Daridrya Dahan Shiv Stotra in hindi benefits in Sawan 2020 : शास्त्रों के अनुसार सांसारिक सुखों का आधार शिव (Bhagwan Shiv) ही हैं तथा शिव की उपासना से तन, मन व धन से जुडी कामनाओं में आने वाली बाधाओं दूर हो जाती है अत: स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति   के लिए सावन के महीने (Sawan Month) में दारिद्रय दहन स्तोत्र  (Daridrya Dahan Shiv Stotra) का पाठ अवश्य करना चाहिए | शास्त्रों के अनुसार दरिद्रता एक अभिशाप है । खुलासा डॉट इन में पढ़िए दारिद्रय दहन स्त्रोत, जिसका जाप जीवन से हर प्रकार की कठिनाइयों को समाप्त कर देगा।

 

शास्त्रों में अनेक अनुष्ठान और स्तोत्र ऐसे बताये गए है जिनके नियमानुसार पाठ कराने से दरिद्रता दूर हो जाती है । श्रावण मास (Shravan Month) में भगवान शिव का अभिषेक करने व साथ में ‘दारिद्रय दहन स्तोत्र’ (Daridrya Dahan Stotra) का पाठ करने से मनुष्य को स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। श्रावण मास में सोलह सोमवार के व्रत  की भी बहुत महिमा बताई गई है।

श्रावण मास के दौरान सोमवार का व्रत (Somvar vrat) करने और नियमित रूप से दारिद्रय दहन स्तोत्र का पाठ किसी भी व्यक्ति के जीवन में आए सभी प्रकार के कष्टों को दूर कर उसे धन संपत्ति प्रदान करते हैं।

विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय
शशिशेखराय धारणाय कर्पूरकांति धवलाय जटाधराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय…।1।
गौरी प्रियाय रजनीश कलाधराय कालान्तकाय
भुजंगाधिप कंकणाय गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय…।2।
भक्ति प्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्गमभवसागर तारणाय
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय…।3।
चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय
भालेक्षणाय मणिकुंडल मण्डिताय
मंजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय….।4।
पंचाननाय फणिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय
अनन्त भूमि वरदाय तमोमयाय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय…।5।
भानुप्रियाय भवसागर तारणाय
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय…।6।
 रामप्रियाय रघुनाथ वर प्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय…।7।
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गति प्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय
मातंग चर्मवसनाय महेश्वराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नम: शिवाय…।8।

 

दारिद्रयदहन का अर्थ (Daridrya Dahan Shiv Stotra meaning in hindi)

दारिद्रयदहन स्तोत्र की रचना ऋषि वशिष्ठ द्वारा की गयी है। दारिद्रयदहन का अर्थ है दरिद्रता का नाश। दरिद्रता केवल भौतिक ही नहीं, मानसिक भी होती है। आज के कलिकाल में अधिकांश मनुष्य मानसिक दरिद्रता–जैसे नकारात्मक भावनाओं–काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद-अहंकार, स्वार्थ, ईर्ष्या-द्वेष, भय आदि से पीड़ित हैं। भगवान शिव की उपासना मनुष्य को भौतिक सुख-समृद्धि के साथ ज्ञान प्रदानकर मन से भी अमीर बना देती है अर्थात् स्वस्थ मन प्रदान करती है क्योंकि भगवान शिव के मस्तक पर चन्द्रमा है और चन्द्रमा मन का कारक है। अत: मनुष्य को प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा के बाद या जब भी समय मिले, दारिद्रदहन स्तोत्र का पाठ एक बार अवश्य करना चाहिए क्योंकि ‘स्वस्थ मन तो स्वस्थ तन।’ यही समस्त सुखों का आधार और दुखों के नाश का उपाय है।

ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित दारिद्रयदहन शिवस्तोत्र
विश्वेशराय नरकार्णवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय।
कर्पूरकान्ति धवलाय जटाधराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।१।।
भावार्थ–समस्त चराचर विश्व के स्वामीरूप विश्वेश्वर, नरकरूपी संसारसागर से उद्धार करने वाले, कानों से श्रवण करने में अमृत के समान नाम वाले, अपने भाल पर चन्द्रमा को आभूषणरूप में धारण करने वाले, कर्पूर की कान्ति के समान धवल वर्ण वाले, जटाधारी और दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।१।।

गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय
कालान्तकाय भुजगाधिप कंकणाय।
गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
द्रारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।२।।
भावार्थ–माता गौरी के अत्यन्त प्रिय, रजनीश्वर (चन्द्रमा) की कला को धारण करने वाले, काल के भी अन्तक (यम) रूप, नागराज को कंकणरूप में धारण करने वाले, अपने मस्तक पर गंगा को धारण करने वाले, गजराज का विमर्दन करने वाले और दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।२।।

भक्तिप्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्गभवसागर तारणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।३।।
भावार्थ–भक्तिप्रिय, संसाररूपी रोग एवं भय के विनाशक, संहार के समय उग्ररूपधारी, दुर्गम भवसागर से पार कराने वाले, ज्योति:स्वरूप, अपने गुण और नाम के अनुसार सुन्दर नृत्य करने वाले तथा दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।३।।

चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय
भालेक्षणाय मणिकुण्डल मण्डिताय।
मंजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।४।।
भावार्थ–व्याघ्रचर्मधारी, चिताभस्म को लगाने वाले, भालमें तीसरा नेत्र धारण करने वाले, मणियों के कुण्डल से सुशोभित, अपने चरणों में नूपुर धारण करने वाले जटाधारी और दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।४।।

पंचाननाय फणिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय।
आनन्दभूमि वरदाय तमोमयाय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।५।।
भावार्थ–पांच मुख वाले, नागराजरूपी आभूषणों से सुसज्जित, सुवर्ण के समान वस्त्र वाले अथवा सुवर्ण के समान किरणवाले, तीनों लोकों में पूजित, आनन्दभूमि (काशी) को वर प्रदान करने वाले, सृष्टि के संहार के लिए तमोगुणाविष्ट होने वाले तथा दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।५।।

भानुप्रियाय भवसागर तारणाय
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।६।।
भावार्थ–सूर्य को अत्यन्त प्रिय अथवा सूर्य के प्रेमी, भवसागर से उद्धार करने वाले, काल के लिए भी महाकालस्वरूप, कमलासन (ब्रह्मा) से सुपूजित, तीन नेत्रों को धारण करने वाले, शुभ लक्षणों से युक्त तथा दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।६।।

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रामप्रियाय रघुनाथ वरप्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय।
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।७।।
भावार्थ–मर्यादापुरुषोत्तम भगवान राम को अत्यन्त प्रिय अथवा राम से प्रेम करने वाले, रघुनाथजी को वर देने वाले, सर्पों के अतिप्रिय, भवसागररूपी नरक से तारने वाले, पुण्यवानों में अत्यन्त पुण्य वाले, समस्त देवताओं से सुपूजित तथा दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।७।।

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय।
मातंगचर्म वसनाय महेश्वराय
दारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।८।।
भावार्थ–मुक्तजनों के स्वामीरूप, चारों पुरुषार्थों के फल को देने वाले, प्रमथादिगणों के स्वामी, स्तुतिप्रिय, नन्दीवाहन, गजचर्म को वस्त्ररूप में धारण करने वाले, महेश्वर तथा दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।८।।

स्तोत्र पाठ का फल
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोग निवारणम्
सर्व सम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादि वर्धनम्।
त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्।
दारिद्रय दु:ख दहनाय नमः शिवाय।।९।।
भावार्थ–ऋषि वशिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र समस्त रोगों को दूर करने वाला, शीघ्र ही समस्त सम्पत्तियों को प्रदान करने वाला और पुत्र-पौत्रादि वंश-परम्परा को बढ़ाने वाला है। इस स्तोत्र का जो मनुष्य नित्य तीनों कालों में पाठ करता है, उसे निश्चय ही स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। दरिद्रतारूपी दु:ख के विनाशक भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।।९।।

।।इति श्रीवशिष्ठरचितं दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

 

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