• विश्व हृदय दिवस प्रत्येक वर्ष 29 सितम्बर को मनाया जाता है

  • जागरूकता पैदा करने और हृदय संबंधी समस्याओं से बचने के लिए यह दिन मनाया जाता है

  • विश्व हृदय दिवस पर लोगों को हृदय की बीमारी के बारे में बताया

नयी दिल्ली 29 सितम्बर ।  कोरोना महामारी काल चल रहा है। लॉकडाउन होने के कारण भारत का हर वर्ग आर्थिक रुप से कमजोर हो गया। बिज़नेस बंद हो गए ,कंपनी बंद हो गई ,लोगों की नौकरी चली गई। लॉकडॉउन तो खुल गया लेकिन लोगों की समस्या खत्म नहीं हुई।बल्कि बढ़ गई जिसके कारण अनेक लोग हृदय की समस्या से ग्रसित हो गए। विश्व हृदय दिवस प्रत्येक वर्ष 29 सितम्बर को मनाया जाता है। हमारे शरीर का सबसे अहम हिस्सा है हृदय। अगर ये सही है तो आपके चेहरे पर मुस्कान हमेशा बनी रहेगी। हृदय के प्रति जागरूकता पैदा करने और हृदय संबंधी समस्याओं से बचने के लिए दुनियाभर में हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग तनाव, गलत खान-पान, स्मोकिंग, एल्कोहल और गुस्से की वजह से हृदय पर एक्सट्रा दबाव बनता है, जिससे हृदय सुचारु रुप से कार्य नहीं कर पाता और हृदय की बीमारियों के साथ हाई बी.पी, हाई कोलस्ट्रॉल का शिकार होने लगते हैं।विश्व हृदय दिवस, 29 सितंबर साल 2010 में सबसे पहले मनाया गया था। विश्व हृदय दिवस पर लोगों को हृदय की बीमारी (हर्ट स्ट्रोक,हर्ट अटैक और हर्ट फेल्योर) के बारे में बताया जाता है।

कॉरोना महामारी में योग और आयुर्वेद ने एहम भूमिका निभाई है।इस बीमारी से लड़ने के लिए इम्यूनिटी बूस्टर आयुर्वेदिक दवाएं, योगासन एवम् प्राणायाम बहुत ही कारगर साबित हुए।
आज हम विश्व हृदय दिवस के अवसर पर हृदय रोग में योग की भूमिका के बारे में बताएंगे।

उत्तर प्रदेश आयुष सोसाइटी द्वारा संचालित, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवम् यूनानी अधिकारी डॉ अशोक कुमार राना के निर्देशन में चल रहे योग वैलनेस सेंटर शास्त्री नगर की योग प्रशिक्षक वंदना मिश्रा ने हृदय रोग में योग की भूमिका को बहुत एहम बताया है।उन्होंने योग के विभिन्न आयामों के माध्यम से हृदय को स्वस्थ्य रखने के उपाय बताए।

यौगिक क्रियाएं

आसन=संधि संचालन (श्वास प्रश्वास पर ध्यान देते हुए), ताड़ासन, त्रियक ताड़ासन, कटिचक्रासन (5 बार), शवासन (15 मिनट), भुजंगासन, मकरासन, सुप्तवज्रासन, पवमुक्तासन, पुनः शवासन ।

प्राणायाम : नाड़ीसोधन , भ्रामरी,शीतली, उज्जायी प्राणायाम (5 -7 बार प्रत्येक )

क्रिया : कपालभाति (10 से 25 स्ट्रोक प्रतिदिन)

ध्यान : सोहम साधना,योग निद्रा
अन्य : हास्य योग,ओम ध्वनि (5 मिनट),गायत्री मंत्र जप।

सावधानी : हृदय के रोगियों को कोई भी योगासन अधिक समय तक नहीं करना जिनसे थकान और तनाव महसूस हो।यदि ऐसा होता है तो 10-15 मिनट शवासन करें।तथा किसी कुशल योग प्रशिक्षक की देख देख में ही करें।

योग के साथ साथ हृदय को स्वस्थ बनाने के लिए हमें अपने खानपान पर भी पूरा ध्यान देना है। संतुलित आहार,फल एवम् फलों का जूस, सलाद ,अंकुरित दालों आदि का सेवन करना चाहिए। तथा कॉफी, एल्कोहोल, स्मोकिंग, नॉनवेज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। हमेशा प्रसन्न चित रहे।

वंदना मिश्रा

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें