एक शोध के अनुसार यदि ग्लोबल वार्मिंग की समस्या दिन-ब-दिन ऐसी ही बढ़ती रही तो आने वाले समय में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकांश हिस्से पर जन-जीवन के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा। मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में यह पता लगाया है कि जल्द ही अगर ग्लोबल वार्मिग की समस्या का कोई हल नहीं निकाला गया तो आने वाले कुछ सालों में भारत, पाकिस्तान और एशियन देशों के करोड़ों लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है

ड्राइ बल्ब व वेट बल्ब 

अधिकतर दुनिया के मौसम केन्द्रों में दो प्रकार के थर्मामीटर ‘ड्राइ बल्ब’  व ‘वेट बल्ब’ के द्वारा तापमान नापा जाता हैं |  जिनमे हवा का तापमान रिकॉर्ड ‘ड्राइ बल्ब’ थर्मामीटर के द्वारा किया जाता है और ‘वेट बल्ब’ थर्मामीटर के द्वारा हवा की नमी को नापा जाता है तथा मनुष्यों के लिए ‘वेट बल्ब’ के नतीजे ही महतवपूर्ण होते है | मनुष्य के शरीर के अंदर सामान्य तापमान 37 सेंटीग्रेट तथा त्वचा का तापमान आमतौर पर 35 सेंटीग्रेट होता है, इस तापमान के इस अंतर को शरीर से निकलने वाला पसीना पाट लेता है |

यदि वेट बल्ब थर्मामीटर के अनुसार वातावरण का तापमान 35 डिग्री सेंटीग्रेट या उससे अधिक है तो गर्मी से लड़ने  की शरीर की क्षमता तेज़ी से कम होने लगती है तथा इस कारण से एक तंदुरुस्त व्यक्ति की भी करीबन छह घंटे में मौत हो सकती है | इससे बचे रहने के लिए 35 डिग्री सेंटीग्रेट ऊपरी सीमा मानी जाती है तथा 31 डिग्री सेंटीग्रेट का नम तापमान भी अधिकांश प्राणियों के लिए बेहद ख़तरनाक माना जाता है |

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साल 2015 में ईरान के मौसम विभाग ने वेट बल्ब के तापमान को 35 सेंटीग्रेट के आस पास नापा गया था और इसी साल गर्म हवाओ की वजह से भारत और पाकिस्तान में 35 सौ लोगों की मृत्यु हुई थी और आने वाले सालों में भी इस भी इस वजह से और मौत होने की सम्भावनाये बनी हुयी है |

दक्षिण एशिया के ज्यादातर हिस्सो में खतरा

एक शोध के अनुसार यदि उत्सर्जन की दर ज्यादा रहती है तो वेट बल्ब तापमान “गंगा नदी घाटी, उत्तर पूर्व भारत, बांग्लादेश, चीन के पूर्वी तट, उत्तरी श्रीलंका और पाकिस्तान की सिंधु घाटी समेत दक्षिण एशिया के ज्यादातर हिस्से में” 35 डिग्री सेंटीग्रेट के करीब पहुंच जाएगा |

मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं के अनुसार उनके नक्शे से जाहिर होता है कि किन किन  जगहों पर अधिकतम तापमान है तथा ये वही जगहें हैं जहां अपेक्षाकृत गरीब लोग रहते हैं जिन्हें खेती का काम करना होता है और वो उसी जगह हैं जहां खतरा सबसे ज्यादा है|”

प्रोफेसर एल्ताहिर के अनुसार यदि भारत जैसे देश को देखा जाए तो जलवायु परिवर्तन सिर्फ कल्पना भर नहीं लगती, लेकिन इसे रोका जा सकता है| जबकि दूसरे शोधकर्ताओं के अनुसार अगर कार्बन उत्सर्जन पर रोक लगाने के लिए उपाय नहीं किए गये तो इस अध्ययन में बताई गई नुकसानदेह स्थितियां सामने आ सकती हैं|

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