Diogo Alves head has been preserved since 1841 in lab : प्राचीन मिस्र में इंसानों के शवों को प्रिजर्व करने की प्रथा है, जिसका सबूत ममीज है मगर आपको आश्चर्य होगा कि पुर्तगाल की यूनिवर्सिटी में एक ‘सीरियल किलर’ का सिर करीब 150 सालों से प्रिजर्व है, जिसका नाम डिओगो ऐल्वेस है । वो नौकरी की तलाश में लिस्बन आया था परन्तु परिस्थितियों से मजबूर हो कर वो पुर्तगाल का सबसे खूंखार सीरियल किलर बन गया |

डिओगो ऐल्वेस का जन्म स्पेन के गैलेसिया शहर में हुआ था। काम की तलाश जब वो पुर्तगाल की लिस्बन सिटी आया । उसने काफी समय तक काम की तलाश की, लेकिन नाकामयाब रहा। काम न मिल पाने के उसने क्राइम की दुनिया में कदम रखा और सबसे पहले किसानो को लूटकर धनोपार्जन का रास्ता अपनाया । इसके लिए डिओगो ने लिस्बन में एक नदी पर बने पुल को चुना, शाम के बाद वो अक्सर उसी पुल पर उन किसानो पर नज़र रखता जो  किसान अनाज-सब्जियां बेचकर अपने गांव लौटा करते थे और जब कोई किसान अकेला वहां से गुजरता तो वो उसकी हत्या कर के लाश को पुल से नदी में फेंक देता था।

दर्जनों किसानों के गायब होने की खबर जब पुलिस के पास पहुंची तो उन्हें लगा कि आर्थिक तंगी के कारण किसान सुसाइड कर रहे हैं। पुलिस को शक तब हुआ जब नदी से कुछ ऐसे शव मिले, जिनके शरीर पर धारदार हथियारों के निशान थे। पुलिस ने जब जांच शुरू की तो डिओगो ने लूटपाट बंद कर दी और तीन साल के लिए वो अंडरग्राउंड हो गया। तीन साल बाद उसने फिर से लूटपाट शुरू कर दी। मगर डिओगो समझ आ चूका था कि अगर वह अकेला रहा तो बड़ी लूटपाट नहीं कर पाएगा और उसके पकड़े जाने का खतरा बना रहेगा। तब उसने बहुत गरीब लोगों को तलाशना शुरू कर दिया और ऐसे लोगो की गैंग बना ली और फिर बड़ी-बड़ी वारदातों को अंजाम देने लगा।

पुलिस का भी सामना करने के लिए उसने काफी मात्रा में हथियार भी खरीदे । डिओगो गवाह को कभी जिंदा नहीं छोड़ता था। लिस्बन पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, उसे लोगों को क्रूरता से मारने में मजा आता था।

आख़िरकार पुलिस को इस गैंग के बारे में पता चल गया था मगर पुलिस को उसकी लोकेशन का पता नहीं चल पाया क्योंकि वह अपनी गैंग के साथ दिन में अक्सर जंगल में छिपा रहता था। इसी दौरान इस गैंग ने लिस्बन के एक डॉक्टर के घर में धावा बोला। लूट के बाद डॉक्टर का भी बेरहमी से कत्ल  कर के फरार हो गया। पुलिस को तुरंत ही इस घटना की जानकारी मिल गई और इस तरह पुलिस को शक हो गया कि डिओगो आसपास ही कहीं छिपा हुआ है। आखिरकार कुछ दिनों बाद ही डिओगो पुलिस की गिरफ्त में आ गया और 1941 में उसे 70 से अधिक व्यक्तियों की क्रूर हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई।

डिओगो की फांसी के समय पुर्तगाल में फ्रेनोलॉजी (मस्तिष्क विज्ञान) एक पापुलर सब्जेक्ट था। फ्रेनोलॉजी द्वारा इंसान के व्यक्तित्व का पता लगाया जा सकता था। इसके लिए साइंटिस्ट को इंसानी सिरों की तलाश रहती थी। इसी के चलते पुर्तगाल के साइंटिस्ट ने कोर्ट से डिओगो का सिर लेने की अपील की और इस तरह फांसी के बाद डिओगो का सिर काटकर प्रिजर्व कर दिया गया। हालांकि, उस दौरान साइंटिस्ट ने डिओगो के मस्तिष्क की जांच की, लेकिन वे उन कोशिकाओं की पहचान नहीं कर सके, जिससे डिओगो के व्यक्तित्व का पता लगाया जा सके। इसी कारण आज तक उसका सिर लिस्बन की यूनिवर्सिटी में रखा हुआ है |

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