• 1930 के दशक में आई महामंदी के स्तर पर पंहुचा अमेरिका

  • न्यूयॉर्क में संक्रमितों की संख्या 27 लाख पहुंची

  • आर्थिक संकट के प्रभाव को कम करने के लिए 500 अरब डॉलर का व्यय पैकेज

न्यूयॉर्क, 24 अप्रैल (एजेंसी)। विश्व में कोरोना वायरस की सबसे ज्यादा मार इटली और अमेरिका पर पड़ी है । सूत्रों की माने तो अमेरिका पर संकट के बादल दिन-ब-दिन और गहराते जा रहे है, परिणामस्वरूप अमेरिका में बेरोजगारी दर बढ़ती ही जा रही है, जो कि 1930 के दशक में आई महामंदी के स्तर तक पहुंच गयी है और अंदेशा लगाया जा रहा है कि देश के हालात इससे भी बतर हो सकते है । बेरोजगारी दर बढ़ने से  प्रत्येक छह अमेरिकी कर्मचारियों में से एक को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। हालाँकि आर्थिक संकट के प्रभाव को कम करने के लिए सदन ने करीब 500 अरब डॉलर का व्यय पैकेज पारित किया है जिससे संकटग्रस्त कारोबारों एवं अस्पतालों की मदद की जा सके।

सरकार ने बताया कि नौकरी से निकाले गए 44 लाख अमेरिकियों ने पिछले हफ्ते बेरोजगारी लाभों के लिए आवदेन किया था। कुल मिलाकर, करीब 2.6 करोड़ लोगों ने पांच हफ्तों में बेरोजगारों को मिलने वाली मदद के लिए आवेदन दिया है। यह संख्या अमेरिका के 10 बड़े शहरों की आबादी के बराबर है। यह भीषण गिरावट है जिसके बाद उस चर्चा को और बल मिलने लगा है कि कारखानों एवं अन्य कारोबारों को बंद से कैसे और कब छूट दी जानी चाहिए। अमेरिका के सबसे अधिक प्रभावित हिस्से, न्यूयॉर्क में ऐसे साक्ष्य उभर रहे हैं कि राज्य के संभवत: 27 लाख निवासी वायरस से संक्रमित है जो कि प्रयोगशाला जांचों में की गई पुष्टि से 10 गुणा अधिक है।

वहीं न्यूयॉर्क सिटी के स्वास्थ्य कमिशनर ऑक्सिरिस बारबोट ने कहा कि शहर में करीब 10 लाख लोग संक्रमित हैं। शहर की आबादी 86 लाख है। वाशिंगटन में, कई सासंद मास्क और रंग-बिरंगे रूमाल चेहरे पर पहने हुए नजर आए तथा कुछ सांसद खाली पड़े आगंतुक वीथिका में बैठे दिखे ताकि अन्य से दूरी बनाई जा सके। सभी ने नये व्यय पैकेज पर चर्चा की। शाम में लगभग सर्वसम्मति से किए गए मतदान की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक पहुंचा दी गई। विधेयक में प्रशासन के 250 अरब डॉलर का आग्रह है जिसे छोटे एवं मध्यम आकार के कारोबारों की वेतन, किराया देने और अन्य खर्चे में मदद करने वाले कोष में डालने की मांग की गई है। ट्रंप ने कहा है कि यह विधेयक कि छोटे कारोबारों की मदद करेगा ताकि लाखों कर्मचारियों को वेतन मिलता रहे।

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