दक्षिण भारतीय और हिंदी फ़िल्मों के मशहूर गायक एसपी बालासुब्रमण्यम का निधन हो गया है. 74 वर्षीय बालासुब्रमण्यम ने चेन्नई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली.

 

हिंदी फ़िल्में देखने वाली नई पीढ़ी के कुछ लोग हो सकता है दिग्गज गायक एसपी बालासुब्रमण्यम के नाम से वाक़िफ़ हों और शायद कुछ ना भी हों लेकिन सलमान ख़ान का नाम तो शायद ही कोई ऐसा हो जो ना जानता हो. जब सलमान ख़ान नए-नए फ़िल्मों में आए थे तो कई सालों तक एसपी बालासुब्रण्यम को सलमान ख़ान की आवाज़ समझा जाता था.

‘मैंने प्यार किया’ के गाने हों या ‘साजन’ या फिर ‘हम आपके हैं कौन’- इन सब फ़िल्मों में सलमान ख़ान को एसपी बालासुब्रमण्यम ने ही आवाज़ दी थी. ये बात भी अगर पुरानी लग रही हो तो कुछ साल पहले आई ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ का टाइटल गाना एसपी बालासुब्रमण्यम ने ही गाया था.

80 के दशक से लेकर नई सदी की शुरुआत तक एसपी बालासुब्रमण्यम हिंदी फ़िल्मों में गाते रहे.

एसपी बालासुब्रमण्यम को श्रद्धांजलि

एसपी बालासुब्रमण्यम की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर फ़िल्मी जगत के लोगों ने शोक व्यक्त किया है.

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, “एसपी बालासुब्रमण्यम की मौत से हमारी सांस्कृतिक दुनिया को बहुत नुक़सान हुआ है. पूरे भारत में घर-घर पहचाना जाने वाला नाम, उनकी मधुर आवाज़ और संगीत ने दशकों तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया. दुख की इस घड़ी में उनके परिवार और उनके चाहने वालों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं. ओम शांति.”

गृहमंत्री अमित शाह ने भी एसपी बालासुब्रमण्यम की मौत पर दुख जताया है.

बॉलीवुड अभिनेता सलमान ख़ान ने लिखा है, “एसपी बालासुब्रमण्यम सर के बारे में सुनकर दिल टूट गया. संगीत की अपनी विरासत में आप हमेशा याद किए जाएंगे. आपके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं.”

क्रिकेट कमेंटेटर हर्ष भोगले ने भी उनकी मौत पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा है, “बहुत दुख की बात है कि हम सब को एसपी बालासुब्रमण्यम को अलविदा कहना पड़ रहा है. लेकिन उन्होंने संगीत का आनंद लेने के लिए अपने पीछे एक शानदार लाइब्रेरी छोड़ रखी है.”

दक्षिण भारत से हिंदी फ़िल्मों तक

दक्षिण भारत में पहचान बना चुके एसपी बालासुब्रमण्यम ने 1981 में आई हिंदी फ़िल्म ‘एक दूजे के लिए’ के लिए पहली बार हिंदी में गाना गाया. उन्होंने यह गाना कमल हासन के लिए गाया और इसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला.

गाना था ‘तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अंजाना’

इसके बाद तो उन्होंने हिंदी में कई मशहूर गाने दिए.

फ़िल्म ‘सागर’ का ‘सच मेरे यार है…’ और ‘ओ मारिया…’, फ़िल्म ‘मैंने प्यार किया’ के गाने जैसे ‘दिल दीवाना…’, ‘कबूतर जा जा…’, ‘आजा शाम होने आई…’ या मेरे रंग में रंगने वाली…’, ‘हम आपके हैं कौन के गाने जैसे- ‘दीदी तेरा देवर दीवाना, पहला पहला प्यार है’ या फिर फ़िल्म ‘रोजा’ का सदाबहार गीत ‘रोजा जानेमन…’ ये सभी एसपी बालासुब्रमण्यम ने ही दिए हैं.

मोहम्मद रफ़ी के फ़ैन

दक्षिण भारत में पैदा हुए और कई भाषाओं में गाना गाने वाले एसपी बालासुब्रमण्यम खुले आम ये कहते थे कि गाना गाने का भाव और प्रेरणा उन्हें हिंदी गानों से मिली.

मोहम्मद रफ़ी के वो बड़े प्रशंसक थे.
सोनू निगम के साथ एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया था, “मैं साइकिल से कॉलेज जाया करता था. रफ़ी का गाना होता था ‘दीवाना हुआ मौसम’ और जिस तरह वो झूम के बोलते थे मैं कई बार चलते-चलते रुक जाता था.”

