Rudraksha benefits & Importance in hindi :

रुद्राक्ष (Rudraksha) दो शब्दों के मिलने से बना है जिसमें पहला शब्द है रुद्र (Rudra) और दूसरा है अक्ष (aksh)। रुद्र का अर्थ होता है शिव और अक्ष का अर्थ है आंसू। यही वजह है कि माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान रुद्र के आंसुओं से हुई है। भगवान रुद्र की ये आंसूओं की बूंदे जिन्हें हम रुद्राक्ष (Rudraksha) कहते हैं समस्त जगत में अलौकिक शक्ति प्रवाहित करते हैं।

सनातन धर्म में रूद्राक्ष (Rudraksha) की बहुत मान्यता है, भगवान शिव (Shiva) से जुड़ा होने के कारण इसे सभी लोग बहुत पवित्र मानते हैं, माना जाता है कि रूद्राक्ष (Rudraksha) को धारण करने मात्र से व्यक्ति के जीवन से बहुत तरह के कष्ट विदा हो जाते हैं, गृहस्थ हो या सन्यासी शिव के ये अश्रू रूपी रूद्राक्ष सभी का कल्याण करते हैं।  रूद्राक्ष (Rudraksha) का दर्शन करना लाभकारी होता है परन्तु यदि आप दर्शन करने के बाद प्रतिदिन जल भी चढ़ाएं तो घर में सुख शांति बनी रहती है क्योंकि ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा आप पर बनी रहती है । महामृत्यंजय मंत्र  (Mahamrityunjay mantra) दिलाता है अकाल मौत के भय से छुटकारा।

रुद्राक्ष के पेड़ (Rudraksha Tree) दक्षिण एशिया में जावा, मलेशिया, ताइवान, भारत एवं नेपाल में मुख्य रूप से पाए जाते हैं। भारत में असम, अरूणाचल प्रदेश, देहरादून जैसी जगहों पर भी रुद्राक्ष के पेड़ (Rudraksha Tree) देखने को मिलते हैं। रुद्राक्ष के फल (Rudraksha fruit) से छिलका उतारकर उसके बीज को पानी में भिगोकर साफ किया जाता है। यही बीज रूद्राक्ष के रूप में माला (rudraksha mala) आदि में प्रयोग में लाया जाता है। सनातन धर्म में माना जाता है कि माता सती जब अपने पिता से रूष्ट होकर हवनकुंड में कूद गई और महादेव उनके जले हुए शरीर को लेकर तीनों लोकों में विलाप करते हुए विचरण कर रहे थे। शिव के विलाप के कारण जिस जिस स्थान पर शिव के अश्रू गिरे उन्हीं स्थानों पर रूद्राक्ष वृक्ष की उत्पत्ति हुई। सोलह सोमवार व्रत (Solah somvar vrat) करने से होती है सभी मुराद पूरी ।

मान्यता है कि ओंकारेश्वर मंदिर (Omkareshwar Mandir) और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ साथ रूद्राक्ष के वृक्ष (Rudraksha Tree) का दर्शन करने का बहुत महत्व है । माना जाता है कि रूद्राक्ष (Rudraksha) की उत्पत्ति भगवान शंकर के आंसुओं से हुआ है यही कारण है कि भगवान शिव की पूजा में रूद्राक्ष की माला का प्रयोग किया जाता है। रुद्राक्ष को भगवान शंकर का आशिर्वाद भी माना गया है | लोगों को ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा पाठ करने के साथ साथ ओंकारेश्वर के दरवाजे के पास लगे हुए रुद्राक्ष के पेड़ (Rudraksha Tree) कि पूजा जरूर करनी चाहिए  एवं भगवान शिव के चालीसा (Shiva Chalisa) और भगवान शिव की आरती (Shiv aarti) का पाठ करना चाहिए।

रूद्राक्ष (Rudraksha) एक फल का बीज है। रूद्राक्ष (Rudraksha) के पहनने या अपने पास रखने से लोगों के अंदर पॉजीटिव एनर्जी (Positive energy) आती है, अत: शिवभक्तों के लिए इसका पूजन करना लाभकारी होता है। रुद्राक्ष  कई प्रकार के होते है और उनके फायदे भी अलग अलग होते है ।

  • एकमुखी रुद्राक्ष (Ekmukhi Rudraksha) को भगवान शंकर का प्रतीक माना जाता है तथा इसे धारण करने के बाद मनुष्य सभी प्रकार के भौतिक सुख व शांति को प्राप्त करता है।
  • दो मुखी रुद्राक्ष (Do mukhi Rudraksha) शिवपार्वती का प्रतीक होता है तथा इसे धारण करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा जीवन में सुख समृद्धि और शरीर को कांति बढती है।
  • तीनमुखी रुद्राक्ष (Teen mukhi rudraksha) अग्नि का प्रतीक होता है तथा इसे पास रखने से  सुख शांति ऐशोआराम कि प्राप्ति होती है ।
  • चारमुखी रुद्राक्ष (Chaarmukhi Rudraksha) पन्चदेव का सूचक होता है तथा यह धन, धर्म, काम और मोक्ष देता है।
  • पांच मुखी रुद्राक्ष (Panchmukhi rudraksha) सभी देवी देवता का सूचक है तथा यह सुख देने वाला होता है।
  • छह मुखी रुद्राक्ष  (Chah mukhi rudraksha) प्रभु कार्तिकेय का प्रतीक होता है और यह सभी पापो से छुटकारा व पुत्र देने वाला होता है।
  • सात मुखी रुद्राक्ष (Saat mukhi rudraksha) भगवान अनन्त का प्रतीक है और इसको धारण करने से गरीबी दूर होती है।
  • आठ मुखी रुद्राक्ष (aath mukhi rudraksha ) गणपति जी का सूचक है तथा ये लम्बी उम्र की प्राप्ति के लिए धारण किया जाता है ।
  • नव मुखी रुद्राक्ष (Nau mukhi rudraksha) मां शक्ति स्वरूपा का प्रतीक है तथा इसके समीप होने से मृत्यु के भय से छुटकारा मिलता है।
  • दस मुखी (Dus mukhi rudraksh) रुद्राक्ष भगवान विष्णु का सूचक है तथा ये सुन्दरता प्रदान करता है।
  • ग्यारह मुखी रुद्राक्ष (Gyarah mukhi rudraksh) को धारण करने से हर जगह सफलता मिलती है ।
  • बारह मुखी रुद्राक्ष (Barah mukhi rudraksha) से घर में लक्ष्मी व तेरह मुखी रुद्राक्ष जो कि इंद्र देव का प्रतीक होता है तथा ये शुभ व लाभ देने वाला होता है।
  • चौदह मुखी रुद्राक्ष (14 mukhi rudraksha) बजरंग बली का सूचक है और ये सभी पापों से मुक्ति दिलाता है।

 

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