• भारत में कोरोना वायरस से अब तक 2000 से अधिक लोगों की मौत

  • तब्लीगी जमात और कोराना का कनेक्शन क्या है?

  • 100 साल पहले हुई तब्लीगी जमात की शुरुआत

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (एजेंसी)। भारत में कोरोना वायरस से अब तक 2000 से अधिक लोग संक्रमित हो गए हैं और करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है। कोराना में हुई मौतों में एक चौथाई मौतों को नई दिल्ली के निजामुद्दीन में इस्लामी प्रचारकों के आयोजना से जोड़ा जा रहा है।

असल में निजामुद्दीन में हो रही इस तब्लीगी जमात में देश विदेश से करीब 2000 से अधिक लोग आए थे और यहां से ये लोग देश के कई राज्यों में चले गए। दिल्ली के निजामुद्दीन में आए इन इस्लामिक प्रचारकों में से कई कोराना के संदिग्ध मरीज भी बताए जाते हैं जिनके कारण अलग अलग राज्यों में इनके संपर्क में आने से कई और लोग कोराना वायरस से संक्रमित हो गए। आइए खुलासा डॉट इन में विस्तार से जानते हैं कि आखिर ये तब्लीगी जमात है क्या और इसके मूलत: उद्देश्य क्या है।

कैसे हुई तब्लीगी जमात की शुरुआत

तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) की शुरुआत लगभग 100 साल पहले देवबंदी इस्लामी विद्वान मौलाना मोहम्मद इलयास कांधलवी ने एक धार्मिक सुधार आंदोलन के रूप में की थी। तब्लीगी जमात का काम विशेषकर इस्लाम के मानने वालों को धार्मिक उपदेश देना होता है। पूरी तरह से गैर-राजनीतिक इस जमात का मकसद पैगंबर मोहम्मद के बताये गए इस्लाम के पांच बुनियादी अरकान (सिद्धातों) कलमा, नमाज, इल्म-ओ-जिक्र (ज्ञान), इकराम-ए-मुस्लिम (मुसलमानों का सम्मान), इखलास-एन-नीयत (नीयत का सही होना) और तफरीग-ए-वक्त (दावत व तब्लीग के लिये समय निकालना) का प्रचार करना होता है। दुनियाभर में एक प्रभावशाली आध्यात्मिक आंदोलन के रूप में मशहूर जमात का काम अब पाकिस्तान और बांग्लादेश से होने वाली गुटबाजी शिकार हो गया है।

कैसे काम करती हैं तब्लीगी जमातें?

दक्षिण एशिया में मौटे तौर पर तब्लीगी जमातों से 15 से 25 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। जमात सदस्य केवल मुसलमानों के बीच काम करते हैं और उन्हें पैगंबर मोहम्मद द्वारा अपनाए गए जीवन के तरीके सिखाते हैं। तब्लीग का काम करते समय जमात के सदस्यों को छोटे-छोटे समूहों में बांट दिया जाता है। हर समूह का एक मुखिया बनाया जाता है, जिसे अमीर कहते हैं। ये समूह मस्जिद से काम करते हैं। चुनिंदा जगहों पर मुसलमानों की बीच जाकर उन्हें इस्लाम के बारे में बताते हैं।

कोविड-19 और तब्लीगी जमात

मार्च की शुरुआत में निजामुद्दीन इलाके में स्थित बंगले वाली मस्जिद में जमातियों का इज्तिमा हुआ। यहीं पर जमात का मरकज यानी केन्द्र स्थित है। बताया जा रहा है कि इस इज्तिमे में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, नेपाल, म्यांमा, बांग्लादेश, श्रीलंका और किर्गिस्तान से आए 800 के अधिक विदेशी नागरिकों ने शिरकत की। सरकार के अनुसार एक जनवरी के बाद से 70 देशों से 2 हजार से अधिक विदेशी जमात की गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिये भारत आ चुके हैं। इनमें से एक हजार से अधिक विदेशी लॉकडाउन के चलते निजामुद्दीन में ही फंस गए। इनमें से कई के पास छह महीने का पर्यटन वीजा है।

विवाद तब खड़ा हुआ जब इज्तिमे में शिकरत कर तेलंगाना जा रहे एक इंडोनेशियाई नागरिक की मौत हो गई। वह 18 मार्च को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को प्रचारकों को लेकर 21 मार्च को सतर्क किया। जमात का दावा है कि निजामुद्दीन मरकज में लगभग 2,500 सदस्य थे।

22 मार्च को अचानक जनता कर्फ्यू की घोषणा हुई, इसके बाद दिल्ली सरकार ने भी ऐसा ही कदम उठाया। आखिरकार प्रधानमंत्री ने 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया, जिसके चलते बड़ी संख्या में जमात के सदस्य मरकज में ही फंसे रह गए जबकि 1,500 लोग वहां से चले गए। तब्लीगी जमात के इज्तिमे में शिरकत करने वालों में फिलिपीन के नागरिक समेत अबतक 10 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जा चुके हैं, जबकि मरकज में ठहरे 285 लोगों को संदिग्ध रोगी मानकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

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