी है
  • चमोली त्रासदी में बुधारी देवी के बेटों संदीप और जीवन का शव नहीं मिल पाया है

देहरादून, 16 फरवरी (एजेंसी)। उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर की तबाही का मंजर अभी कोई भूल नहीं पाया है। रेस्क्यू टीम अभी भी लापता लोगों को तलाशने में जुटी हुई है। तपोवन की सुरंग से मलवा हटाकर लोगों से संपर्क साधने का प्रयास जारी है। तो वहीं दूसरी तरफ परिजन अपनों की आश में बैठे हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक चमोली त्रासदी को देखने के बाद बुधारी देवी को यह उम्मीद नहीं है कि उसके बेटे बच पाए होंगे लेकिन फिर भी वह अपने बेटों को आखिरी बार देखना चाहती हैं। बता दें कि चमोली त्रासदी के सप्ताहभर बाद भी बुधारी देवी के बेटों संदीप और जीवन का शव नहीं मिल पाया है। जिसके बाद हरिपुर गांव में रविवार को यमुना किनारे इन दोनों के पुतले बनाकर अंतिम संस्कार किया गया।

एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के मुताबिक संदीप और जीवन के बड़े भाई गुड्डू ने बताया कि एक सप्ताह तक हम लोगों ने इंतजार किया है और फिर उम्मीद छोड़ दी। वे लोग बांध के ठीक सामने काम कर रहे थे। हम यह जानते हैं कि वो नहीं बच सकते थे। बस हमे यही उम्मीद थी कि उनका पार्थिव शरीर हमे मिल जाता लेकिन यह भी नहीं हुआ और हमारे पास ज्यादा समय नहीं था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जौनसारी समुदाय में यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और उसका शव नहीं मिले तो 14 दिनों के भीतर उसके पुतले का अंतिम संस्कार करना पड़ता है। मृतक भाईयों के चाचा और गांव के प्रधान बलबीर चौहान ने बताया कि हमने उन पुतलों को दोनों के कपड़े पहनाए और उनका अंतिम संस्कार ठीक वैसा ही किया जैसे किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक 21 वर्षीय जीवन दो महीने पहले तपोवन के लिए निकल गया था। उसने सुना था कि हाइडल प्रोजेक्ट में काम मिल सकता है और पैसा भी ठीक ठाक मिलेगा। उसने अपने 24 वर्षीय भाई संदीप को भी यही कहा था।

जिसके बाद 8 जनवरी को संदीप भी उसके पास पहुंच गया। जबकि 16 मई को उसकी शादी होनी थी। गुड्डू ने बताया कि मेरी 6 फरवरी को उन लोगों से फोन पर बातचीत हुई थी। वे लोग खुश थे। रिपोर्ट के मुताबिक जब चमोली त्रासदी की खबर सामने आई तो गुड्डू तपोवन के लिए रवाना हो गया था। लेकिन कुछ नहीं मिलने पर वापस लौट आया। रविवार को गुड्डू घर लौटा और पुतले तैयार किए ताकि अपने भाईयों का विधिवत अंतिम संस्कार कर सके।

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