लेकिन एसपी बालासुब्रमण्यम की हस्ती और उनका हुनर हिंदी फ़िल्मों के दायरे से कहीं बड़ा है, छह बार नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले और वो भी चार अलग अलग भाषाओं में.

कमल हासन, रजनीकांत, एमजीआर, से लेकर सलमान ख़ान और शाहरुख़ ख़ान तक भारत के लगभग हर सुपरस्टार के लिए एसपी बालासुब्रमण्यम ने गाना गाया है.

उनकी आवाज़ कमल हासन पर जितनी सधी हुई सुनाई देती है उतनी ही रजनीकांत पर भी.

अपने शुरुआती दिनों में एसपी बालासुब्रमण्यम एक छोटे से म्यूज़िकल ग्रुप का हिस्सा थे जिसमें इलयाराजा भी थे, जो जगह-जगह प्रस्तुति देते थे.

डबिंग कलाकार

एसपी बालासुब्रमण्यम हरफ़नमौला कलाकार भी थे – वो कमाल के डबिंग आर्टिस्ट थे.

कमल हासन की ज़्यादातर तेलुगु फ़िल्मों में उन्होंने ही डबिंग की. फ़िल्म ‘दशावतारम’ के तेलुगु वर्ज़न में कमल हासन के 10 किरदारों में से अधिकतर की डबिंग उन्होंने ही की थी.

डबिंग के लिए उन्हें दो बार नंदी पुरस्कार भी मिला. नंदी पुरस्कार तेलुगु सिनेमा, थिएटर और टीवी के लिए आंध्र प्रदेश सरकार का सर्वोच्च सम्मान है.

अनिल कपूर, गिरीश कर्नाड, मोहनलाल और रजनीकांत के लिए भी वो तमिल या तेलुगु में डबिंग करते रहे. करियर की शुरुआत से लेकर अब तक उन्होंने कई तमिल और तेलुगू फ़िल्मों में काम किया.

उनकी गायिकी के लिए तो उन्हें हम सभी जानते हैं ही लेकिन बतौर संगीत निर्देशक भी उन्होंने काफ़ी काम किया है.

संगीत निर्देशन

1946 में जन्मे एसपी बालासुब्रमण्यम को शुरु से ही संगीत में दिलचस्पी थी और बचपन में ही उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते थे. संगीत में रूचि ज़रूर थी पर सपना इंजीनियर बनने का था. लेकिन उनकी मंज़िल संगीत की दुनिया में ही शायद तय थी.

1966 में तमिल फ़िल्म श्रीश्री मर्यादा रामन्ना में उन्होंने पहला गाना गाया. वहीं से तमिल और कन्नड़ में भी मौक़े मिलने लगे.

फ़िल्म ‘मैंने प्यार किया’ में सलमान ख़ान. इस फ़िल्म के गीत एसपी बालासुब्रमण्यम ने ही गाए थे.

तमिलनाडु के उस समय के सुपरस्टार एमजीआर की फ़िल्म अड़मई पेन के लिए गाए गए गाने से वो काफ़ी मशहूर हो गए.

शास्त्रीय संगीत और पश्चिमी संगीत को लेकर बनी 1980 की तेलुगु फ़िल्म शंकराभरणम से उन्हें बहुत शोहरत मिली और नेशनल अवॉर्ड भी. जबकि उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा नहीं ली थी.

गिनीज़ रिकॉर्ड

तेलुगु में आई सागर संगमम, स्वाति मुथ्यम और रुद्रवीणा जैसी फ़िल्मों से उन्होंने अपनी गायकी को और निखारा और शास्त्रीय शैली में प्रयोग भी किया.

60 के दशक से गाते आ रहे एसपी बालासुब्रमण्यम 74 साल की उम्र तक सक्रिय बने रहे.

एसपी बालासुब्रमण्यम के बारे में ये मशहूर है कि उन्होंने एक दिन में 21 कन्नड़ गाने गाकर रिकॉर्ड बनाया था.

और ये भी दावा किया जाता है कि सबसे ज़्यादा गाना गाने का गिनीज़ रिकॉर्ड ( क़रीब 40000) भी उनके नाम हैं. लेकिन ख़ुद एसपी बालासुब्रमण्यम ने 2016 में कहा था कि अब तो वो ख़ुद भी गिनती भूल चुके हैं.

 

साभार : बीबीसी

 

 

 

 

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें