Saturn Shani in Third house in birthchart in hindi: किसी भी जातक की जन्मपत्रिका (Birthchart) में तीसरा घर (third house) उसकी मेहनत, बाहुबल, जातक के पराक्रम को दर्शाता है। तीसरे भाव से ही जातक के उत्साह, स्फूर्ति और उसके प्रभावशाली होने के बारे में पता चलता है। वैदिक ज्योतिष (Vedic Jyotish) में इस भाव को बंधु भाव के नाम से भी जाना जाता है। कुंडली के तीसरे घर (third house of Birthchart) से पता चलता है कि जातक कैसे अपने फर्ज निभाएगा और वह दूसरों की सहायता करने में कैसा रहेगा। जीवन में आने वाले उतार चढ़ावों के बारे में भी इसी घर से पता चलता है। शरीर के अंगों में यह भाव जातक के कंधों तथा बाजुओं का प्रतिनिधत्व करता है। इस भाव में अशुभ ग्रह होने से व्यक्ति को कभी भी अपनी मेहनत का सही फल प्राप्त नहीं हो पाता। आइए जानते हैं खुलासा डॉट इन में जातक की कुंडली तीसरे घर में बैठै शनि (Third house birthchart) जातक को कैसा फल प्रदान करते हैं।

 

जन्म कुंडली के तीसरे घर में बैठे शनि का फल (Shani in third house in birthchart)

वैदिक ज्योतिष (Vedic Jyotish) में मान्यता है कि तीसरे घर में बैठे हुए शनि (Third house Shani) जातक को योगियों जैसा जीवन प्रदान करते हैं। ऐसा जातक हमेशा निरोगी रहता है और बहुत कम बात करने वाला होता है। शनि की यह स्थिति व्यक्ति को हर प्रकार के सुख जैसे उत्तम वाहन, अच्छा घर और साथ साथ समाज में अच्छी प्रतिष्ठा भी दिलाती है।

तीसरे भाव में बैठे हुए शनि (Third house Shani) व्यक्ति को बहुत भाग्यवान तो बनाते ही हैं साथ ही साथ उसमें कई तरह के गूढ़ शास्त्रों और विज्ञान को जानने की रुचि पैदा करते हैं। ऐसा जातक ज्योतिष, आध्यात्म या दर्शन में अच्छी स्थिति को प्राप्त हो सकता है। तीसरे घर के शनि (Shani in third house) के बारे में माना जाता है कि ऐसे जातकों का स्वभाव कुछ हद तक चंचल भी हो सकता है, लेकिन ऐसे जातकों को शत्रुहंता भी कहा गया है। ज्योतिष शास्त्र मानता है कि यदि किसी जातक के तीसरे भाव में शनि हो तो शत्रु खुद ही उससे हार मान लेते हैं।

जन्मकुंडली के तृ्तीय भाव में स्थित शनि का फल (Saturn in Third House) Shani (Saturn) Third House In Birthchart In Hindi

कुंडली के तीसरे भाव में स्थित शनि का फलजातक की कुंडली में तीसरे घर में बैठे शनि (Third house shani) जातक को अनेक प्रकार के मित्र प्रदान करते हैं, और ऐसे जातकों की विपरीत लिंग के लोगों में खासी लोकिप्रयता होती है। शनि की यह स्थिति जातक से उसके जीवन काल में खूब धन कमवाती है। जातक सभी तरह के भेदभाव को भूलाकर अपने सभी बंधुबाधवों और अन्य लोगों का पालन पोषण करता है।

कुंडली के तीसरे भाव में बैठै शनि (Shani in third house birthchart) यदि दुष्परिणाम देने लगे तो ऐसे में जातक के मन में हर समय अशांति बनी रहती है। उसकी शिक्षा रूक रूक कर पूरी होती है या कई बार किसी कारणवश पूरी ही नहीं हो पाती। ऐसे जातकों को वर्षा और शीत ऋतु में शरीर से जुड़ी कोई न कोई व्याधि परेशान करती रहती है।

 

कुंडली के अन्य भावों में शनि का फल देखें

जन्मकुंडली के प्रथम भाव में शनि का फल (shani in 1st house in kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में शनि का फल (Shani in 2nd house in Kundli(Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के चतुर्थ भाव में शनि का फल (Shani in 4th House in Kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के पंचम भाव में शनि का फल (Shani in 5th House in Kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के षष्ठ भाव में शनि का फल (Shani in 6th House in Kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के सप्तम भाव में शनि का फल (Shani in 7th House in Kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के अष्टम भाव में शनि का फल (Shani in 8th House in Kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के नवम भाव में शनि का फल (Shani in 9th House in Kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के दशम भाव में शनि का फल (Shani in 10th House in Kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के एकादश भाव में शनि का फल (Shani in 11th House in Kundli (Vedic Astrology))

जन्मकुंडली के द्वादश भाव में शनि का फल (Shani in 12th House in Kundli (Vedic Astrology))

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