कोरोना वायरस का असर भारत में किस क़दर लोगों को डरा रहा है यह जयपुर में तब देखने को मिला जब शहर के एक अस्पताल में इसके संदिग्ध मरीज़ पहुंचे. जब अस्पताल में पहले से भर्ती मरीज़ों के बीच यह ख़बर पहुंची तो उनमें हड़कंप मच गया और एक-एक कर वो अस्पताल छोड़ कर चले गए.

यह मामला जयपुर में प्रताप नगर के राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज़ (आरयूएचएस) का है. कोराना वायरस के नौ संदिग्ध मरीज़ जब मंगलवार की रात को यहां पहुंचे तो उन्हें दूसरी मंज़िल पर 286 नंबर मेल वार्ड में भर्ती किया गया. लेकिन धीरे-धीरे कर यह ख़बर पूरे अस्पताल में फैल गई और एक-एक कर पहले से भर्ती मरीज़ वहां से जाने लगे.

अब आलम ये है कि अस्पताल के सभी वार्ड ख़ाली हैं. यहां तक कि जो कर्मचारी मौजूद हैं, वो भी ख़ौफ़ज़दा हैं.

इतना ही नहीं, डॉक्टर भी इन मरीज़ों को देखने तक नहीं जा रहे और सभी संदिग्ध मरीज़ केवल वार्ड बॉय और नर्सिंगकर्मियों के भरोसे हैं.

हालात किस क़दर बिगड़े हुए हैं इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि आठ मंज़िला अस्पताल के सभी फ्लोर ख़ाली पड़े हैं.

भर्ती कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीज़ ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर डॉक्टरों से इलाज के लिए विनती कर रहे हैं लेकिन वायरस का डर डॉक्टर्स में भी इस क़दर है कि संदिग्ध मरीज़ों की आवाज़ें उनके कानों तक नहीं पहुंच रही हैं.

साथ ही संदिग्ध मरीज़ों के अस्पताल में पहुंचने से पहले जहां मंगलवार को ओपीडी में 560 मरीज़ इलाज के लिए पहुंचे वहीं इनके भर्ती होने के अगले ही दिन यानी बुधवार को ओपीडी में एक भी मरीज़ नहीं पहुंचा.

अस्पताल प्रशासन का कुछ भी बोलने से इनकार

जब बीबीसी ने आरयूएचएस के प्रिंसिपल डॉ. सुधांशु कक्कड़ से कोरोनावायरस के संदिग्धों के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बारे में जानना चाहा, तो डॉ कक्कड़ ने कहा, “मैं मीडिया से कोई बात नहीं करुंगा. उन्होंने कैबिन से बाहर की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, आप बाहर चले जाएं.”

घुटनों तक का गाउन, कैप, मास्क और चश्मा लगाए सफ़ाई कर्मचारी कृष्णा अभी कोरोनावायरस के संदिग्धों के वार्ड में सफ़ाई करके लौटे हैं. कोरोनावायरस का डर उसकी लड़खड़ाती आवाज़ और अस्पताल प्रशासन पर उसकी खीज से बदइंतज़ामी का आलम साफ़ दिखाई पड़ रहा था.

वो कांपते हाथ से इशारा करते हुए बोले, “इस किट में मुझे कोरोनावायरस संदिग्धों के वार्ड में सफ़ाई करने भेज दिया गया, मेरी भी जान है.” फिर गर्दन हिलाते हुए बोले, “अब मैं वहां नहीं जाउंगा.”

कोरोनावायरस के मरीज़ों की देखभाल कर रहे नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है, “हम लड़ने को तैयार हैं, लेकिन हमें हथियार तो दिए जाएं. हमारे पास न किट है, न आइसोलेशन वार्ड में ज़रूरी संसाधन. हमारी भी जान है, हमारा भी परिवार है. डॉक्टर कोरोना वायरस संदिग्धों के पास नहीं जा रहे हैं. हम नर्सिंग कमचारियों को ही वार्ड में भेजा जा रहा है.”

किट नहीं तो ड्यूटी भी नहीं

अस्पताल प्रशासन की बेरुख़ी और बदइंतज़ामी से नाराज़ नर्सिंग कर्मचारी किट नहीं देने, एसएमएस अस्पताल से डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी नहीं आने के विरोध में आरयूएचएस प्रिंसिपल डॉ. सुधांशु कक्कड़ के केबिन में पहुंच गए. कर्मचारियों ने डॉ. कक्कड़ को तेज़ आवाज़ में किट तक उपलब्ध नहीं करवाने पर गहरी नाराज़गी जताई.

