Rahu in Twelvth House in Hindi वैदिक ज्योतिष में कुंडली के बारहवें भाव को व्यय भाव भी कहा जाता है। इस भाव से जातक पर होने वाले कर्जे, नुकसान, परदेश गमन, सन्यास, अनैतिक आचरण, व्यसन गुप्त शत्रु, आत्महत्या, जेल यात्रा और मुकदमेबाजी का भी विचार किया जाता है। कुंडली के […]

Rahu in Eleventh House in Hindi वैदिक ज्योतिष में कुंडली के एकादश भाव को लाभ कहा जाता है। इस भाव से जातक को जीवन में प्राप्त होने वाली धन संपदा, लाभ, आय उसके मित्र, बहू, जंवाई, भेट उपहार और विभिन्न तरीकों से होने वाली आय के बारे में पता चलता […]

Rahu in Tenth House in Hindi वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली के दशम स्थान को कर्मस्थान कहा जाता है। इस भाव से जातक को मिलने वाले पितृसुख, नौकरी व्यवसाय, शासन से लाभ, घुटनों के दर्द, सासु मां और जातक की मान सम्मान का पता चलता है। वैदिक ज्योतिष में माना जाता […]

वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली के नवम भाव को भाग्यस्थान भी कहा जाता है, इस भाव से जातक की आध्यात्मिक प्रगति, भाग्योदय, जातक की बुद्धिमत्ता, गुरू व परदेश गमन को देखा जाता है। कुंडली का नवम भाव पुस्तक लेखन, तीर्थ यात्रा, भाई की पत्नी और जातक के दूसरे विवाह के बारे […]

Rahu in Eighth House in Hindi वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली के अष्टम भाव को मृत्यु स्थान कहा जाता है। इस भाव से जातक के आयु निर्धारण, जातक को प्राप्त होने वाले दुख, उसकी आर्थिक स्थिति, मानसिक क्लेश, जननांगों के विकार और जातक के जीवन में आने वाले अचानक संकटों का […]

वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली के सप्तम भाव को विवाह स्थान कहा जाता है। इस भाव से किसी जातक के वैवाहिक सुख, शैयया सुख, साझेदारी, जीवनसाथी का स्वभाव, व्यापार और विदेश में प्रवास के योग, कोर्ट कचहरी के मामले को देखा जाता है। जन्म कुंडली का सप्तम भाव किसी जातक को […]

Rahu in Sixth House in Hindi वैदिक ज्योतिष में कुंडली के छठे भाव को रोग स्थान या शत्रु स्थान भी कहा जाता है। कुंडली के इस भाव से किसी भी व्यक्ति के दुश्मनों, बिमारी, भय और तनाव का पता चलता है। कुंडली का छटा भाव गृह कलह, मुकदमें, मामा मौसी […]

Rahu in Fifth House in Hindi जन्मकुंडली के पांचवे भाव को संतान भाव भी कहा जाता है। इस भाव से बच्चों से मिलने वाले सुख, विद्या्, बुद्धि और उच्चशिक्षा, पाचन शक्ति और अचानक धन लाभ और नौकरी परिवर्तन का विचार किया जाता है। वैदिक ज्योतिष में माना जाता है कि […]

Rahu in Fourth House in Hindi वैदिक ज्योतिष में कुंडली के चौथे घर को मातृस्थान कहा जाता है। इस भाव से जातक को प्राप्त होने वाले मातृसुख, गृह सुख, वाहन का सुख, मित्र, पेट के रोग और मानसिक स्थिति का विचार किया जाता है। जन्मकुंडली के चौथे भाव में स्थित […]

Rahu in Third House in Hindi वैदिक ज्योतिष में जन्मकुंडली के तीसरे भाव को सहज भाव या पराक्रम भाव भी कहा जाता है। इस भाव से किसी भी जातक के छोटे भाई बन, नौकर चाकर, धैर्य, साहस, बल कंधे और हाथ आदि का विचार किया जाता है। कुंडली के तीसरे […]