Pongal festival in hindi : खेती पर आधारित त्यौहार है पोंगल

Pongal festival in hindi : खेती पर आधारित त्यौहार है पोंगल

Pongal festival in hindi : पोंगल (Pongal) का त्योहौर (Festival) कृषि एवं फसल से संबधित देवताओं को समर्पित है। इस त्यहौर का नाम पोंगल (Pongal) इसलिए है क्योंकि इस दिन सूर्य देव को जो प्रसाद अर्पित किया जाता है वह पोगल कहलाता है। तमिल भाषा में पोंगल का एक अन्य अर्थ निकलता है अच्छी तरह उबालना। दोनों ही रूप में देखा जाए तो बात निकल कर यह आती है कि अच्छी तरह उबाल कर सूर्य देवता को प्रसाद भोग लगानापोंगल (Pongal) का महत्व इसलिए भी है क्योकि यह तमिल महीने की पहली तारीख को आरम्भ होता है। इस पर्व के महत्व का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यह चार दिनों तक चलता है। हर दिन के पोंगल का अलग अलग नाम होता है। यह 13 जनवरी से शुरू होता है। पंजाब और उत्तर भारत में इस दिन लोहड़ी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है।

भोगी पोंगल

पहली पोंगल को भोगी पोंगल कहते हैं जो देवराज इन्द्र का समर्पित हैं। इसे भोगी पोंगल इसलिए कहते हैं क्योंकि देवराज इन्द्र भोग विलास में मस्त रहने वाले देवता माने जाते हैं। इस दिन संध्या समय में लोग अपने अपने घर से पुराने वस्त्रा, कूड़े आदि लाकर एक जगह इकट्ठा करते हैं और उसे जलाते हैं। यह ईश्वर के प्रति सम्मान एवं बुराईयों के अंत की भावना को दर्शाता है। इस अग्नि के इर्द गिर्द युवा रात भर भोगी कोट्टम बजाते हैं जो भैस की सींग का बना एक प्रकार का ढ़ोल होता है।

सूर्य पोंगल

दूसरी पोंगल को सूर्य पोंगल कहते हैं. यह भगवान सूर्य को निवेदित होता है। इस दिन पोंगल नामक एक विशेष प्रकार की खीर बनाई जाती है जो मिट्टी के बर्तन में नये धन से तैयार चावल, मूंग दाल और गुड से बनती है। पोंगल तैयार होने के बाद सूर्य देव (Sun) की विशेष पूजा की जाती है और उन्हें प्रसाद रूप में यह पोंगल व गन्ना अर्पण किया जाता है और पफसल देने के लिए कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।


मट्टू पोंगल

तीसरे पोंगल को मट्टू पोगल कहा जाता है. तमिल मान्यताओं के अनुसार मट्टू भगवान शंकर का बैल है जिसे एक भूल के कारण भगवान शंकर ने पृथ्वी पर रहकर मानव के लिए अन्न पैदा करने के लिए कहा और तब से पृथ्वी पर रहकर कृषि कार्य में मानव की सहायता कर रहा है। इस दिन किसान अपने बैलों को स्नान कराते हैं। उनके सींगों में तेल लगाते हैं एवं अन्य प्रकार से बैलों को सजाते है। बैलों को सजाने के बाद उनकी पूजा की जाती है। बैल के साथ ही इस दिन गाय और बछड़ों की भी पूजा की जाती है। कही कहीं लोग इसे केनू पोंगल के नाम से भी जानते हैं जिसमें बहनें अपने भाईयों की खुशहाली के लिए पूजा करती है और भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं।

कन्या पोंगल

चार दिनों के इस त्यहौर के अंतिम दिन कन्या पोंगल मनाया जाता है जिसे तिरूवल्लूर के नाम से भी लोग पुकारते हैं. इस दिन घर को सजाया जाता है। आम के पलल्व और नारियल के पत्ते से दरवाजे पर तोरण बनाया जाता है। महिलाएं इस दिन घर के मुख्य द्वारा पर कोलम यानी रंगोली बनाती हैं। इस दिन पोंगल बहुत ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है, लोग नये वस्त्रा पहनते है और दूसरे के यहां पोंगल और मिठाई वयना के तर पर भेजते हैं। इस पोंगल के दिन ही बैलों की लड़ाई होती है जो काफी प्रसि( है। रात्रि के समय लोग सामुहिक भोज का आयोजन करते हैं और एक दूसरे को मंगलमय वर्ष की शुभकामना देते हैं।

 

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