• इस उम्र में वीपी-ईसीजी नार्मल
  • जांघ की सर्जरी के लिए हुए थे भर्ती
  • बीड़ी-तम्बाखू को हाथ भी नहीं लगाया
  • 100 साल की उम्र तक बजाई बांसुरी

बात कुछ समय पहले की है जब 119 वर्षीय एक बुजुर्ग को सयाजी हॉस्पिटल में जांघ की सर्जरी करवाने हेतु भर्ती होना पड़ा । इस बुजुर्ग व्यक्ति का नाम जबराभाई राठवा है, जो कि मूलरूप से छोटाउदेपुर जिले के कवांट के ननावांटा के निवासी है, जो हाल ही में अपने घर में खाट से अचानक गिर पड़े जिस कारण उनकी बायीं जांघ में फ्रेक्चर हो गया। तुरन्त ही उन्हें सयाजी हॉस्पिटल ले जाया गया । ऑपरेशन से पूर्व जब डॉक्टरों ने इस बुजुर्ग की जांच की तो उनके बीपी और ईसीजी नार्मल देख हतप्रभ रह गए  क्योंकि इतनी उम्र होने के बावजूद वो ऑपरेशन के लिए पूर्णरूप से स्वस्थ थे। आपको बता दें कि निजी अस्पतालों में जिन ऑपरेशन में लाखों रुपए लग जाते है वो सयाजी में बिलकुल मुफ्त होते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार राठवा का ऑपरेशन जटिल तो नही था परन्तु प्रोक्सिमल फिमोरल नेली नाम की हड्‌डी में क्रेक होने के कारण चुनौतीपूर्ण जरुर था। हालाँकि डॉक्टर्स के लिए राठवा एक अबूझ पहेली बन गए क्योंकि इतनी अधिक उम्र हो जाने के बावजूद सब कुछ नार्मल होना डॉक्टरों की टीम के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था ।

जबराभाई राठवा के परिवार के अनुसार वो हमेशा भोजन में मक्के की रोटियां, घर के घी और सब्जी प्रमुखता से लेते है। चूँकि काफी समय पहले उनके सारे दांत गिर गए हैं अत: वो उड़द की दाल का ढेबरा, गेहूं के आटे का भजिया और भात-दूध और घी का सेवन करते हैं और शराब-बीड़ी-सिगरेट-तम्बाखू जैसे किसी भी नशीले प्रदार्थ को हाथ नहीं लगाया ।

उनका परिवार बताता है कि राठवा प्रतिदिन सुबह 4 बजे नियमित रूप से उठ जाते है और वो घर के बाहर खाट पर अधिकांश समय आराम फरमाते हैँ। आपको जानकार ताज्जुब होगा कि 100 साल की उम्र तक वे बांसुरी बजाते रहे | 20 साल तक नानावाट के सरपंच रहने वाले राठवा दोपहर 12 बजे भोजन कर शाम चार बजे तक घर के अंदर आराम करते हैं तथा रात में भी वो जल्द ही भोजन कर लेते हैं।

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