Sawan Somwar 2019 : After 125 Years Durlabh Sanyog On Sawan Somvar Recite These Mantras  : श्रावण मास का माह इस वर्ष 17 जुलाई से शुरू हो चुका है और यह मास 15 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के शुभ दिन तक चलेगा। श्रावण मास शिव को अत्याधिक प्रिय है इसीलिए पुराणों में इस माह में शिवपूजन के विशेष लाभ बताए गए हैं। सनातन धर्म में मान्यता है कि जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु इस समय सो जाते हैं जिसके उपरान्त भगवान शिव ही इन दिनों में समस्त सृष्टि का पालन करते हैं। सनातन धर्म में इस माह को बहुत उत्तम और पुण्य मास माना जाता है। श्रावण मास में सोमवार के दिन का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान महादेव साक्षात शिवलिंग में निवास करते हैं और भक्तों के पूजन और प्रसाद को ग्रहण करते हैं। Shravan 2019: सावन में होंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार, देखें पूरे महीने की लिस्ट

125 साल बाद बना है ऐसा संयोग

इस वर्ष श्रावण माह में कई दिव्य और अनूठे योग बन रहे हैं जिसकी शुरुआत श्रावण मास के प्रथम सोमवार से हो रही है। श्रावण मास का प्रथम सोमवार जो 22 तारीख को है इस दिन कृष्ण पक्ष की पंचम तिथि है, जिसे भविष्य पुराण में नागपंचमी तिथि कहा गया है। श्रावण मास के सोमवार के दिन नागपंचमी तिथि का संयोग बहुत ही दिव्य माना गया है। सदियों में ऐसा संयोग बनता है जब श्रावण मास के सोमवार के दिन नागपंचमी तिथि भी हो। ज्योतिषयों की मान्यता है कि करीब 125 साल बाद सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ पड़ रही हैं। इस वर्ष दो सोमवारों को ऐसा संयोग बनेगा जब सोमवार और नागपंचमी साथ साथ होगी। सावन माह में शिव आरती (Shiv aarti) और शिव चालीसा (Shiva chalisa) के पाठ से होते हैं महादेव जल्द प्रसन्न।

इन राज्यों में मनाई जाएगी नाग पंचमी

प्रथम संयोग आज यानि 22 जुलाई का बना है जब सावन सोमवार के दिन बिहार, बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान आदि कई जगहों पर नागपंचमी का त्योहार और सावन सोमवार को साथ साथ मनाया जाएगा। इसी माह दूसरा संयोग पांच अगस्त को यानि श्रावण मास के तीसरे सोमवार को बनेगा क्योंकि इस दिन श्रावण मास की शुक्ल पंचमी तिथि है। इस दिन भी भारतवर्ष के कई हिस्सों में नागपंचमी का त्योहार मनाया जाएगा। इन दोनों ही तिथियों का उल्लेख भविष्य पुराणों में वर्णित है।

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इस दुर्लभ संयोग का ऐसे उठाएं लाभ

जिन भी जातकों की कुंडली में कालसर्प योग हो, या जीवन में उतार चढ़ाव बना रहता हो ऐसे लोगों को नागपंचमी और सोमवार के इस दिव्य संयोग को यूं ही व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। यदि ऐसे जातक जिनकी कुंडली में कालसर्प का योग है वे इस दिन तांबे या चांदी से बने नाग नागिन के जोड़े को शिवलिंग पर रखकर जलाभिषेक या दूध से अभिषेक करते हैं तो भोले बाबा उनके जीवन के सारे कष्ट हर लेते हैं।

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यह लोग भी करें पूजा

भविष्य पुराण में वर्णित है जिन लोगों के घरों में परिवार के किसी भी व्यक्ति की मौत सर्प के काटने से हुई हो उन्हें इन दिनों भगवान शिव के साथ नाग देवता की भी पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि जिन लोगों की मौत सर्पदंश से होती है वह मौत के बाद सर्पयोनि में जन्म लेते हैं और ऐसे लोगों की मुक्ति के लिए यह अत्यंत उत्तम काल बताया जाता है।

होती है हर इच्छा पूरी

जो भी व्यक्ति धन संपत्ति की इच्छा रखते हैं इस चमत्कारिक संयोग के दौरान उन्हें जल में शहद, दूध, मिसरी, दही और घी डालकर भगवान शिव का अभिषेक करें तो उन्हें लाभ मिल सकता है। नागपंचमी भी साथ साथ पड़ने के कारण यदि जातक नागदेवता को दूध, धान का लावा और दूर्वा भी चढ़ाए तो शीघ्र ही अतिशुभ फल की प्राप्ति होती है।

नाग देवता की पूजा करते समय नाग देवता के मंत्र का कम से कम 11 बार जप जरूर करना चाहिए- ”ओम नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प प्रचोदयात”। धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र के जप से सर्प दंश का भय दूर होता है और धन-धान्य में वृद्धि होती है।

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