Rahu in Sixth House  in Birth chart in Hindi

वैदिक ज्योतिष में कुंडली के छठे भाव को रोग स्थान या शत्रु स्थान भी कहा जाता है। कुंडली के इस भाव से किसी भी व्यक्ति के दुश्मनों, बिमारी, भय और तनाव का पता चलता है। कुंडली का छटा भाव गृह कलह, मुकदमें, मामा मौसी का सुख, घर में नौकर चाकरों की उपलब्धता और जननांगों के रोग के बारे में भी बताता है। खुलासा डॉट इन में जानिए राहु के छटे भाव में होने के प्रभाव।

जन्मकुंडली के छठे भाव में स्थित राहु जातक के अनिष्टों का निवारण करता है। माना जाता है कि यदि किसी जातक की कुंडली के छटे भाव में राहु देव विराजमान हो तो उसके जीवन के कष्ट अपने आप समाप्त हो जाते हैं। ऐसे जातकों का हृदय उदार होता है और वे हर कार्य बड़ी धैर्यपूर्वक करते हैं। छटे भाव में राहु जातक को बहुत साहसिक बनाता है और वह अपने जीवन में बड़े बड़े कामों को आसानी से कर लेते हैं। ऐसे जातक शारीरिक रूप से निरोगी और दीर्घायु होते हैं।

कुंडली के छटे भाव में राहु विराजमान हो तो जातक अपने सभी प्रकार के शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है और उसकी प्रतिष्ठा किसी राजा की तरह होती है। ऐसे जातकों पर सरकार या सरकारी अधिकारियों की कृपा बनी रहती है। अन्य धर्मों के लोगों के द्वारा ऐसे जातकों को लाभ और धन की प्राप्ति होती है। छटे भाव में स्थित राहु जातक को एक अमीर व्यक्ति बनाता है।

कुंडली के षठ भाव में स्थित राहु जहां जातक को अनेक प्रकार के वाहनों का सुख देता है वहीं जातक को सुंदर वस्त्र और विभिन्न प्रकार के आभूषण भी प्रदान करवाता है। ऐसे जातकों को बहुत अच्छा जीवन साथी प्राप्त होता है जो जीवन के सभी अच्छे और बुरे समय में जातक का साथ देता है।

कुंडली के छठे भाव में राहु यदि खराब प्रभाव दे तो ऐसे जातकों की संगति खराब रहती है। उन्हें किसी न किसी प्रकार की ऊपरी बाधाएं सताती रहती हैं, कई बार जातक को कोई रहस्यमयी बीमारी हो सकती है जो काफी समय तक चिकित्सकों की समझ में भी नहीं आती। ऐसे जातकों की नौकरी में भी किसी न किसी प्रकार की बाधा बनी रहती है। मामा, मौसी या चाचा पक्ष से सुख में कमी ही बनी रहती है।

राहु का अन्य भावों में फल

 

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