• डॉ कलाम के आखिरी शब्द थे आज हम कुछ नया सीखेंगे

  • डॉ कलाम ने दुनिया को अलविदा कहने का सबसे अच्छा तरीका बताया

  • उनका मानना था कि न्यूक्लियर फैमिली में बुजुर्गों की देखरेख नहीं हो पाती

नई दिल्ली 27 जुलाई (एजेंसी) मिशाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध महानतम वैज्ञानिकों में शामिल भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज पुण्यतिथि है, जिसके चलते आज उन्हें पूरा देश श्रद्धांजलि दे रहा है। बताया जाता है कि डॉ. कलाम वैज्ञानिक होने के साथ साथ मनोवैज्ञानिक भी थे, जिसके चलते वो किसी का भी चेहरा पढ़ने में सक्षम थे और वो वो किसी का भी चेहरा पढ़कर उसके बारे में बता देते थे। डॉ. कलाम के व्यक्तित्व से बच्चे भी अछूते नहीं रहे, वो सदैव बच्चों को पढ़ने और जीवन में अपना लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करते रहे।

डॉ कलाम के आखिरी शब्द थे आज हम कुछ नया सीखेंगे

प्राप्त जानकारी के अनुसार एक शाम डॉ. अब्दुल कलाम के नाम शीर्षक से आयोजित गंजिंग कार्निवाल में डॉ. कलाम के विशेष कार्याधिकारी सृजन पाल सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कलाम से जुड़े अनुभव सुनाए थे। सिंह ने डॉ. कलाम से अपनी पहली मुलाकात से लेकर अंतिम समय तक की तमाम यादें लोगों से शेयर की। सृजन पाल सिंह ने बताया कि शिलॉन्ग में जब वह डॉ.कलाम के सूट में माइक लगा रहे थे तो उन्होंने पूछा फनी गाय हाउ आर यू जिस पर उन्होंने जवाब दिया सर ऑल इज वेल। उसी सभा में डॉ. कलाम फिर छात्रों की ओर मुड़े और बोले आज हम कुछ नया सीखेंगे और इतना कहते ही पीछे की ओर गिर पड़े। पूरे सभागार में सन्नाटा पसर गया।

डॉ कलाम ने दुनिया को अलविदा कहने का सबसे अच्छा तरीका बताया

सृजन पाल सिंह ने आगे बताया कि डॉ.कलाम हर किसी से पूछते थे कि जीवन में किस क्षेत्र में पहचान बनाने की ख्वाहिश रखते हो, जिससे सफलता हासिल कर सकें। 10 जुलाई को डॉ. कलाम अपने घर के बगीचे में घूम रहे थे तो मैंने भी डॉ. कलाम से यह सवाल पूछ लिया। उन्होंने जवाब दिया कि मैं चाहता हूं कि दुनिया मुझे शिक्षक के रूप में जाने। फिर बोले कि मेरे हिसाब से दुनिया को अलविदा कहने का सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि व्यक्ति सीधा खड़ा हो, जूते पहना हो और अपने पसंद का कार्य कर रहा हो। यह सुनाते ही सृजन पाल की आंखें नम हो गईं।

उनका मानना था कि न्यूक्लियर फैमिली में बुजुर्गों की देखरेख नहीं हो पाती

सृजन पाल सिंह ने ये भी बताया कि डॉ.कलाम हमेशा देश के विकास, गांवों में शिक्षा का प्रसार, चिकित्सा व्यवस्था में सुधार जैसे मामलों पर गहनता से बातें करते थे। बताया कि वह जब किसी से मिलते थे तो उसे सलाह देते कि वह हर दिन अपनी मां के चेहरे पर एक मुस्कान जरूर दे। आस्था अस्पताल के डॉ.अभिषेक शुक्ल ने बताया कि डॉ.कलाम से कई बार मुलाकात हुई, लेकिन राजभवन की मुलाकात आज भी याद है। वहां मैंने वृद्धजनों की समस्याओं को लेकर उनसे बातचीत की, जिस पर डॉ.कलाम ने कहा कि समस्या संयुक्त परिवारों के खत्म होने की है। न्यूक्लियर फैमिली में बुजुर्गों की देखरेख नहीं हो पाती। उनके सुझाव से वृद्धों के लिए काम करने में काफी सहायता मिली। डॉ. कलाम की कमी हमेशा खलेगी। एक प्रशासनिक अधिकारी राजशेखर ने बताया कि एयरपोर्ट की लॉबी में डॉ.अब्दुल कलाम से 40 मिनट की मुलाकात हुई और इस दौरान उन्होंने विकास के अलावा किसी और मुद्दे पर बात नहीं की।

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