मैं फिल्मों से पैसा कमाकर फिर उसी में गंवाता हूं: सागर सरहदी

आपने कुछ नाटक भी लिखे हैं और आपके कुछ नाटक बहुत मशहूर भी हुए हैं और आपकी कहानियां जैसा कि आपने कहा कि प्रकाशित भी हो चुकी थीं और वो हिंदुस्तान और पाकिस्तान के रिसालों में छप रहीं थीं। उधर नाटक एक बिल्कुल दूसरी विधा है कहानी से, तो नाटकों की तरफ आपका रुझान कैसे हुआ?

कह सकता हूं कि मैं जन्मजात नाटककार हूं, हालांकि नाटक लिखना इतना आसान नहीं है। स्टेज की जो जरूरत होती है, उसे समझना पड़ता है और मैं समझता हूं कि यह सबसे मुश्किल प्रोफेशन है। यह फिल्म राइटिंग नहीं है, यह स्टेजप्ले राइटिंग है। लेकिन उसमे मैंने लिखना शुरू किया। चूंकि मैं नाटककार था, पैदाइशी नाटक लेखक था। तो नाटक लिखे, हालांकि मैंने कई बार कहा है कि दुनिया के किसी नाटककार के इतने नाटक फ्लाप नहीं हुए, जितने कि मेरे हुए हैं। लेकिन इसका कारण सिर्फ यह था कि मुझे लिखना नहीं आता था।


लेकिन आपने कुछ कामयाब नाटक भी लिखे हैं, जो एकता कपूर ने भी किए।

ये बहुत बाद की बात है और मैं बहुत लोकप्रिय नाटककार हूं। मेरी किताबें छपी हुईं हैं। मेरा तनहाई नाटक एकता ने प्रोड्यूस किया था। उसकी उस जमाने में सिलवर जुबली हुई थी, जो बहुत मुश्किल बात थी। मेरे एकांकी दुनिया के अच्छे नाटकों में गिने जाते हैं। और अभी मुंबई में बी.ए. के कोर्स में लगे हुए हैं।

आपने फिल्मों की पहली कहानी या संवाद कब लिखे ?

-बासु भट्टाचार्य ने फिल्म वित्त निगम से पैसा लेकर एक छोटी-सी फिल्म बनाई थी, जिसे समानांतर सिनेमा नाम बाद में दिया गया था। इस तरह की फिल्मों का बजट बहुत कम होता था लेकिन वो एक फैशन था क्योंकि स्टार सिस्टम हम पर बहुत हावी था। कुछ लोग उसको बुरा मानते थे और कुछ अच्छा भी मानते थे। पूंजीवाद की तरह वो भी हमारे सिर पर हावी था। बासु भट्टाचार्य मेरे दोस्त थे। उनसे मिलना-जुलना था तो वो अनुभव फिल्म बना रहे थे, जिसमें संजीव कुमार और तनुजा थी। तो इसके संवाद मैंने लिखे थे। वहां से मेरी शुरुआत हुई थी। जुबली हुई थी यह फिल्म उस जमाने में। बहुत तारीफ हुई थी उसकी।

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Title: interview of sagar sharhadi by sharad dutt in Hindi  | In Category: साक्षात्कार interview

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