नई दिल्ली, 13 जनवरी (एजेंसी)। राजधानी दिल्ली के पांच इलाकों की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। बुधवार के दिन यहां का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 अंक के पार हो गया। केंद्र द्वारा संचालित संस्था सफर के मुताबिक अगले तीन-चार दिनों के बीच प्रदूषण का स्तर बना रहेगा। दिल्ली के लोगों को लगातार ही खराब हवा में सांस लेना पड़ रहा है। बुधवार के दिन इसमें तेजी से इजाफा दर्ज किया गया।

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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने दिल्ली सरकार पर हमला बोलते कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल दिल्लीवासियों को पिछले 4 वर्षों में एनवायरमेंट सेस के 883 करोड़ रुपए के खर्च का हिसाब दें। आखिर यह रकम दिल्ली में प्रदूषण को रोकने के लिए कहां और कैसे खर्च की गई? उन्होंने कहा कि क्या मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनके मंत्री इन दिनों दूसरे राज्यों के भ्रमण और वहां की सरकारों को चुनौती देने में इतने मशगूल हैं कि उन्हें दिल्लीवासियों को प्रदूषण से हो रही समस्याओं की खबर तक नहीं है?

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प्रदूषण के कारण दिल्लीवासियों के स्वास्थ पर हो रहे बुरे प्रभाव पर प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि केजरीवाल सरकार की बदइंतजामी का आलम यह है कि आज दिल्ली में जल और वायु दोनों ही प्रदुषित हैं जिसके कारण लोग जहरीली हवा में सांस लेने और जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय केजरीवाल ने दिल्लीवासियों से वादा किया था कि यमुना नदी को लंदन की थेम्स नदी जैसा बनाएंगे, आसपास पिकनिक स्पॉट जैसा वातावरण होगा, पानी अमोनिया मुक्त होगा, लेकिन पिछले 6 वर्षों में जमीनी स्तर पर वादों को पूरा करने की बजाय केजरीवाल ने दिखावे के लिए भरपूर प्रचार किया, जिसका खामियाजा आज दिल्लीवासी भुगत रहे हैं।

दिल्ली जल बोर्ड ने पिछले 6 वर्षों में यमुना में कूड़े-कचरे के निस्तारण को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। हालात ये हैं कि यमुना नदी में अमोनिया का स्तर बढ़ने से घरों में जहरीला पानी सप्लाई हो रहा है जिसके कारण लंग्स, लिवर, ह्रदय से संबंधित जानलेवा बीमारियां होने का खतरा बढ़ गया है। वायु प्रदूषण के कारण लोग सांस संबंधित बीमारियों के ग्रसित हो रहे हैं, लेकिन इसकी चिंता छोड़ कर मुख्यमंत्री केजरीवाल चुनावी प्रचार में व्यस्त हैं।

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आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने एनवायरमेंट सेस के 883 करोड़ रुपए का सिर्फ 1.6 प्रतिशत ही खर्च किया है और बाकी के पैसे कहां खर्च किए इसका कोई हिसाब नहीं है। दिल्ली में प्रदूषण के कारण 2020 की पहली छमाही में ही लगभग 24000 मौतें हुई हैं, इसके बावजूद प्रदूषण से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार की तैयारियां शून्य है। वास्तव में दिल्लीवासियों की गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसों को केजरीवाल अपने मंत्रियों और विधायकों के दूसरे राज्यों के भ्रमण पर खर्च कर रहे हैं।

दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़े तो केजरीवाल सरकार पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहराती है, जल प्रदूषण बढ़े तो भी पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहराती है, और अपनी जिम्मेदारियों से भागती है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि केजरीवाल सरकार को सत्ता में लाने की कीमत दिल्लीवासी जहरीले हवा में सांस लेकर और जहरीला पानी पीकर चुका रहे हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल को सत्ता के अहंकार से बाहर निकलकर देखने की जरूरत है कि उन्होंने दिल्ली को क्या से क्या बना दिया।

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