नर्सिंग कर्मचारियों का कहना है, कि उन्हें ड्यूटी पर नहीं आने पर सस्पेंड करने की धमकी दी जा रही है. कर्मचारियों ने प्रिंसिपल को स्पष्ट रूप से कहा कि किट समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाने पर 6 मार्च से ड्यूटी पर नहीं आएंगे, चाहे तो उनको सस्पेंड कर दिया जाए.

जयपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ राजवेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि कोरोना वायरस बेहद संक्रमित करने वाला है. इसलिए ऐसे मरीज़ों का उपचार करने वाले डॉक्टर और नर्सिंगकर्मियों के पास विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के मुताबिक़ ज़रूरी किट होना आवश्यक है.

जब कोरोनावायरस के संदिग्धों के आने की ख़बर मिली

अस्पताल के ही रेज़िडेंट हॉस्टल में रहने वाले 30 वर्षीय डॉ वसीम 3 मार्च तक अस्पताल के आईपीडी में भर्ती रहकर इलाज करा रहे थे. उसी रात कोरोना वायरस के संदिग्ध को अस्पताल में भर्ती किया गया था.

डॉ वसीम बताते हैं, “उस दौरान कोरोना वायरस के संदिग्धों को अस्पताल में भर्ती करने की सूचना पहले से भर्ती अन्य मरीज़ों में फैलने लगी.”

“इलाज करवा रहे लोग पैनिक हो गए. वार्ड में ड्यूटी कर रहे नर्सिंग कर्मचारी भी कोराना वायरस के संदिग्धों पर चर्चा करने लगे. देखते ही देखते उसी रात सभी मरीज़ छुट्टी लेकर जाने लगे. पहले महिला वार्ड ख़ाली हुआ.”

डॉ वसीम ने भी अस्पताल से छुट्टी ले लिया और वो फ़िलहाल आरयूएचएस अस्पताल परिसर के रेज़िडेंट हॉस्टल में ही आराम कर रहे हैं. वह बताते हैं कि हॉस्टल से भी कुछ डॉक्टर छुट्टी पर चले गए हैं.

अस्तपताल में मंगलवार तक चाकसू के मरीज़ हनुमान पुत्र लक्ष्मी नारायण भी भर्ती थे. वह बताते हैं कि कोरोना वायरस के संदिग्धों के भर्ती होने की सूचना पर उनको उसी रात जयपुरिया अस्पताल में रेफ़र कर दिया गया.

वहीं अस्पताल के सामने चाय की दुकान लगाने वाले सीताराम शर्मा कहते हैं, “मैं तो सोच रहा था आज दुकान ही बंद रखूं. यूं तो रोज़ाना पाँच लीटर तक दूध खप जाया करता था, लेकिन कोरोना वायरस के संदिग्धों के यहां भर्ती होने के बाद महज़ एक लीटर दूध का खपना भी मुश्किल हो गया है.”

कहां से आए थे कोरोना वायरस के 9 संदिग्ध?

इटली से 20 पर्यटकों का एक दल 21 से 28 फ़रवरी के बीच राजस्थान घूमने आया. जो उदयपुर, जोधपुर, झुंझुनू, बीकानेर से होते हुए 29 फ़रवरी को जयपुर पहुंचा.

यह दल जयपुर में राजापार्क के होटल रमाडा में ठहरा था. बीमार होने पर एंड्री कार्ली नामक 69 वर्षीय मरीज़ को 29 फ़रवरी को ही जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया. दूसरे दिन उसकी कोरोना वायरस जाँच रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई. इसे कंफ़र्म करने के लिए उसकी और दो बार कराई गई जाँच भी पॉजिटिव मिली.

अब तक सरकार ने क्या किया?

सरकार ने प्रशासनिक निर्णय लेते हुए 3 मार्च को कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज़ कार्ली समेत उसके संपर्क में आए सभी लोगों की जाँच का फ़ैसला किया. इसके साथ ही जहां यह दल ठहरा था, उन सभी 6 होटलों को सील कर दिया. जयपुर के आरयूएचएस अस्पताल को सरकार ने टेक ओवर करते हुए यहां पर कोरोना संदिग्धों को भर्ती करने का फ़ैसला किया.

इस फ़ैसले से नाराज़ आरयूएचएस अस्पताल के डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ़ ने सेवाएं देने से मना कर दिया. उसी रात सरकार ने एसएमएस अस्पताल के क़रीब एक दर्जन डॉक्टर और 30 नर्सिंगकर्मी आरयूएचएस अस्पताल को भेजने के निर्देश जारी किए. लेकिन ख़बर लिखे जाने तक एक भी डॉक्टर या नर्सिंगकर्मी अस्पताल में नहीं पहुंचा है.

साभार बीबीसी

 

 

 

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