• यह वायरस ज्यादा समय तक हवा में नहीं रह सकता
  • छींक या खाँसी के कणों से फैलता है ये संक्रमण, जिसे ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन के नाम से जाना जाता है
  • इनका आकार 5-10 माइक्रोन तक होता है
  • 175 देशों में वायरस के कुल 1002159 मामले दर्ज हो चुके है

बीजिंग, 04 अप्रैल (एजेंसी)। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार कोविड-19 बीमारी का वायरस हवा में ज्यादा समय तक नहीं रह सकता बल्कि यह श्वसन की सुक्ष्म बूंदों और निकट संपर्कों के माध्यम से फैलता है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि श्वसन संक्रमण विभिन्न आकारों की सुक्ष्म बूंदों के माध्यम से फैल सकता है जैसे छींक या खांसी आदि से कणों से संक्रमण जिसे ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन कहा जाता है, तब होता है जब आपका निकट संपर्क उस व्यक्ति के साथ होता है, ये दुरी एक मीटर के भीतर हो सकती है । इनका आकार आमतौर पर 5-10 माइक्रोन होता है।

हवा में फैलने वाला संक्रमण ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन से अलग होता है

सूत्रों के अनुसार WHO ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति के आसपास के वातावरण में सतहों या वस्तुओं को छूने से भी यह संक्रमण फैल सकता है। इसमें कहा गया है कि हवा में फैलने वाला संक्रमण ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन से अलग है, क्योंकि यह सुक्ष्म बूंदों के भीतर जीवाणुओं की मौजूदगी को दिखाता है और ये जीवाणु आम तौर पर व्यास में पांच माइक्रोन से कम के छोटे कण के रूप में होते है।

175 देशों में वायरस के कुल 1002159 मामले दर्ज हो चुके है

चीन में कोरोना वायरस के 75,465 मरीजों के विश्लेषण में हवा में संक्रमण का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। मौजूदा सबूत के आधार पर डब्ल्यूएचओ कोरोना वायरस मरीजों की देखभाल कर रहे लोगों को खांसने या छींकने से बाहर आने वाली सुक्ष्म बूंदों और नजदीकी संपर्क से सावधानियां बरतने की सलाह देता है। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़े के अनुसार 175 से अधिक देशों में अब तक कोरोना वायरस के कुल 1,002,159 मामले दर्ज किये गये है और 51,485 लोगों की मौत हुई है।

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