स्पष्ट रूप से छह ऐसे सेक्टर हैं जहां देश न केवल खतरे से बाहर है, बल्कि वह बेहतर भी करेगा। खाद्य पदार्थों का रिकार्ड उत्पादन हुआ है तथा देश की समृद्धि के लिए यह एक अच्छा संकेत है। किसानों के आंदोलन के बावजूद नया विधान नई मार्किट का निर्माण करेगा, इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी तथा किसानों की आय बढ़ते हुए यह उन्हें ढाढस बंधवा सकता है। एक अन्य सकारात्मक विशेषता मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वापसी तथा वस्तुओं का रिकार्ड उत्पादन है। निर्माण के क्षेत्र में भारत इस समय विश्व में ब्राजील और अमरीका के बाद तीसरे नंबर पर है। इसी तरह आटोमोबाइल उत्पादन भी बढ़ा है। कोरोना वायरस के बावजूद वाहनों की मांग अप्रभावित रही है। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्थिति भी पहले के मुकाबले अच्छी है…

 

कोरोना महामारी के अनिष्ट के बाद जिंदगी अब धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। किसी ने भी इस बीमारी के बारे में पहले कभी नहीं सुना था और न ही किसी को इस संक्रामक रोग से ठीक होने का कोई निश्चित उपाय हाथ लगा। इस महामारी के कारण भय का माहौल व्याप्त हो गया था क्योंकि यह रहस्यमयी ढंग से फैलती है तथा चिकित्सा विशेषज्ञों के पास इससे निपटने का कोई इलाज भी नहीं था। लोग इस नए वायरस से इतने भयभीत हो गए थे कि ऐसा लगता था कि यह जीवन की ताकत को हटाकर मानव जीवन का गला घोंट देगा तथा यह इतना संक्रामक हो गया कि ऐसा लगने लगा कि जैसे ही कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से मिलेगा, यह संक्रामक रोग उसे लग जाएगा। सरकारों ने अलग तरह से अपनी प्रतिक्रिया दी। अमरीका में बड़ी संख्या में कोरोना से मौतों के बावजूद वह इससे सामान्य ढंग से निपटा, लेकिन फ्रांस और जर्मनी ने जरूरी कार्यों व सेवाओं को जारी रखते हुए आंशिक पाबंदियां लगाकर इसका सामना किया।

उधर भारत में पूरी तरह लॉकडाउन व कर्फ्यू लगा दिया गया और इस तरह निर्माण व शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गईं। संपूर्ण लॉकडाउन के प्रति भारत की प्रतिक्रिया पहले विचित्र लगी क्योंकि सभी देशों में लॉकडाउन नहीं लगाया गया। धीरे-धीरे संक्रमण से परहेज को जागरूकता सार्वजनिक ज्ञान में तबदील हो गई। भारत में पहली बार सरकार के दिशा-निर्देशों का महत्त्व जनता ने समझा तथा सभी ने उनका पालन भी किया। लोगों ने प्रधानमंत्री द्वारा आहूत थाली बजाओ अभियान में भी ऐहतियाती कदमों का अनुसरण किया। कोरोना योद्धाओं के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए यह एक विचित्र आह्वान था क्योंकि इससे पहले किसी भी प्रधानमंत्री ने लोगों से बर्तन बजाने या मोमबत्ती जलाने को नहीं कहा था। प्रधानमंत्री केवल लोगों से संचार करने की कोशिश कर रहे थे और राष्ट्र के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए प्रार्थना कर रहे थे।

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हेमलिन के ‘पाइड पाइपर’ की तरह उन्होंने नदी तक राष्ट्र का नेतृत्व किया, किंतु सुरक्षा के लिए मृत्यु की नदी में तैरने के लिए यह सब कुछ था। अब जिंदगी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। कारोबारी जिंदगी की ओर लौटती सामान्य स्थिति के कई अच्छे संकेतक हैं। प्रधानमंत्री स्वयं कह रहे हैं कि हम सघन चिकित्सा कक्ष से बाहर हैं, जैसा कि अस्पतालों के मामले में है जहां बीमार लोग उपचाराधीन हैं, किंतु संक्रमण का खतरा अभी भी है तथा लोगों को सभी ऐहतियातें बरतनी चाहिएं। स्पष्ट रूप से छह ऐसे सेक्टर हैं जहां देश न केवल खतरे से बाहर है, बल्कि वह बेहतर भी करेगा। खाद्य पदार्थों का रिकार्ड उत्पादन हुआ है तथा देश की समृद्धि के लिए यह एक अच्छा संकेत है। किसानों के आंदोलन के बावजूद नया विधान नई मार्किट का निर्माण करेगा, इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी तथा किसानों की आय बढ़ते हुए यह उन्हें ढाढस बंधवा सकता है।

एक अन्य सकारात्मक विशेषता मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वापसी तथा वस्तुओं का रिकार्ड उत्पादन है। निर्माण के क्षेत्र में भारत इस समय विश्व में ब्राजील और अमरीका के बाद तीसरे नंबर पर है। इसी तरह आटोमोबाइल उत्पादन भी बढ़ा है। कोरोना वायरस के बावजूद वाहनों की मांग अप्रभावित रही है। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्थिति भी अच्छी है। पहले के 35 बिलियन अमरीकी डालर के मुकाबले यह ज्यादा है। भारत निवेशकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है। भारत का खरीद सूचकांक 56 से 58 तक बढ़ गया है जो कि पिछले दस सालों में सबसे ज्यादा है।

पिछली तिमाही में जीएसटी कलेक्शन भी सबसे ज्यादा है। मार्किट भी करीब 40 हजार इंडेक्स वाले बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज के साथ ‘शूटिंग अप’ कर रही है। जिन क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बनने में अभी समय लगेगा, वे हैं पर्यटन और होटल उद्योग। हालांकि लॉकडाउन हटा दिया गया है, इसके बावजूद होटलों में आक्यूपेंसी अभी भी कम है तथा इस ओर भीड़ का रुख अभी नहीं हुआ है। अन्य महत्त्वपूर्ण क्षेत्र शिक्षा तथा संबंधित संस्थान हैं। यह एक ऐसा बड़ा क्षेत्र है जिसने कोरोना काल में बहुत कुछ खोया है। हालांकि इस दौरान ऑनलाइन टीचिंग तथा विविध ‘होम स्टडी सिस्टम’ जारी रहे हैं। इसने परीक्षाओं तथा लर्निंग एक्टिविटी के शैड्यूल को काफी हद तक प्रभावित किया है। समस्या सोशल डिस्टेंसिंग तथा संक्रमण से परहेज में निहित है।

कोरोना वायरस के सकारात्मक प्रभाव भी रहे हैं। सबसे ज्यादा लाभ यह हुआ है कि काम निपटाने के नए तरीके खोजे गए हैं। इस दौरान मानव की सृजनात्मक प्रतिभा का भी अच्छा परीक्षण हुआ है। डिजिटल संसार ने प्लेटफार्म जूम की क्रिएशन तथा गूगल इत्यादि का प्रयोग करके नए ‘एवेन्यू’ प्राप्त किए हैं। इसने कारोबारी व शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखने में बड़ा योगदान दिया है। एक आम आदमी भी काम को निपटाने के नए तरीके सीख गया है तथा स्कूलों में पढ़ाई को कैसे जारी रखा जाए, इसकी तरकीब ढूंढी गई है। अब उन वस्तुओं की भी ऑनलाइन शॉपिंग हो रही है जिनकी पहले संभव नहीं थी। लोगों ने घरों से काम करना सीखा है तथा कई लोग अब भी, जबकि लॉकडाउन हटा दिया गया है, घर से ही काम जारी रखे हुए हैं।

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कोरोना वायरस के बाद की जिंदगी काफी बदली हुई होगी। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था मजबूत होती जाएगी, वैसे-वैसे नई तकनीकें व नवाचार मानव जीवन में देखने को मिलेंगे। इसके अलावा हमें यह नहीं भूलना है कि अभी केवल लॉकडाउन हटाया गया है, कोरोना वायरस खत्म नहीं हुआ है। हमें पहले की तरह इस वायरस से बचने के लिए सजग रहना है तथा इससे बचाव के सभी ऐहतियाती उपायों का अक्षरशः पालन करना है। भीड़ में जाने से हमें बचना है तथा घर से जब भी बाहर निकलें तो मास्क को जरूर पहनें। इसके अलावा बार-बार साबुन से हाथ साफ करते रहना है अथवा सेनेटाइजर का इस्तेमाल करना है। जब तक कोरोना की कोई दवाई नहीं आ जाती, तब तक सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से खुद भी पालन करना है और अन्य लोगों से भी कराना है। कोरोना से बचाव का यही एकमात्र उपाय है।

-प्रो. एनके सिंह

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