•  1.3 अरब आबादी के बड़े घरेलू बाजार में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास की क्षमता
  • भारत को 2030 तक बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए करीब 4500 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी
  • भारत ने ‘नेशनल इंफास्ट्रक्चर पाइपलाइन’ के तहत चिह्नित करीब 7,000 परियोजनों का सूचना संग्रह जारी

वाशिंगटन। अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत अमेरिका को एक निकट मित्र और एक ऐसे मजबूत साझीदार के तौर पर देखता है, जो भारतीयों की विकास संबंधी आकांक्षाओं को वास्तविकता में बदलने के लिए अहम है। उन्होंने ‘द इंडस आन्ट्रप्रनोर ग्लोबल एंड टाई डीसी’ के साथ गोलमेज बैठक के दौरान कहा कि भारत के आकार के कारण वहां उद्यमियों, निवेशकों और कॉरपोरेट जगत के लिए बड़े अवसर हैं। संधू ने कहा कि 1.3 अरब आबादी के बड़े घरेलू बाजार में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास की क्षमता है और यहां विशाल दक्ष कार्यबल है।

राजदूत ने कहा कि भारत को 2030 तक बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए करीब 4500 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि भारत ने ‘नेशनल इंफास्ट्रक्चर पाइपलाइन’ के तहत चिह्नित करीब 7,000 परियोजनों का सूचना संग्रह जारी किया। संधू ने कहा कि बुनियादी ढांचों में निवेश के वित्तपोषण के लिए सार्वजनिक एवं निजी निवेश दोनों अहम हैं। उन्होंने दुनियाभर के उद्यमियों से कहा, ‘‘भारत के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अपार अवसर हैं।

भले ही वह हाइड्रोकार्बन या नवीकरणीय ऊर्जा हों, स्वास्थ्य और फार्मा हों, आईटी और डिजिटल सेवाएं हों या इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और खाद्य प्रसंस्करण हो। आप भारत में निर्माण कर सकते हैं और दुनिया के लिए निर्माण कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तकनीक को सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अहम उपकरण मानते हैं। संधू ने कहा, ‘‘दुनिया का सबसे बड़ा बॉयोमीट्रिक कार्यक्रम आधार हो, सबसे बड़ा वित्तीय समावेशिता कार्यक्रम जन धन योजना हो या फिर सबसे बड़ा स्वास्थ्य कार्यक्रम आयुष्मान भारत हो, सभी में तकनीक एवं नवोन्मेष निहित है।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस सप्ताह दो बड़े डिजिटल वैश्विक शिखर सम्मेलनों को संबोधित किया, जिसमें अमेरिका मुख्य साझीदार था। इनमें से एक सम्मेलन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और दूसरा सम्मेलन सामाजिक सशक्तीकरण के लिए कृत्रिम मेधा पर आधारित था। उन्होंने कहा, ‘‘ये शिखर सम्मेलन एक अहम संदेश को रेखांकित करते हैं: वह है सहयोग एवं गठजोड़ की भावना। भारत अपने संसाधनों, विशेषज्ञता एवं कौशल को दुनिया के साथ साझा करने में विश्वास करता है। इसी तरह हम सभी ओर से नए विचारों को ग्रहण करने से गुरेज नहीं करते।’’ संधू ने कहा, ‘‘हमने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ पर सदैव विश्वास किया है।’’

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