Maha Mrityunjaya Mantra Purascharana in Hindi

श्रावण मास को वैसे ही भगवान भोले शंकर का महीना माना जाता है। इस माह मेें जहां एक ओर भोले के भक्त दूर दूर से कांवर लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं, वहीं शिवभक्त इस माह में रुद्राभिषेक (Rudrabhishek) और महामृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjay Mantra ) का जाप कराकर भी शिव की कृपा प्राप्त करते हैं। भगवान शंकर को क्यों प्रिय हैं श्रावण मास जानने के लिए पढ़ें श्रावण मास का महात्मय।

श्रावण मास (Shravan 2019) महामृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjay mantra) का पुरश्चरण सुख-समृद्धि, पद-प्रतिष्ठा, धन व आरोग्य प्रदान करता है इसीलिए श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण कराना श्रेयस्कर होता है। परन्तु मंत्र जप करना जितना सामान्य व सरल विधि है, मंत्र का पुरश्चरण उतना ही कठिन कार्य है।

जप, हवन, तर्पण, मार्जन व ब्राह्मण भोज पुरश्चरण के प्रमुख अंग है। महामृत्युंजय मंत्र ((Mahamrityunjay mantra)) में सवा लाख जाप से ही पुरश्चरण होता है और इनमे ॐ और नम: को छोड़कर जप संख्या निर्धारित मंत्र के अक्षरों की संख्या पर निर्भर होती है। जप संख्या निश्चित होने के बाद जप का दशांश हवन, हवन का दशांश तर्पण, तर्पण का दशांश मार्जन, मार्जन का दशांश ब्राह्मण भोज कराने के बाद ही पुरश्चरण पूर्ण होता है । श्रावण मास में प्रतिदिन शिवआरती (Shiv aarti) और शिवचालीसा (shiv chalisa) के पाठ से भी भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

महामृत्युञ्जय की तरह ही लघु मृत्युंजय मन्त्र होता है, दोनों में मात्र जप संख्या का अंतर है, जहाँ महा मृत्युंजय पुरश्चरण सवा लाख जप का होता है, वही लघु मृत्युंजय में 11 लाख जप होते  है। दोनों का फल समान है।

पुरश्चरण करते वक्त हवन में बोले गए हर मंत्र के अंत में ‘स्वाहा’ का उच्चारण जरुर करे तथा तर्पण करते समय मंत्र के अंत  में ‘तर्पयामी’ जरुर बोले व मार्जन करते समय मंत्र के अंत  में ‘मार्जयामि’ बोलना अतिआवश्यक होता है |

 

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