नवरात्रि 2019: माँ शारदा का एक ऐसा मंदिर जहाँ आज भी पहली पूजा करते हैं आल्हा

Navratri 2019: maihar mata sharda temple navrate special story

मध्य प्रदेश के सतना जिले का एक छोटा सा नगर मैहर, जहाँ हिन्दूओं का प्रसिद्ध तीर्थस्थल शारदा माँ का प्रसिद्ध मन्दिर है। कैमूर तथा विंध्य की पर्वत श्रेणियों से घिरा तमसा के तट पर त्रिकूट पर्वत की पर्वत मालाओं के मध्य 600 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर एक ऐतिहासिक मंदिर है तथा 108 शक्ति पीठों में से एक है। भगवान विष्णु के अवतार नृसिंह भगवान के नाम पर इस जगह को नरसिंह पीठ  के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में मां शारदा के बगल में आज से लगभग 1500 वर्ष पूर्व नरसिंहदेव जी की पाषाण मूर्ति प्रतिष्ठापित है। करीब 1,063 सीढ़ियां चढ़ने के बाद माता के दर्शन होते हैं। पूरे भारत में सतना का मैहर मंदिर माता शारदा का अकेला मंदिर है। नवरात्रों में दुर्गा चालीसा और अम्बे जी की आरती के पाठ से भक्तों की सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती हैं।  माना जाता है कि यहां पर  नवरात्रों में मां काली की आरती और काली चालीसा के पाठ से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।


सबसे पहली पूजा करते हैं आल्हा

मान्यता है कि मां ने आल्हा को उनकी भक्ति और वीरता से प्रसन्न होकर अमर होने का वरदान दिया था। लोगों की मानें तो आज भी रात 8 बजे मंदिर की आरती के बाद साफ-सफाई होती है और फिर मंदिर के सभी कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसके बावजूद जब सुबह मंदिर को पुन: खोला जाता है तो मंदिर में मां की आरती और पूजा किए जाने के सबूत मिलते हैं। आज भी यही मान्यता है कि माता शारदा के दर्शन हर दिन सबसे पहले आल्हा और ऊदल ही करते हैं।

आखिर कौन है आल्हा ?

आल्हा और ऊदल दो भाई थे। ये बुन्देलखण्ड के महोबा के वीर योद्धा और परमार के सामंत थे। इन दोनों भाइयों का युद्ध दिल्ली के तत्कालीन शासक पृथ्वीराज चौहान से हुआ था। पृथ्‍वीराज चौहान को युद्ध में हारना पड़ा था लेकिन इसके पश्चात आल्हा के मन में वैराग्य आ गया और उन्होंने संन्यास ले लिया था। कहते हैं कि इस युद्ध में उनका भाई वीरगति को प्राप्त हो गया था। मान्यता है कि मां के परम भक्त आल्हा को मां शारदा का आशीर्वाद प्राप्त था, लिहाजा पृथ्वीराज चौहान की सेना को पीछे हटना पड़ा था। मां के आदेशानुसार आल्हा ने अपनी साग (हथियार) शारदा मंदिर पर चढ़ाकर नोक टेढ़ी कर दी थी जिसे आज तक कोई सीधा नहीं कर पाया है। मंदिर परिसर में ही तमाम ऐतिहासिक महत्व के अवशेष अभी भी आल्हा व पृथ्वीराज चौहान की जंग की गवाही देते हैं। इन दोनों भाइयों ने ही सबसे पहले जंगलों के बीच शारदादेवी के इस मंदिर की खोज की थी। आल्हा ने यहां 12 वर्षों तक माता की तपस्या की थी। आल्हा माता को शारदा माई कहकर पुकारा करते थे इसीलिए प्रचलन में उनका नाम शारदा माई हो गया।

 

अन्य पौराणिक कथा

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार दक्ष प्रजापति की पुत्री शिव से विवाह करना चाहती थी। उनकी इच्छा राजा दक्ष को मंजूर नहीं थी। वे शिव को भूतों और अघोरियों का साथी मानते थे। फिर भी सती ने अपनी जिद पर भगवान शिव से विवाह कर लिया। एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया, उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन जान-बूझकर अपने जमाता भगवान शंकर को नहीं बुलाया। जिससे सती बहुत आहत हुई और उन्होंने अपने पिता दक्ष से इसका कारण पूछा तो दक्ष ने शिव को अपशब्द कहे। इस अपमान से क्रोधित होकर सती ने यज्ञ की वेदी में कूदकर अपनी जान दे दी।

जब इस बारे में भगवान शंकर को पता चला तो उनका तीसरा नेत्र खुल गया और उन्होंने यज्ञ कुंड से सती के मृत शरीर को निकालकर कंधे पर उठा लिया और गुस्से में तांडव करने लगे। ब्रह्मांड की भलाई के लिए भगवान विष्णु ने ही सती के शरीर को 52 भागों में विभाजित कर दिया। जहां भी सती के अंग गिरे वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ। अगले जन्म सती ने राजा हिमवान के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया और घोर तपस्या कर शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया। माना जाता है कि यहां माता सती का हार गिरा था, हालांकि सतना का मैहर मंदिर शक्ति पीठ नहीं है।

 

 

Read all Latest Post on धर्म कर्म dharm karam in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें
Title: maihar mata sharda temple navrate special story in Hindi  | In Category: धर्म कर्म dharm karam

Next Post

जानिए दुर्गा देवी के शस्रों का रहस्य (ज्ञान) !! Devi durga weapons meaning in hindi

Sun Apr 7 , 2019
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार देवताओं ने अपनी हुंकार से सभी दानवों को समाप्त कर देने वाली माँ दुर्गा से शस्त्रों को धारण करने का कारण पूछा तो वहां मौजूद कुछ देवताओं ने इसका कारण माँ दुर्गा का शस्त्रों से दानवों को शुद्ध करने तथा उनकों मुक्ति देने के […]
Maa-DurgaMaa-Durga

All Post


Leave a Reply

error: खुलासा डॉट इन khulasaa.in, वेबसाइट पर प्रकाशित सभी लेख कॉपीराइट के अधीन हैं। यदि कोई संस्था या व्यक्ति, इसमें प्रकाशित किसी भी अंश ,लेख व चित्र का प्रयोग,नकल, पुनर्प्रकाशन, खुलासा डॉट इन khulasaa.in के संचालक के अनुमति के बिना करता है , तो यह गैरकानूनी व कॉपीराइट का उल्ल्ंघन है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था करती हैं तो ऐसा करने वाला व्यक्ति या संस्था पर खुलासा डॉट इन कॉपी राइट एक्त के तहत वाद दायर कर सकती है जिसका सारे हर्जे खर्चे का उत्तरदायी भी नियम का उल्लघन करने वाला व्यक्ति होगा।