• नाड़ी शोधन प्राणायाम से चिंता, तनाव या अनिंद्रा की समस्या से राहत

  • इस प्राणायाम को करने से खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है

  • अगर आप ज्यादा देर तक ये प्राणायाम करने में असमर्थ हो तो इसे कम समय के लिए ही करें

  • इस प्राणायाम में भी सांस लिया और छोड़ा जाता है

कोरोनावायरस संक्रमण को मात देने के लिए डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पुलिसकर्मी जी जान से जुटे हैं। वही वैलनेस सेंटर पर योग ट्रेनर के पद पर तैनात वंदना मिश्रा आइडियल और सुंदरदीप क्वॉरेंटाइन सेंटर पर कोरोना संक्रमितों, नर्सिंग स्टाफ और पुलिसकर्मियों को योगा सिखा रही हैं ताकि वह शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत हो सके। वंदना का कहना है कि अगर इंसान नियमित रूप से योग करें तो बीमारी आसानी से उसे हो ही नहीं सकती।

वंदना मिश्रा आयुष विभाग द्वारा संचालित योग वैलनेस सेंटर शास्त्री नगर में योगट्रेनर के पद पर तैनात हैं। वंदना गाजियाबाद जिले में बने क्वारेंटाइन सेंटरो में अलग अलग दिनों में जाकर कॉरोना संक्रमितों को योग करा रही है। योग में कई आसान एवं प्राणायाम हैं जिनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
वंदना ने बताया की नाडी शोधन प्राणायाम को करने से बहुत सारे रोग दूर हो सकते हैं।

 

नाड़ी शोधन प्राणायाम

नाड़ी शोधन, प्राणायाम के मुख्य प्रकारों में से एक है। नाड़ी’ शब्द का अर्थ है, ‘मार्ग’ या ‘शक्ति का प्रवाह’ और ‘शोधन’ का अर्थ होता है, ‘शुद्ध करना’। नाड़ी शोधन का अर्थ हुआ, वह अभ्यास जिससे नाड़ियों का शुद्धिकरण हो। नाड़ी शोधन प्राणायाम शरीर की अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाने वाला प्राणायाम है। जो मस्तिष्क, शरीर और भावनाओं को सही रखता है। मेडिटेशन अभ्यास शुरू करने से पहले इस प्राणायाम का अभ्यास मस्तिष्क को शांत करने के लिए कर सकते हैं। नाड़ी शोधन प्राणायाम से चिंता, तनाव या अनिंद्रा की समस्या से राहत मिलती है।
अन्य प्राणायाम की तरह इस प्राणायाम में भी सांस लिया और छोड़ा जाता है। नाड़ी शोधन प्राणायाम से खून तो साफ़ होता ही है साथ ही खून में ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ जाता है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम करने का तरीका

सबसे पहले सुखासन या पद्मासना में बैठें।अपने दोनों हाथ अपने जांघों पर रखें और रिलैक्स हो जाएं और अपनी आंखें बंद करें।
अपने दायें हाथ के अंगूठे से दायीं नाक को बंद करें।
दायीं नाक बंद करने के बाद अपनी बायीं नाक से धीरे-धीरे एक गहरी सांस लें। जब फेफड़े हवा से भर जाए तब उतने समय के लिए सांसें रोके जिसे कुंभक भी कहते हैं। सांस छोड़ने में भी उतना समय लगायें जितना आपने सांस लेने में लिया था। पूरी तरह से सांस छोड़ने के बाद दायीं नाक से अंगूठा हटायें और दोनों हाथों को अपने जांघ पर वापस रख लें।
अपने बाएं हाथ के अंगूठे से बायीं नाक को बंद करें।
अपनी दायीं नाक से धीरे-धीरे एक गहरी सांस लें। जब फेफड़े हवा से भर जाए तो अपनी सांस रोके। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़े। सांस छोड़ने में भी उतना समय लगायें जितना आपने सांस लेने में लिया था।

नाड़ी शोधन प्राणायाम करते समय बरतें सावधानियां

  • नाड़ी शोधन प्राणायाम करते समय सांस उतना हीं रोकें जितना आपका सामर्थ्य हो।
  • अगर आप अस्थमा के मरीज हैं या फिर किसी भी तरह के हृदय रोग से पीड़ित हों तो ये प्राणायाम न करें।
  • अगर आप ज्यादा देर तक ये प्राणायाम करने में असमर्थ हो तो इसे कम समय के लिए ही करें।
  • ये प्राणायाम खाली पेट ही करें।
  • किसी भी तरह का प्राणायाम हमेशा किसी योग प्रशिक्षक के नेतृत्व में ही करें।

नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदे

  • नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से खून साफ़ होता है तथा श्वाशन तंत्र मजबूत बनता है।
  • इस प्राणायाम को करने से खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है।
  • इस प्राणायाम को करने से फेफड़े और श्वशन तंत्र के अन्य अंग मजबूत बनते हैं।
  • नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से सिरदर्द, माइग्रेन, बेचैनी और तनाव की समस्या दूर होती है।
  • नियमित रूप से नाड़ीशोधन प्राणायाम करने से एकाग्रता बढ़ती है।

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें