• बीमार को बिस्तर पर चैन की तलाश रहती है, पर आराम नहीं मिलता

  • बीमार के साथ परिवार वाले भी परेशान रहते है

  • मुफ्त की सलाह से दूरी बनाये

यदि आप नींद न आने की बीमारी से जूझ रहे है तो ऐसे में इस बीमारी से जुड़े कई भ्रामक तथ्य आपको भी यकीनन परेशान भी कर रहे होंगे। बता दे कि इस बीमारी से जुडी कई बाते ऐसी अफवाहें है जो सुनने में सत्य जैसी लगती है, परन्तु ऐसा नहीं है, जबकि इस बीमारी से उत्पन्न होने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी बेहद ही कम है या न के बराबर है । तो चलिए आपको बताते है कि यदि आप नींद न आने से परेशां है तो आप किन समस्याओं के शिकार हो सकते है –

बार बार घड़ी पर नज़र जाना

अधिकांश लोगों का मानना हैं कि ये अजीबोगरीब बीमारी अव्यवस्थित लाइफस्टाइल, देर रात तक पार्टी करने और बहुत अधिक मात्रा में कैफीन लेने के कारण होती है। नींद न आने की बीमारी से पीड़ित मरीजों को घड़ी हमेशा मुंह चिढ़ाती हुई नजर आती है। इस बीमारी से पीड़ित शख्स सेकंड-सेकंड पर घड़ी देखता है। घड़ी उसे अपनी दुश्मन लगती है।

बीमार को बिस्तर पर चैन की तलाश रहती है, पर आराम नहीं मिलता

उन लोगों से जलन होती है जिन्हें कहीं भी, कभी भी नींद आ जाती है। अनिद्रा के मरीज के लिए नींद किसी वैम्पायर की नींद की तरह हो जाती है और जब वह बिस्तर पर चैन की तलाश में पहुंचता है तो आराम नहीं मिलता। इस बीमारी में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने अपना डिनर कब किया या फिर आपने अपने कमरे की लाइट कितनी जल्दी बंद कर ली। नतीजा यह होता है कि कई बार तो दिमाग काम करना ही बंद कर देता है।

मुफ्त की सलाह से दूरी बनाये

वैसे मुफ्त की सलाहें तो हर बीमारी में मिलती हैं पर अनिद्रा के मरीज को कई तरह की सलाह दी जाती है। मसलन, फल एवं दवाई से तुम्हारी ये बीमारी दूर हो जाएगी। हल्का खाना खाया करो, नींद अच्छी आएगी। स्मार्ट फोन से थोड़ी दूरी बनाकर रखो आराम मिलेगा और सबसे मजेदार यह कि कई लोग लैवेंडर की खुशबू वाली तकिया लगाने तक की सलाह भी दे देते हैं। पर यह सब कुछ बेकार साबित होता है। शरीर बुरी तरह थका होता है और दिमाग अपनी चलाने पर अड़ा रहता है।

बीमार के साथ परिवार वाले भी परेशान रहते है

मरीज के साथ ही घरवालों को भी एक बीमारी हो जाती है, कंफ्यूज रहने की, उन्हें ये समझ नहीं आता है कि आखिर बीमार को नींद क्यों नहीं आ रही है और अगर नींद नहीं आ रही है तो वो बेचारा काम कैसे करेगा। वे अपनी तरफ से हर कोशिश करते हैं। मरीज को एक मुलायम सा तकिया गिफ्ट करते हैं, कुछ अच्छे और सॉफ्ट म्यूजिक कलेक्शन देते हैं पर फायदा, बिस्तर की हर सिलवट उसे पागल करने लगती है और अंधेरे कमरे में हर परछाई उसे भूत के होने का एहसास कराती है।

बीमार का दिमाग जोड़ने-घटाने में उलझा रहता है

रात होने के साथ ही इस बीमारी से जूझ रहे शख्स का दिमाग जोड़ने-घटाने में उलझ जाता है। हर रात उसे एक ही ख्याल आता है कि वो अगर अभी सोने गया तो कितने घंटे सो पाएगा। क्या जब अलार्म बजेगा तो वो समय से उठ पाएगा या नहीं। हर रोज यही खेल खेलते, सोचते, जोड़ते-घटाते, उस राक्षस का पीछा करते नींद न आने से परेशान मरीज बिस्तर पर पहुंचता है और सारी जद्दोजहद करके आंख बंद करता है। पर इससे पहले कि सपनों वाली नींद आए सुबह का अलार्म बज जाता है और फिर सुबह हो जाती है।

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