साक्षात्कार

अमेरिका में भी दीवाने हैं ठुमरी के: कुमुद दीवान

रियाज, ‘बिजनेस स्टडीज’ और ‘रिसर्च’ इन सबके लिए आप कैसे इतना समय निकाल लेती हैं ?

'बिजनेस स्टडीज’ तो छह साल पहले ही खत्म हो गई, जब मैं ‘परफॉर्मर’ बन गई। 2006 में मेरी पहली ‘परफाॅर्मेंस’ हुई थी। तब से आज तक मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आजकल ‘परफॉर्मेंस और ‘रिसर्च’ का काम इतना ज्यादा है कि ‘बिजनेस स्टडी’ के लिए समय ही नहीं मिलता। अब तो मैं ‘फुल टाइम’ परफॉर्मर’ हूं। रिसर्च में जरूर करती हूं। सस्कृति मंत्रालय की कृपा रही कि उन्होंने कुछ साल पहले मुझे ‘सीनियर फेलोशिप’ दी। इसके तहत मैंने एक तुलनात्मक अध्ययन किया था कि अलग-अलग प्रांतों में ठुमरी के क्या रंग हैं और एक दूसरे पर उनकी क्या छाप है। मेरा यह तुलनात्मक अध्ययन बहुत सराहा गया।

आप भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् की तरफ से कई देशों में गईं और वहां आपने ‘परफाॅर्मेंस दी। आप अमेरिका और कई देशों में गई। वहां पर इसका क्या ‘रिस्पांस रहा?

मेरा बहुत अच्छा अनुभव है। मैं नो देशों में गई। लंदन और यूरोप के कई देशों के अलावा अमेरिका में भी परफाॅर्म किया। ठुमरी ऐसी चीज है कि उसमें एक लचक है। जैसे ही आप उसे गाना शुरू करते हैं तो उसे सुनते ही हर आदमी झूम उठता है। अमेरिका में लोग दीवाने हैं हमारी ठुमरी के। दरअसल आज के जमाने में लोग लंबे समय तक बैठकर खयाल का, एक ‘इंस्ट्रूमेंट’ का और एक ठुमरी का आर्टिस्ट है तो लोग ठुमरी सुनने के लिए बैठे रहेंगे।

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Title: interview of kumad deewan by sharad dutt in Hindi  | In Category: साक्षात्कार interview

शरददत्त

शरद दत्त

शरद दत्त जाने-माने फि‍ल्म-निर्माता/लेखक है। वह चार दशक से अधिक समय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ संबद्ध हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों पर 100 से अधिक वृत्तचित्रों का निर्माण कि‍या है। स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोहों का 33 वर्षों तक सीधा प्रसारण प्रस्तुत किया। इनके अलावा महान संगीतकार अनिल विश्वास की ‘ऋतु आए ऋतु जाए’ शीर्षक से जीवनी। ‘कुंदन’ शीर्षक से कुंदललाल सहगल की जीवनी। और भी कई महत्वसपूर्ण पुस्तकों का लेखन-संपादन। स्वर्ण कमल पुरस्कार, सर्वोत्तम क्रिएटिव प्रोड्यूसर एवार्ड, दूरदर्शन एवार्ड, गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, शमशेर सम्मान आदि‍ कई पुरस्कारों से सम्मा्नि‍त।

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