• सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए पंचामृत पूजन प्रतिबंध लगाया

  • ज्योतिर्लिंग को घिसने और रगड़ने पर प्रतिबंध लगा

  • एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों को अमल में लाया जाए

उज्जैन 1 सितम्बर (एजेंसी) महाकालेश्वर मंदिर में शिवलिंग के क्षरण (नुकसान) के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए पंचामृत पूजन के साथ साथ ज्योतिर्लिंग को घिसने और रगड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही साथ महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को आदेश देते हुए मंदिर समिति को क्षरण (रिसना) रोकने के उपायों को तत्काल लागू करने की बात कहीं है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में कोर्ट ने कहा कि एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों को अमल में लाया जाए। बता दे कि इस कमेटी ने ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए मंदिर समिति को सुझाव दिए थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में उज्जैन की सारिका गुरु नामक एक महिला ने महाकाल मंदिर में शिवलिंग क्षरण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, हालाँकि बाद में यह केस सुप्रीम कोर्ट चला गया और तब से ही इस मामले में लगातार सुनवाई चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि अब आम श्रद्धालु पंचामृत अभिषेक नहीं करा पाएंगे, शासकीय पूजन में ही पंचामृत पूजन हो सकेगा, श्रद्धालु केवल दूध और जल ही चढ़ा पाएंगे और श्रद्धालु को शिवलिंग पर घिसना और रगड़ना भी प्रतिबंधित होगा।

बता दे कि पंचामृत पूजन में दूध, दही, घी, शक्कर और फलों का रस मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है तथा इसके बाद पंचामृत को शिवलिंग पर रगड़ कर पूजन अभिषेक किया जाता है। इतना ही नहीं कई बार श्रद्धालु दर्शन के दौरान दूध और जल चढ़ाते वक्त शिवलिंग पर हाथ रगड़ते हैं। इससे पहले भी क्षरण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए महाकाल मंदिर समिति ने कई उपाय किए थे।

ज्ञात हो कि विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां श्रद्धालु मंदिर के गर्भ गृह तक जाकर शिवलिंग को छूकर दर्शन करते हैं और भगवान से आशीर्वाद लेते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नए नियमों को पालन मंदिर समिति को कराना होगा, जिससे शिवलिंग का क्षरण होने से रोका जा सके।

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