Holi 2020: How to celebrate holi in banaras : शायद ही कोई ऐसा शख्श होगा जिसने कभी बरसाने की होली का नाम न सुना हो, पर क्या आपने कभी बनारस की होली (Holi)  के बारे में सुना है। अगर नहीं तो आज हम आपको होली के एक नए अंदाज़ से परिचित करवाते हैं। यहाँ होली (Holi 2020)  मनाने का मजा दुगना हो जाता है। खुलासा डॉट इन में पढ़िए बनारस की होली के बारे में।

जोगीरा सा रा रा रा रा …की हुंकार से गूंजता हुआ पूरा शहर और हुडदंग मचाती युवाओं की टोली, बनारस की गलियों को रंगों से सराबोर कर देती है। होली के भोजपुरी गीत (Bojpuri Song) और परम्परागत फगुआ बनारस की पहचान हैं। यहाँ के घाटों पर खेले जाने वाली अद्भुत और अनोखी होली को देखने के लिए पर्यटकों का सैलाब उमड़ पड़ता है । यहाँ की एक खासियत यह भी है कि यहाँ होली का त्यौहार सप्ताह भर तक चलता है ।

बनारस में एकादशी के दिन से होली का पहला पड़ाव शुरू होता है। माना जाता है कि बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती और पुत्र गणेश के साथ गौना करा कर इसी दिन से काशी लौटते हैं, जिसके चलते तीन लोकों के लोग उनके स्वागत में फूलों की वर्षा करते हैं। जिसे धरती पर काशी के लोग बाबा विश्वनाथ के साथ रंग-गुलाल खेलकर मनाते हैं।

इस होली का दूसरा पड़ाव है महाश्मशान में खेले जाने वाली होली (Holi 2020), जो कि दुनिया की सबसे अनूठी होली मानी जाती है। चूँकि भगवान शिव जब काशी लौटे तो उनके स्वागत में सभी लोकों के लोग यहाँ मौजूद होते है, जिसके चलते शिव के भूत-पिशाच, भक्त-गण और दृश्य-अदृश्य आत्माएं मौजूद नहीं रहती अत: भगवान शिव एकादशी के दूसरे दिन महाश्मशान में अपने भक्तों के साथ भस्म से होली खेलते हैं। आपको बता दें कि इस होली में इस्तेमाल होने वाली भस्म इंसान के शव जलने के बाद पैदा होने वाली राख होती है।

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हुडदंग और मस्ती के लिए जानी जाने वाली बनारस की होली (Banaras ki holi)  की एक और पहचान है और वो है – काशी के फगुआ में भांग। जी हां! कहा भी जाता है कि काशी के फगुआ में भांग के बिना फाग का रंग अधूरा ही रह जाता है । अत: खाने में विविध व्यजंनों के साथ साथ यहाँ भांग और ठंडई का होना अतिमहत्वपूर्ण होता है ।

यहाँ पर कई प्रकार की ठंडई बनाने का प्रचलन है, जिसमे कई प्रकार के ड्राई फूट्स को पीस कर मिलाया जाता है। इतना ही नहीं, होली के मजे को और बढ़ाने के लिए भांग के पकौड़े भी बनाये जाते हैं । बनारस में होली के बाद आने वाले मंगलवार को बुढ़वा मंगल मनाया जाता है, जिसे स्थानीय वृद्ध अंगारक पर्व के नाम से भी पुकारते हैं। इस दिन युवाओं में ही नहीं बल्कि बुजुर्ग लोगों में भी जोश व उत्साह देखने को मिलता  है। इस दिन बनारस में मेले का आयोजन किया जाता है ।

 

 

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