द्वादश भाव में स्थित राहु का फल (Rahu in Twelvth House)

Rahu in Twelvth House in Hindi

Rahu in Twelvth House in Hindi

वैदिक ज्योतिष में कुंडली के बारहवें भाव को व्यय भाव भी कहा जाता है। इस भाव से जातक पर होने वाले कर्जे, नुकसान, परदेश गमन, सन्यास, अनैतिक आचरण, व्यसन गुप्त शत्रु, आत्महत्या, जेल यात्रा और मुकदमेबाजी का भी विचार किया जाता है।

कुंडली के बारहवें भाव में राहु विराजमान हो तो जातक पराक्रमी और यशस्वी होता है। ऐसे जातक अत्याधिक महत्वाकांक्षी और ऊंचे आदर्शों वाला होता है। बारहवें भाव में राहु जातक को परोपकारी और आध्यात्मिक बनाते हैं। ऐसे जातकों की रुचि वेदों और वेदांतों में होती है और जातक का स्वभाव साधु की तरह हो सकता है। राहु की यह स्थिति जातक को अत्याधिक मिलनसार और परोपकारी बनाती है। जातक अपने परिश्रम के बल से उन्नति के शिखर को प्राप्त करता है।


कुंडली के व्ययस्थान में विराजमान राहु जातक के शत्रुओं का नाश करते हैं और उसे विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से धन लाभ करवाते हैं। ऐसे जातक यदि एक ही स्थान पर टिक कर बैठें रहे तो उनकी सभी इच्छाओं की पूर्ति अपने आप होती रहेगी। कई बार राहु की यह स्थिति जातक को जन्मस्थान से दूर भी करवा देती है।

बारहवें भाव में विराजमान राहु जीवन के प्रारम्भिक समय में थोड़ी अस्थिरता देते हैं जिससे जातक को अपनी आजीविका के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। जन्मस्थान से दूर होने पर ऐसे जातकों का भाग्योदय हो जाता है और वह खूब कमाई करते हैं। राहु की यह स्थिति जातक को अत्याधिक खर्चीला भी बनाती है। ऐसे जातकों को चाहिए की वे छलकपट और विवेकहीनता से दूर रहे। किसी भी प्रकार नीचकर्म और पापपूर्ण कार्यों में लिप्त होने पर ऐसे जातकों को राहुदेव अस्पताल या जेल का मुख भी दिखला सकते हैं।

राहु का अन्य भावों में फल

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Title: rahu in twelvth house in hindi in Hindi  | In Category: ज्योतिष jyotish

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