1895 में जब पेरिस में पहली बार लुमिये भाइयों ने लोगों को चलती हुई तस्वीरों के नमूने के बतौर रेलगाड़ी की छवियों को लोगों को दिखाया तो उनमे से बहुत उसे असल मानकर डर गए. 1895 से अब तक सिनेमा द्वारा लोगो को चमकृत करने का सिलसिला निर्बाध गति से आगे बढ़ता जा रहा है. 1895 के अगले ही साल जब यह सिनेमा मुंबई पहुंचा तो भविष्य के बड़े सिनेकार दादा साहब फालेकर ने कई बार तम्बू के अन्दर बने सिनेमा हाल में ताजा सृजित हुई चलती हुई तस्वीरों का आनंद लिया. आज जब सिनेमा स्मार्ट मोबाइल के जरिये हमारी हथेलियों में सिमट गया तब भी बड़े परदे के हिसाब से बनने वाली कलाकृतियों का क्या औचित्य है ? बड़े परदे का औचित्य सिनेमा को आम जीवन से बड़ी छवि में साकार होता देखना है जिसे अंगरेजी मुहावरे में लार्जर देन लाइफ़ भी कहा जाता है. कथा फिल्मों के ख़ास सन्दर्भ में यह जानते हुए भी कि परदे पर दिखाई जाने वाली छवियाँ और कहानियाँ मनगढ़ंत हैं हम हाल में अँधेरा होते ही सबकुछ भूल जाते हैं. शायद यही  वजह है सिनेमा से निर्मित आचार- व्यवहार और वेशभूषा तक का बड़े पैमाने पर अनुकरण किया जाता है. 1970 के दशक में जींस और कुरते का चलन जिस बड़े पैमाने में सारे उत्तर भारत में हुआ उसके लिए क्या हम राजेश खन्ना के योगदान को नहीं याद करेंगे और फिर हाल में ही दिवंगत हुई पुराने जमाने की मशहूर अदाकारा का साधना कट. दक्षिण भारत में खासतौर पर तमिलनाडु में सिनेमा से राजनीतिक सत्ता को हासिल करने वालों की एक सुदीर्घ परंपरा है. एम जी रामचंद्रन और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने वाली जयललिता का सत्ता पर दबदबा अभी तक कायम है. औरफिर 1980 के दशक में आँध्र प्रदेश में करिश्माई तरीके से उभरे एक एकदम नए राजनीतिक दल तेलगु देशम और एन टी आर परिघटना की क्या आप बिना बड़े सिनेमाई परदे के कल्पना कर सकते हैं ? शायद यही वजह है कि समूचे दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर लाजर देन लाइफ़ होर्डिंगों का इस्तेमाल होता है.

सोचिये, यह सब तो हम कथा फिल्मों के सन्दर्भ में कह रहे हैं लेकिन जब दस्तावेज़ी फिल्में भी निर्मित होकर बड़े परदे में दिखाई जाने लगीं तो जन आन्दोलनों को कितना फायदा हुआ, आम आदमी को कैसा संबल मिला ? आनंद पटवर्धन की मशहूर दस्तावेजी फिल्म ‘हमारा शहर’ की याद करिए और याद करिए मिड शॉट में निर्मित वह दृश्य जिसमे पटरी से उखाड़ दी गयी यवतमाल से विस्थापित मराठी महिला महाराष्ट्र पुलिस की कठोर भर्त्सना करती है .

 

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