यूं तो पूरे भारत में ही भगवान शिव के मंदिर मौजूद हैं और विशेष महत्व भी रखते हैं | पर क्या आपको पता है भारत में एक ऐसी जगह भी है जहाँ भगवान शिव सदैव जलमग्न रहते हैं। ज्यादा जोर न दे, हम ही आपको बताते हैं कि ऐसी कौन-सी जगह है, जहाँ भगवान शिव जलमग्न हैं |

इंदौर, मध्य प्रदेश से 65 किमी की दूरी पर देवास के चापड़ा में चंद्रकेश्वर मंदिर स्थित है, जो कि इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी हुयी जगह है | चूँकि यह जगह चारो तरफ से सतपुड़ा की पहाड़ियों व जंगलो से घिरी हुयी है अत: यहाँ का वातावरण यहाँ आने वालों के दिल को लुभा जाता है | साल भर यहाँ आने वाले भक्तो का ताँता लगा रहता है |

पौराणिक कथाओ के अनुसार चंद्रकेश्वर मंदिर की स्थापना च्यवन ऋषि ने की थी, ये वही ऋषि है जिन्होंने सर्वप्रथम च्यवनप्राश बनाया था | कहा जाता है कि यहाँ माता नर्मदा ने च्यवन ऋषि को दर्शन दिए थे। पूरे विश्व में इस प्रकार के तीन ही मंदिर थे, जिनमें अब सिर्फ यही सही स्थिति में है। इस मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि यहाँ भक्तों को पानी के अंदर उतर कर ही शिव आराधना करनी होती है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को करीब तीन हजार साल पुराना बताया जाता है।

[wp_ad_camp_2]

 

chandrakeswar-mandir-jaha-paani-mai-samaye-rahate-hai-bhagwaan-shiv9%e0%a5%83

मंदिर के पुजारी बताते है कि इस मंदिर का सम्बन्ध च्यवन ऋषि से है, जब च्यवन ऋषि ने इसी जगह पर तपस्या करने हेतु इस मंदिर को स्थापित किया तो नर्मदा नदी कोई 60 किमी दूर थी अत: ऋषिवर को नहाने के लिए रोज़ इतना लम्बा सफ़र तय करना पड़ता था, परन्तु वो रोज़ नर्मदा नदी के तट जरूर जाते थे | ऋषिवर की इस लगन को देखकर माँ नर्मदा बेहद प्रसन्न हुई और ऋषि को दर्शन देते हुए कहा कि मैं स्वयं ही यहाँ आपके मंदिर में आ रही हूं। ऋषिवर को शंका थी कि मैं कैसे पहचानूँगा की यही नर्मदा माँ है अत: अगली सुबह जब वो नर्मदा के तट पर गए तो जानबुझ कर अपना गमछा वहीं नर्मदा में छोड़ आये | कहते है कि मंदिर में अगले ही दिन जलधारा फूट पड़ी तथा ऋषिवर का गमछा भगवान शिव पर लिपटा हुआ था ।

इतनी ही नहीं च्यवन ऋषि के बाद भी कई ऋषियों ने यहाँ तप किया था, जिनमें सप्त ऋषि प्रमुख थे । चूँकि सप्त ऋषियों ने भी यहाँ पर तप किया था अत: यहाँ पर उनके नाम का भी एक कुंड मौजूद है, जिसमे स्नान करने से इन्सान को सभी पापों से मुक्ति प्राप्त होती है |

सावन मास भगवान शिव का प्रिय मास है और इस माह में शिव आराधना का विशेष महत्व होता है | चूँकि यहाँ भी शिव मंदिर स्थित है अत: सावन मास में यहाँ शिव जी का रुद्राभिषेक किया जाता है और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में सावन मास में इजाफा देखने को मिलता है । यहाँ विशेषकर श्रद्धालु सावन मास के सोमवार में आते है और नर्मदा कुंड में स्नान कर जल मग्न शिवलिंग के दर्शन प्राप्त करते हैं।

सिर्फ मंदिर ही नहीं इसके आस पास बहुत सारे दर्शनीय व ऐतिहासिक स्थल हैं तथा इस मंदिर के समीप ही एक प्रतिहार कालीन प्रतिमा है, जिसे एक पत्थर पर उकेरा गया है, जो एक दुर्लभ प्रतिमा है | प्रतिहार ही नहीं परमार कालीन अद्भुत प्रस्तरशिल्प यहाँ मौजूद है । इसके अतिरिक्त यहाँ सैकड़ों वर्ष पुरानी गुफाये और सदियों पुराने किलो के अवशेष मौजूद हैं तो श्रीविष्णु गोशाला श्रीराम मंदिर, अंबे माता मंदिर और हनुमान मंदिर भी यहाँ मौजूद हैं।

[wp_ad_camp_2]

चंद्रकेश्वर महादेव मंदिर का वीडियो देखिए

 

ये उपाय करेंगे तो 2018 में हो जाएगी शादी

अगर कर्जे से मुक्त होना चाहते हैं तो करें ये उपाय

दस महाविद्याओं की साधना दिलाती है जीवन के हर क्षेत्र में सफलता

 

 

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें