Rahu in Fifth House in Hindi : जन्मकुंडली के पांचवे भाव को संतान भाव भी कहा जाता है। इस भाव से बच्चों से मिलने वाले सुख, विद्या्, बुद्धि और उच्चशिक्षा, पाचन शक्ति और अचानक धन लाभ और नौकरी परिवर्तन का विचार किया जाता है। खुलासा डॉट इन में आपको बताते हैं राहु देव यदि किसी जातक की कुंडली के पांचवे भाव में हो तो क्या होता है।

वैदिक ज्योतिष में माना जाता है कि कुंडली के पांचवे भाव में स्थित राहु जातक को तीक्ष्ण बुद्धि प्रदान करता है। ऐसे जातकों को विभिन्न प्रकार के शास्त्रों का ज्ञान होता है। ऐसे जातक स्वभव से कर्मठ और दयालु होतें हैं। पांचवे भाव में राहु होने पर जातक भाग्यशाली होता है। ये अलग बात है कि जातक को पहली संतान के रूप में कन्या की ही प्राप्ति होती  हैँ आप कई प्रकार के व्यवसाय कर अपनी जीवका चलाने में कामयाब हो सकते हैं। ऐसे जातकों को पुत्र प्राप्ति में कई प्रकार के व्यवधान आ सकते हैं।

पांचवे भाव में स्थित राहु व्यक्ति को रचनात्मकता प्रदान करता है। ऐसे जातक लेखन कला में प्रवीण होते हैं ओर जातक को जीवन काल में खूब मानसम्मान और यश की प्राप्ित होती है।

कुंडली के पंचम भाव में स्थित राहु के कुछ दुष्पिरणाम भी बताए जाते हैं। अशुभता की स्थिति में यहा स्थति राहु व्यक्ति को मतिभ्रम का शिकार बना देता है। जातक को संतान को लेकर किसी न किसी प्रकार का कष्ट बना रहता है। यहां स्थित राहु जातक का धन बेकार के कामों में खर्च कराता रहता है जब तक कि जातक पूर्ण रूप से निर्धन हो जाए। पंचम में भाव राहु जातक को काला रंग प्रदान करते हैं, अधिकतर देखा गया है कि ऐसे जातकों का रंग काला ही होता है।

पंचम भाव में स्थित राहु जातक को गलत मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे जातकों को मन पढ़ाई लिखाई में कम ही रहता है। ऐसे लोगों को पेट संबंधी किसी न किसी प्रकार की परेशानी लगी रहती है। पेट में शूल, गैस और मंदाग्नि रोग की संभावना अधिक होती है। अत्याधिक प्रयास के बाद ही धन की प्रापति होती है। जीवनसाथी से भी मनमुटाव की संभावना बनी रहती है।

राहु का अन्य भावों में फल

 

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