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विश्व में भारत आस्था, धर्म और आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है। भारत में कई ऐसे रहस्यमयी मंदिर व धार्मिक स्थल है, जहां भारत से ही नहीं वरन अन्य देशों से भी लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते रहते हैं। इन मंदिरों की धार्मिक महत्ता तो है ही, साथ ही साथ कुछ ऐसे रहस्य हैं जो दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पौराणिक काल के मंदिर जहां श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है, वही इनकी रहस्यमय स्थिति वैज्ञानिकों को भी सर खुजाने पर मजबूर कर देती है। आइए खुलासा डॉट इन में हम ऐसे ही भारत के प्राचीन पांच रहस्यमय मंदिर के बारे में बताते हैं।

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कामाख्या मंदिर कामाख्या मंदिर देवी सती का मंदिर है जो गुवाहाटी (असम) से 8 किलोमीटर दूर कामख्या में नीलांचल अथवा नीलशैल पर्वतमालाओं पर स्थित है | मान्यता है कि इक्यावन शक्तिपीठों इसका स्थान सर्वोच्च है। इस मंदिर का तांत्रिक महत्व बहुत अधिक है | हर वर्ष यहाँ पर अम्बूवाची योग पर्व मनाया जाता है | जहां लाखों की संख्या में साधुओं, तांत्रिकों और मांत्रिकों का जमावड़ा लगता है। पौराणिक कथाओ के अनुसार इस जगह पर देवी सती की योनि गिरी थी, जो समय के साथ महान शक्ति-साधना का केंद्र बनी। यह भी मान्यता है कि यहां हर किसी कामना सिद्ध होती है, यही कारण इस मंदिर को कामाख्या कहा जाता है। मंदिर तीन हिस्सों में बना है, मंदिर के सबसे बड़े हिस्से में हर शख्स को जाने की अनुमति नहीं है | दुसरे हिस्से में माता के दर्शन होते है, जहाँ योनि के आकार के पत्थर से हमेशा पानी निकलता रहता है | कहा जाता है साल में एक बार योनि रूपी पत्थर से खून की धारा निकलती है, इसी समय यहाँ अम्बूवाची योग पर्व मनाया जाता है | ये सब क्यों और कैसे होता है, यह आज तक एक रहस्य है ?

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ज्वालामुखी मंदिर ज्वालामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है | ये इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है | मान्यता है कि यहाँ देवी सती की जीभ गिरी थी | इस पवित्र धार्मिक स्थल को खोजने का श्रेय पांडवो को जाता है। जीभ के प्रतीक के रुप में यहां धरती के गर्भ से लपलपाती ज्वालाएं निकलती हैं, जो कि नौ रंग की होती हैं। मान्यता है कि ये नौ रंग की ज्योतियों में माँ के नौ रूपों का वास है ये है - महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी | किसी को ज्ञात नही है कि ये ज्वालाये कहाँ से उत्पन्न हो रही है ? ये नौ रंग की कैसे है ?

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काल भैरव मंदिर भगवान काल भैरव का प्राचीन मंदिर उज्जैन,मध्य प्रदेश से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । यहाँ कि परंपरा के अनुसार, उनके भक्त उन्हें प्रसाद के तौर पर केवल शराब ही चढ़ाते हैं। जब शराब का प्याला काल भैरव की प्रतिमा के मुख से लगाया जाता है, तो वह एक पल में खाली हो जाता है, और यही बात इस मंदिर को रहस्यमयी बनाती है |

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करणी माता मंदिर करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है, जिसे चूहों वाले मंदिर, मूषक मंदिर आदि नाम से भी जाना जाता है, जिसका कारण है यहाँ रहने वाले 20,000 से अधिक चूहे | यहाँ अधिकतर काले चूहे हैंे, लेकिन कुछ सफ़ेद चूहे भी है | मान्यता है कि जिन्हें सफ़ेद चूहे दिख जाते है उनकी हर कामना पूरी हो जाती है | चूहे बिना किसी को कोई नुकसान पहुचाये मंदिर परिसर में कूद फांद करते है, ये लोगो के शरीर पर भी चढ़ जाते है मगर किसी प्रकार की कोई हानि नहीं पहुचाते | यहाँ चूहे इतनी अत्याधिक संख्या में है कि लोग पाँव उठाकर भी नहीं चल सकते | रहस्य की बात ये है कि इतनी तादाद में पाए जाने वाले चूहे कभी मंदिर से बाहर नहीं निकलते |

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मेहंदीपुर बालाजी मंदिर मेहंदीपुर के बालाजी धाम, भगवान हनुमान के 10 प्रमुख सिद्धपीठों में गिना जाता है जो कि राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है | मान्यता है कि इस स्थान पर हनुमानजी जागृत अवस्था में विराजते हैं। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित हनुमान अंक के अनुसार यह मंदिर करीब 1 हजार साल पुराना है । इस मन्दिर को बुरी आत्माओं और काले जादू से पीड़ितो की मुक्ति का एकमात्र मार्ग माना जाता है। यहां आने वाले पीडित लोगों को देखकर सामान्य लोगों की रूह तक कांप जाती है। इस मंदिर में रात में रुकना मना है। ऐसा कैसे होता है, यह एक रहस्य है, लेकिन लोग सदियों से भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं से मुक्ति के लिए दूर-दूर से यहां आते हैं।

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